बिजली की चिंता खत्म, सोलर पंप से खेतों की सिंचाई आसान; छत्तीसगढ़ में किसानों के लिए वरदान बनी सौर सुजला योजना
22 अगस्त 2026, रायपुर: बिजली की चिंता खत्म, सोलर पंप से खेतों की सिंचाई आसान; छत्तीसगढ़ में किसानों के लिए वरदान बनी सौर सुजला योजना – छत्तीसगढ़ में किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए सौर सुजला योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने के लिए सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। योजना के तहत किसानों के खेतों में सोलर सिंचाई पंप स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे बिजली पर निर्भरता कम होने के साथ सिंचाई की सुविधा आसान हो रही है।
2016 में शुरू हुई थी योजना
छत्तीसगढ़ में सौर सुजला योजना की शुरुआत 1 नवंबर 2016 को की गई थी। इसका उद्देश्य कृषि भूमि की सिंचाई क्षमता बढ़ाने के साथ उन क्षेत्रों में भी सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है, जहां विद्युत सुविधा नहीं है। योजना के तहत किसानों के खेतों में 3 एचपी और 5 एचपी क्षमता के सोलर सिंचाई पंप लगाए जा रहे हैं। इन पंपों में सोलर मॉड्यूल और कंट्रोलर शामिल होते हैं।
कम अंशदान में सोलर पंप की सुविधा
सौर सुजला योजना किसानों के लिए कम लागत में सिंचाई का विकल्प उपलब्ध कराती है। 3 एचपी सोलर पंप की औसत लागत करीब 2.64 लाख रुपये, जबकि 5 एचपी पंप की औसत लागत करीब 3.64 लाख रुपये है। किसानों की श्रेणी के अनुसार हितग्राही अंशदान निर्धारित किया गया है। 3 एचपी पंप के लिए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसानों को 7 हजार रुपये, अन्य पिछड़ा वर्ग को 12 हजार रुपये और सामान्य वर्ग को 18 हजार रुपये अंशदान देना होता है। वहीं 5 एचपी पंप के लिए क्रमशः 10 हजार, 15 हजार और 20 हजार रुपये अंशदान निर्धारित है। इसके अलावा निर्धारित प्रोसेसिंग शुल्क भी देय है।
धान के साथ दूसरी फसलों की खेती को बढ़ावा
सोलर पंप मिलने से किसानों को सिंचाई के लिए बिजली पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। खासकर आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में, जहां बिजली की पहुंच सीमित है, वहां सोलर पंप सिंचाई का महत्वपूर्ण साधन बन रहे हैं। सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने से किसान धान के अलावा मक्का, गेहूं, दलहन-तिलहन, गन्ना, साग-सब्जियों और बागवानी फसलों की खेती भी कर पा रहे हैं। इससे फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
जल संरक्षण में भी मददगार
सौर सिंचाई पंपों के उपयोग से सौर ऊर्जा और जल संरक्षण के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो रहा है। योजना के तहत गौठानों और चारागाहों में पशुधन के पेयजल, सिंचाई और अन्य जरूरतों के लिए भी सोलर पंप स्थापित किए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलने के साथ पशुधन और कृषि आधारित गतिविधियों को भी सहायता मिल रही है।
5 साल की वारंटी और बीमा
सौर सिंचाई पंप और स्थापित उपकरणों पर 5 वर्ष की निःशर्त ऑन-साइट वारंटी का प्रावधान है। इसके साथ ही 5 वर्ष की बीमा सुविधा भी उपलब्ध है। चोरी, क्षति या टूट-फूट होने पर निर्धारित प्रावधानों के अनुसार संयंत्र के सुधार की व्यवस्था है। सोलर सिंचाई संयंत्रों के पांच वर्षीय संचालन, संधारण और रख-रखाव का भी प्रावधान किया गया है। स्थापित संयंत्रों का निरीक्षण क्रेडा के संबंधित जिला, क्षेत्रीय और जोनल कार्यालयों द्वारा किया जाता है।
शिकायतों के लिए टोल फ्री नंबर
सोलर पंप से संबंधित शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए टोल फ्री नंबर 18001234591 उपलब्ध है। प्राप्त शिकायतों की ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से निगरानी की जाती है और संबंधित स्थापनाकर्ता इकाई द्वारा निर्धारित अवधि में शिकायत का निराकरण किया जाता है।
आवेदन से स्थापना तक पारदर्शी प्रक्रिया
योजना का लाभ लेने के लिए किसान के पास स्वयं की कृषि भूमि और पर्याप्त जल स्रोत होना जरूरी है। इच्छुक किसान संबंधित ग्राम सेवक, कृषि विभाग या क्रेडा कार्यालय से आवेदन प्राप्त कर सकते हैं। कृषि विभाग द्वारा आवेदन की जांच और अनुशंसा के बाद क्रेडा की ओर से स्थल सर्वेक्षण किया जाता है। इसके बाद पंप की क्षमता और प्रकार का आकलन किया जाता है।
निर्धारित हितग्राही अंशदान और प्रोसेसिंग शुल्क जमा होने के बाद स्थापना की स्वीकृति जारी की जाती है। इसके बाद संबंधित इकाई द्वारा किसान के खेत में सोलर सिंचाई पंप स्थापित किया जाता है। सौर सुजला योजना के जरिए किसानों को सिंचाई की सुविधा मिलने से कृषि उत्पादन बढ़ाने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने और अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करने में मदद मिल रही है। सौर ऊर्जा के उपयोग से बिजली पर निर्भरता कम होने के साथ खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में भी यह योजना महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
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