राज्य कृषि समाचार (State News)

रायपुर: जशपुर बना फलोत्पादन का नया हब, सेब-नाशपाती की खेती से किसानों की आय में बड़ा इजाफा

25 मई 2026, रायपुर: रायपुर: जशपुर बना फलोत्पादन का नया हब, सेब-नाशपाती की खेती से किसानों की आय में बड़ा इजाफा – छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला अब केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि फलोत्पादन और उद्यानिकी फसलों के क्षेत्र में तेजी से नई पहचान बना रहा है। यहां के किसान अब धान और दूसरी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सेब, नाशपाती, स्ट्रॉबेरी, लीची और चाय जैसी नगदी फसलों की खेती कर बेहतर आमदनी हासिल कर रहे हैं। खास बात यह है कि जशपुर में तैयार हो रहे सेब स्वाद और गुणवत्ता के मामले में कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के सेबों को भी टक्कर दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर जिला प्रशासन, नाबार्ड और उद्यानिकी विभाग मिलकर किसानों को उद्यानिकी फसलों के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहे हैं। किसानों को आधुनिक खेती, पौधों की देखभाल, सिंचाई और बाजार उपलब्धता से जुड़ी विशेष ट्रेनिंग और तकनीकी मार्गदर्शन दिया जा रहा है। इन प्रयासों का असर यह हुआ है कि पिछले दो से ढाई वर्षों में जशपुर के किसानों का रुझान तेजी से फलोत्पादन और नगदी फसलों की ओर बढ़ा है।

410 एकड़ में हो रही सेब की खेती

जशपुर में सेब उत्पादन की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई थी। वर्तमान में जिले में करीब 410 एकड़ क्षेत्र में सेब की खेती की जा रही है, जिसमें लगभग 410 किसान जुड़े हुए हैं। मनोर और बगीचा विकासखंड के साथ शैला, छतौरी, करदना और छिछली पंचायतों में लगाए गए सेब के पौधों ने इस वर्ष बेहतरीन गुणवत्ता और बड़े आकार के फल दिए हैं।

रूरल एजुकेशन एंड डेवलपमेंट सोसाइटी (READS) के अध्यक्ष श्री राजेश गुप्ता ने बताया कि जिले के सैकड़ों किसान अपने एक-एक एकड़ खेत में सेब की खेती कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि जशपुर में तैयार हो रहे सेब स्वाद और गुणवत्ता में हिमाचल और कश्मीर के सेबों के बराबर हैं।

3,500 एकड़ में फैली नाशपाती की खेती

जिले में नाशपाती की खेती भी बड़े स्तर पर हो रही है। लगभग 3,500 एकड़ क्षेत्र में फैले नाशपाती के बागानों से 3,500 से अधिक किसान जुड़े हुए हैं। सन्ना, पंडरापाठ, कंवई, महुआ, सोनक्यारी, मनोरा, धवईपाई और गीधा जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नाशपाती का उत्पादन हो रहा है।

यहां से नाशपाती की पैकिंग कर दिल्ली, उत्तरप्रदेश, ओडिशा सहित कई राज्यों में भेजी जाती है। जिले में नाशपाती का वार्षिक उत्पादन करीब 1 लाख 75 हजार क्विंटल तक पहुंच चुका है। किसानों को इससे प्रति एकड़ हर साल लगभग 1 लाख से डेढ़ लाख रुपये तक की आमदनी हो रही है।

किसानों को मिल रहा तकनीकी सहयोग

उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और बाजार तक पहुंच की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इससे किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं और फसल विविधिकरण के जरिए आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं।

जशपुर में पहले से ही चाय की खेती की जाती रही है और यहां की चाय पत्ती की गुणवत्ता काफी अच्छी मानी जाती है। अब सेब और नाशपाती की सफल खेती ने जशपुर को फलोत्पादन के नए केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया है। इससे न केवल स्थानीय किसानों की आय बढ़ी है, बल्कि जिले की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। आने वाले समय में इन फसलों का रकबा और बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।

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