छिंदवाड़ा के पूरन लाल ने मखाना, मछली पालन और प्राकृतिक खेती से बढ़ाई आय
11 मार्च 2026, छिंदवाड़ा: छिंदवाड़ा के पूरन लाल ने मखाना, मछली पालन और प्राकृतिक खेती से बढ़ाई आय – मध्यप्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इस वर्ष किसानों की आय बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। शासन की इन पहलों का सकारात्मक परिणाम जिले के हर्रई विकासखंड के जनजातीय किसान श्री पूरनलाल इनवाती की प्रेरक सफलता की कहानी के रूप में सामने आया है, जिन्होंने अपनी मेहनत, नवाचार और समेकित कृषि प्रणाली के माध्यम से बंजर भूमि को समृद्ध खेत में बदल दिया है।
बंजर जमीन को बनाया उपजाऊ – हर्रई विकासखंड के निवासी 57 वर्षीय किसान श्री पूरनलाल इनवाती ने लगभग सात वर्षों में अपनी 6 एकड़ पथरीली एवं बंजर भूमि को प्राकृतिक खेती आधारित समेकित कृषि प्रणाली में परिवर्तित कर दिया है। पहले उनके खेत में पानी की भारी कमी थी। दो ट्यूबवेल होने के बावजूद गर्मियों के मौसम में पानी सूख जाता था, जिससे खेती करना मुश्किल हो जाता था। खेत में तालाब और कूप रिचार्ज पिट बनने से जमीन का जलस्तर बढ़ा और अब गर्मी के मौसम में भी सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो जाता है, जिससे खेती की संभावनाएं बढ़ गई हैं।

खेत तालाब से खुली आय की नई राह – खेत में बने तालाब ने श्री पूरन लाल इनवाती के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए। उन्होंने तालाब का उपयोग करते हुए मछली पालन शुरू किया और इसके साथ ही जिले में पहली बार मखाने की खेती का नवाचार भी प्रारंभ किया। मखाने की खेती के लिए उन्होंने बिहार के दरभंगा स्थित राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र से प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इस वर्ष उन्होंने पहली बार अपने खेत तालाब में मखाने की खेती शुरू की है, जिससे भविष्य में अतिरिक्त आय मिलने की संभावना है।
मछली पालन से भी बढ़ रही आय- आत्मा योजना के अंतर्गत वर्ष 2021-22 में आधा एकड़ क्षेत्र में बने खेत तालाब में रोहू और कतला मछलियों का पालन प्रारंभ किया गया। इसके अच्छे परिणाम मिलने पर वर्ष 2022-23 में उन्होंने तालाब में रोहू, कतला, मृगल, सिल्वर कार्प, बिग हेड कार्प, पॉपलेट एवं ग्रास कार्प सहित सात प्रजातियों के लगभग 45 लाख मत्स्य बीज डाले। इससे उन्हें पिछले वर्ष लगभग 1.20 लाख रुपये की आय प्राप्त
हुई।
“पानी को सहेजा तो खुशहाली खेतों तक आ गई,
तालाब बना तो मेहनत भी समृद्धि में बदल गई। ”
समेकित खेती से लाखों की आय – श्री पूरन लाल इनवाती ने खेती को बहुआयामी बनाते हुए समेकित कृषि प्रणाली अपनाई है। वे कृषि के साथ-साथ उद्यानिकी, पशुपालन, मुर्गी पालन और मत्स्य पालन भी कर रहे हैं। प्राकृतिक खेती के अंतर्गत वे मक्का, बैंगन और टमाटर की खेती कर रहे हैं। इसके साथ ही ड्रिप पद्धति से एक एकड़ क्षेत्र में केले की खेती कर रहे हैं, जिससे उन्हें लगभग 6.50 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है। उनके खेत में आम, आंवला, मौसंबी, कटहल, नारियल, एप्पल बेर, ड्रैगन फ्रूट, काजू, लौंग, इलायची, तेजपत्ता, काली मिर्च और बादाम जैसे पौधों का भी रोपण किया गया है, जिनसे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।
समेकित कृषि प्रणाली अपनाने से उनकी कुल आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। फल एवं सब्जी उत्पादन से लगभग 8.50 लाख रुपये की आय प्राप्त होती है, जिसमें 46 हजार रुपये की लागत के बाद करीब 8.04 लाख रुपये का शुद्ध लाभ मिलता है। पशुपालन से लगभग 90 हजार रुपये की आय होती है, जिसमें 16 हजार रुपये की लागत के बाद 74 हजार रुपये का लाभ प्राप्त होता है।इसके अलावा मत्स्य पालन से लगभग 1.20 लाख रुपये की आय होती है, जिसमें 50 हजार रुपये की लागत के बाद 70 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त होता है। वहीं फसल उत्पादन से लगभग 85 हजार रुपये की आय प्राप्त होती है, जिसमें 30 हजार रुपये की लागत के बाद 55 हजार रुपये का लाभ मिलता है। इस प्रकार समेकित खेती के माध्यम से उन्हें कुल लगभग 11.45 लाख रुपये की वार्षिक आय प्राप्त हो रही है, जिसमें लगभग 1.42 लाख रुपये की लागत के बाद करीब 10.03 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित हो रहा है।
इन शासकीय योजनाओं से भी मिला सहयोग- श्री इनवाती को विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ मिला है। इनमें राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत नलकूप खनन, राष्ट्रीय सूक्ष्म सिंचाई मिशन के अंतर्गत स्प्रिंकलर एवं पाइप लाइन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत ड्रिप सिंचाई, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत खेत तालाब, मेड़ बंधान, मुर्गी पालन शेड निर्माण तथा नंदन फलोद्यान का निर्माण शामिल है। इसके अतिरिक्त उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शौचालय निर्माण तथा आत्मा योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण एवं कृषक भ्रमण का भी लाभ प्राप्त हुआ है।
अन्य किसानों को भी दे रहे प्रशिक्षण– नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के अंतर्गत उन्होंने बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर की स्थापना की है और वे फार्मर मास्टर ट्रेनर के रूप में अन्य किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन भी दे रहे हैं।
पुरस्कार और सम्मान – प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए वर्ष 2025 में उन्हें गौ आधारित जैविक खेती के लिए मध्य प्रदेश स्तर पर प्रथम पुरस्कार तथा 1 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्राप्त हुई है। इसके अलावा उन्हें आत्मा योजना के अंतर्गत जिला स्तरीय सर्वश्रेष्ठ कृषक पुरस्कार भी प्रदान किया जा चुका है। उनके खेत का भ्रमण कर सांसद श्री विवेक बंटी साहू, कलेक्टर श्री हरेंद्र नारायन तथा कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी उनके कार्यों की सराहना की है।
“जो किसान प्रकृति के साथ चलना सीख जाता है,
वही खेतों में समृद्धि की नई कहानी लिख जाता है। ”
आज श्री पूरन लाल इनवाती की यह पहल यह साबित करती है कि यदि किसान समेकित खेती, जल संरक्षण और प्राकृतिक खेती को अपनाएं तो सीमित संसाधनों में भी बेहतर आय अर्जित कर सकता है। उनकी सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है और किसान कल्याण वर्ष के उद्देश्य को भी सार्थक कर रही है।
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