राजस्थान: पीएम-कुसुम योजना से सौर ऊर्जा को मिली रफ्तार, किसानों को हो रहा दोहरा लाभ
06 जनवरी 2026, जयपुर: राजस्थान: पीएम-कुसुम योजना से सौर ऊर्जा को मिली रफ्तार, किसानों को हो रहा दोहरा लाभ – केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना के तहत खैरथल-तिजारा जिले में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL) के किशनगढ़बास डिवीजन अंतर्गत योजना के घटक ‘ए’ और घटक ‘सी’ का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिससे किसानों को सस्ती, स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा उपलब्ध हो रही है।
पीएम-कुसुम योजना का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना, किसानों को ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करना, बिजली वितरण कंपनियों पर सब्सिडी का बोझ कम करना तथा किसानों की आय में वृद्धि करना है। इसके साथ ही यह योजना पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
सहायक अभियंता भीम सिंह ने बताया कि किशनगढ़बास डिवीजन में पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत अब तक घटक ‘ए’ के तहत 8 मेगावाट क्षमता के विकेंद्रीकृत ग्रिड से जुड़े सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित/आवंटित किए गए हैं। इसी प्रकार पीएम कुसुम योजना के घटक ‘सी’ के तहत 30.39 मेगावाट क्षमता की कृषि पंपों की सोलराइजेशन की गई है। यह उपलब्धि जिले में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और कृषि क्षेत्र के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
घटक ए के अंतर्गत किसानों या अन्य उपयुक्त भूमि पर 500 किलोवाट से 2 मेगावाट क्षमता के छोटे सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाते हैं। इन संयंत्रों से उत्पादित बिजली ग्रिड में प्रवाहित की जाती है, जिसे डिस्कॉम द्वारा निर्धारित दरों पर खरीदा जाता है। इससे किसानों और भूमि स्वामियों को दीर्घकालीन एवं स्थिर आय का स्रोत मिलता है।
घटक ‘सी’ के तहत पहले से ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़ा गया है। किसान दिन के समय सौर ऊर्जा से सिंचाई कर पा रहे हैं, जिससे बिजली कटौती की समस्या से राहत मिली है। साथ ही अतिरिक्त सौर ऊर्जा को ग्रिड में भेजकर किसान अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं।
पीएम-कुसुम योजना की आवेदन प्रक्रिया
प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना के अंतर्गत किसानों के लिए आवेदन प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी बनाया गया है। योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसान राज्य नोडल एजेंसी (SNA) के पोर्टल अथवा पीएम-कुसुम की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीकरण के उपरांत विभाग द्वारा आवेदन की जांच एवं सत्यापन किया जाता है, जिसमें घटक ‘ए’ के अंतर्गत भूमि स्वामित्व की पुष्टि तथा घटक ‘सी’ के तहत कृषि पंपों का सत्यापन शामिल है। इसके साथ ही डिस्कॉम अथवा विभाग द्वारा तकनीकी एवं व्यवहार्यता अध्ययन किया जाता है।
सभी औपचारिकताएं पूर्ण होने पर आवेदन को स्वीकृति प्रदान की जाती है, जिसके बाद घटक ‘ए’ के लिए किसान/डेवलपर और डिस्कॉम के बीच विद्युत क्रय समझौता (PPA) तथा घटक ‘सी’ के लिए सोलराइजेशन से संबंधित अनुबंध किया जाता है। स्वीकृति के पश्चात अनुमोदित विक्रेता द्वारा सौर ऊर्जा संयंत्र अथवा सोलर पैनल की स्थापना की जाती है। स्थापना पूर्ण होने पर प्रणाली का परीक्षण कर कमीशनिंग की जाती है, जिसके साथ ही अतिरिक्त सौर ऊर्जा का ग्रिड में निर्यात शुरू हो जाता है और किसान कम लागत या निःशुल्क सिंचाई के साथ-साथ अतिरिक्त बिजली बेचकर आय अर्जित करने लगते हैं।
खैरथल-तिजारा जिले में पीएम-कुसुम योजना के तहत हासिल की गई यह प्रगति ग्रामीण विद्युत ढांचे को सुदृढ़ करने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहित करने में सहायक सिद्ध हो रही है। आने वाले समय में योजना के निरंतर विस्तार से किसानों की आय में और वृद्धि होगी तथा जिले में टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
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