राज्य कृषि समाचार (State News)

रायपुर: खेत बचाओ अभियान के तहत एनआईबीएसएम ने किसानों को सिखाई हरी खाद तकनीक, टिकाऊ खेती पर दिया जोर

06 जून 2026, रायपुर: रायपुर: खेत बचाओ अभियान के तहत एनआईबीएसएम ने किसानों को सिखाई हरी खाद तकनीक, टिकाऊ खेती पर दिया जोर – आईसीएआर-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (एनआईबीएसएम), रायपुर द्वारा चलाए जा रहे “खेत बचाओ अभियान” के तहत ग्राम बिठिया और मोहदी में किसानों के लिए हरी खाद के महत्व एवं उपयोगिता पर जागरूकता एवं सजीव प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने किसानों को हरी खाद तकनीक अपनाकर मृदा स्वास्थ्य सुधारने, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने तथा टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के उपाय बताए।

हरी खाद से बढ़ेगी मिट्टी की उर्वरता

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. पी.के. राय ने किसानों के हित में संचालित संस्थान की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादन को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए टिकाऊ एवं वैकल्पिक कृषि उपायों को अपनाना जरूरी है। उन्होंने एससीएसपी एवं टीएसपी लाभार्थियों के लिए किए जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए किसानों से रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग को कम करने और मृदा उर्वरता बढ़ाने वाली तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया।

खेत में किया गया हरी खाद तकनीक का सजीव प्रदर्शन

संयुक्त निदेशक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. पंकज शर्मा ने खेत में उगाई गई मूंग की फसल को कृषि यंत्रों की सहायता से मिट्टी में मिलाने का सजीव प्रदर्शन किया। उन्होंने किसानों को बताया कि हरी जैविक सामग्री के अपघटन से मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ती है, जिससे पोषक तत्वों की उपलब्धता बेहतर होती है और मृदा की समग्र उर्वरता में सुधार होता है। इससे खेती की लागत कम होने के साथ उत्पादन क्षमता बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

 मृदा स्वास्थ्य और जलधारण क्षमता में होता है सुधार

संयुक्त निदेशक डॉ. अनिल दीक्षित ने बताया कि विभिन्न फसलों का उपयोग हरी खाद के रूप में किया जा सकता है। इससे मिट्टी को प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन प्राप्त होती है, जैविक कार्बन में वृद्धि होती है और मृदा स्वास्थ्य बेहतर होता है। उन्होंने कहा कि हरी खाद के नियमित उपयोग से मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ती है तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है, जिससे खेती अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनती है।

 किसानों ने दिखाई रुचि, वैज्ञानिकों ने किया समाधान

कार्यक्रम में ग्राम बिठिया एवं मोहदी के 92 किसानों ने भाग लिया। इस अवसर पर ग्राम बिठिया के सरपंच दुश्यंत साहू एवं ग्राम मोहदी की सरपंच कावेरी वर्मा भी उपस्थित रहीं। संवादात्मक सत्र के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों की कृषि संबंधी जिज्ञासाओं और समस्याओं का समाधान किया तथा व्यावहारिक सुझाव दिए। किसानों ने हरी खाद तकनीक को मृदा स्वास्थ्य सुधारने और टिकाऊ कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने वाली महत्वपूर्ण तकनीक बताते हुए इसे अपनाने में गहरी रुचि दिखाई।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. के.सी. शर्मा एवं डॉ. प्रियंका मीना की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समापन अवसर पर वैज्ञानिकों ने किसानों से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने का आह्वान करते हुए “स्वस्थ मृदा, सशक्त किसान और समृद्ध भारत” के लक्ष्य को साकार करने पर जोर दिया।

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