राज्य कृषि समाचार (State News)

मप्र में ‘पौधरोपण महाअभियान’: 1 दिन में लगाए 2 लाख से अधिक पौधे, हर पौधे की सैटेलाइट से होगी मॉनिटरिंग

04 जुलाई 2025, भोपाल: मप्र में ‘पौधरोपण महाअभियान’: 1 दिन में लगाए 2 लाख से अधिक पौधे, हर पौधे की सैटेलाइट से होगी मॉनिटरिंग –  हरित मध्यप्रदेश की परिकल्पना को साकार करने के लिए लोक निर्माण विभाग ने मंत्री राकेश सिंह की अगुवाई में मंगलवार को पौधारोपण महाअभियान का भव्य शुभारंभ किया। राजधानी भोपाल के चिनार पार्क में आयोजित इस अभियान की शुरुआत में मंत्री श्री सिंह ने स्वयं पौधारोपण किया और सभी नागरिकों से हरियाली को जन आंदोलन बनाने की अपील की।

एक दिन में 2 लाख से ज्यादा पौधे लगाए

शुरुआत में विभाग ने जहां 1 लाख पौधों का लक्ष्य रखा था, वहीं अधिकारियों और अभियंताओं के समर्पण और उत्साह से यह संख्या 2 लाख से अधिक पहुँच गई। मंत्री राकेश सिंह ने कहा, “यह केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि हरित भविष्य के लिए हमारा संकल्प है।”

हर पौधे की होगी सैटेलाइट मॉनिटरिंग

इस अभियान को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखते हुए, विभाग ने इसे वैज्ञानिक तकनीक से जोड़ा है। अहमदाबाद स्थित भास्कराचार्य राष्ट्रीय संस्थान के सहयोग से सभी पौधों की सैटेलाइट मॉनिटरिंग की जाएगी, जिससे पौधों की वृद्धि और संरक्षण की डिजिटल निगरानी हो सकेगी।

जल संरक्षण और हरित तकनीक पर विशेष जोर

मंत्री सिंह ने कहा कि लोक निर्माण विभाग अब केवल संरचनाएं नहीं बना रहा, बल्कि वह जल संरक्षण, हरित तकनीक और पारिस्थितिक संतुलन को प्राथमिकता दे रहा है। विभाग ने ‘लोक कल्याण सरोवर योजना’ शुरू की है, जिसमें सड़क निर्माण से निकली मिट्टी का उपयोग कर 500 स्थायी जल संरचनाएं बनाई जाएंगी।

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वर्षा जल संचयन और ग्राउंड वाटर रिचार्ज की पहल

सड़क किनारे रिचार्ज बोर निर्माण और फ्लाईओवर-आरओबी में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था शुरू की गई है, ताकि भूजल स्तर को पुनर्जीवित किया जा सके। मंत्री ने बताया कि आने वाले वर्षों में इस अभियान को और विस्तार दिया जाएगा।

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पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी

इस अभियान में विधायक भगवानदास सबनानी, सलाहकार समिति सदस्य विक्रांत सिंह तोमर, अजय के जैन, प्रमुख अभियंता व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। प्रदेशभर के लोक निर्माण विभाग के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। मंत्री ने कहा कि “लोक निर्माण से लोक कल्याण” अब केवल नारा नहीं, बल्कि पर्यावरण-संवेदनशील कार्यनीति बन चुका है।”

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