इंदौर जिले में आलू-चिप्स उद्योग को मिल रहा है नया स्वरूप

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2 नवंबर 2021, इंदौर । इंदौर जिले में आलू-चिप्स उद्योग को मिल रहा है नया स्वरूप – एक फसल एक उत्पाद योजना के अंतर्गत इंदौर जिले में आलू फसल का चयन किया गया है। आलू तथा इससे बने उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए इंदौर जिले में किए जा रहे विशेष प्रयासों के नतीजे सामने आ रहे हैं।  आलू प्रसंस्करण इकाईयों की स्थापना के लिये किसान आगे आ रहे है। इन किसानों को प्रधानमंत्री सूक्ष्म, खाद्य, उद्योग, उन्नयन योजना के तहत ऋण एवं अनुदान देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिले में अभी तक 6 किसानों को 112 लाख रूपये से अधिक की मदद स्वीकृत की गई है। इनमें से तीन किसानों ने अपनी इकाइयां स्थापित कर ली है।  शेष तीन किसानों द्वारा अपनी इकाइयों का शीघ्र ही भूमिपूजन किया जाने वाला है।

 योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के प्रयास –  उप संचालक उद्यानिकी श्री टी.आर. वास्कले ने बताया कि  इंदौर ,प्रदेश ही नहीं बल्कि देश का प्रमुख आलू उत्पादक जिला है। यहां उत्पादित होने वाली आलू की अनेक विशेषताएं है। इसलिए इंदौर जिले में एक जिला एक उत्पाद के तहत आलू का चयन किया गया है। कलेक्टर श्री मनीष सिंह के मार्गदर्शन में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये कार्य प्रारंभ किये गये हैं।  श्री वास्कले ने बताया कि जिले में 25 से 35 लाख रुपये तक का ऋण किसानों को मुहैया कराया जा रहा है। इसमें अधिकतम 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना अंतर्गत 35 प्रतिशत क्रेडिट लिंक्ड अनुदान पर आलू फसल आधारित नवीन सूक्ष्म उद्योग लगाने हेतु विकासखंडवार प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। कार्यशाला / प्रशिक्षण कार्यक्रमों में वैज्ञानिकों के माध्यम से तकनीकी मार्गदर्शन और फूड सेफ्टी कानून, ब्रांडिंग आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है । जिले में आलू उत्पादक किसानों की समितियों का गठन भी हो रहा है। योजना का क्रियान्वयन उद्यानिकी, उद्योग, सहकारिता , कृषि, नाबार्ड, आदि के समन्वित प्रयासों के साथ किया जा रहा है। इसके तहत जिले के 6 किसानों जिनमें कोदरिया के श्री महेश सूले, श्री प्रीतम सांखले तथा श्री विकास कैलोतरा, पेडमी के श्री राजवीर सिंह डाबर, राजधरा के श्री मनोहर पाटीदार तथा कोदरिया के श्री अशोक कापड़े शामिल हैं । इन्हें लगभग 112 लाख रूपये की वित्तीय मदद दी गई है। इनमें से तीन किसानों ने 73 लाख रूपये निवेश कर  इकाइयां स्थापित कर ली है। शेष किसानों द्वारा इकाइयों की स्थापना का कार्य शुरू किया जा रहा है।

 इंदौर का शुगर फ्री आलू –  इंदौर के  शुगर फ्री आलू की मांग तेजी से बढ़ रही है। यहां से आलू देश के अन्य राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी भेजा जाता  है। इस मांग को देखते हुए  किसान अब बड़ी  संख्या में आलू की खेती के लिये आगे आ रहे हैं । जिले में महू क्षेत्र के ग्राम गवली पलासिया, जामली, बिचौली, कोदरिया, बड़गोंदा, हरसोला, दतोदा, हासलपुर, मेमदी, कुवाली, मानपुर, टीही, राऊ, रंगवासा, कैलोद और मेण में प्रमुख रूप से आलू की खेती की जा रही है। इंदौर की शुगर फ्री आलू से बनी हुई चिप्स तलने में लाल नहीं होती है, वह तलने के बाद सफेद ही रहती है। जिले में हर वर्ष आलू फसल 45 हजार हेक्टेयर में बोई जा रही है। विगत वर्षों में प्रतिवर्ष उत्पादन लगभग 11 से 12 लाख मीट्रिक टन हुआ था। उत्पादकता 25.50 प्रति हेक्टेयर मीट्रिक टन रही थी। जिले में औसत उत्पादकता 250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर मिलती है। किसान अधिकतम उत्पादन 400 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त करते हैं।
     
 गुणों से भरपूर आलू और खाद्य सामग्री –   आलू अनेक गुणों से भरपूर है। आलू में अनेक स्वास्थ्यवर्धक तत्व पाये जाते हैं। इनमें  मुख्य रूप से विटामिन, आयरन, कैल्शियम, मैगनीज, फॉस्फोरस आदि होते हैं। इसके अनेक औषधीय गुण भी है। त्वचा के लिये भी बेहद फायदेमंद है। माना जाता है कि अगर चमड़ी जल जाये तो आलू काटकर उसे लगायें तो तुरंत राहत महसूस होती है। इंदौर में उत्पादित होने वाली आलू की देश-दुनिया में बड़ी माँग है। इससे अनेक स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ बनते हैं। इंदौर में आलू से बनने वाले चिप्स, पापड़, समोसे, कचौड़ी, आलू बड़े, टिक्की, फ्रेंचफ्राइस आदि की विशेष पहचान है। इंदौर में उक्त खाद्य पदार्थ बनाने के लिये वर्तमान में अनेक प्रतिष्ठित कंपनियों द्वारा इंदौर में कारखाने स्थापित किये गये हैं। छोटे स्तर पर भी बड़ी संख्या में कारखाने चल रहे हैं। आलू एक ऐसी खाद्य वस्तु है जिसे प्राय: किसी भी सब्जी में मिलाकर उसका स्वाद बढ़ाया जा सकता है।

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