चना फसल में कीट तथा उकटा रोग की रोकथाम हेतु आवश्यक सलाह

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07 जनवरी 2023, बुरहानपुर: चना फसल में कीट तथा उकटा रोग की रोकथाम हेतु आवश्यक सलाह – उपसंचालक कृषि ने कृषकगणों को आवश्यक जानकारी देते हुए बताया कि बादलयुक्त मौसम की संभावना को देखते हुए चने की फसल में इल्लियों के प्रकोप के बढ़ने की संभावना है। चना फसल के खेतो में उकटा रोग से ग्रसित पौधे खेत में छोटे-छोटे टुकड़ो में दिखाई  देते हैं। प्रारंभ में पोधों की पत्तियाँ पीली पड़ने लगती है धीरे-धीरे पूरा  पौधा  सूख जाता है। फसल पर सतत निगरानी रखें एवं प्रकोप की स्थिति में निम्नानुसार उपाय करें –

उकटा रोग की रोकथाम हेतु – शस्य या यांत्रिक नियंत्रण-उचित सिचाई प्रबंधन, जल भराव की स्थिति ना बनने दे। जैविक नियंत्रण – ट्रायकोडर्मा 1 प्रतिशत का 5 किलो प्रति एकड़ के अनुसार उपयोग करें। रासायनिक नियंत्रण- कार्बेन्डाजिममेनकोजेब 1 किलो ग्राम प्रति एकड़ तथा स्ट्रेप्टो साईक्लिन 5 पैकेट प्रति एकड में उपयोग करें।

इल्लियो की रोकथाम हेतु – शस्य या यांत्रिक नियंत्रण के लिए खेत में पक्षियों को बैठने के लिये ’’टी’’ आकार की लकडी की खुटीयां कम से कम एक हेक्टर में 40-50 स्थान पर लगाये तथा फेरोमेन ट्रेप एक हेक्टर में 5-10 का  लगाएं । जैविक नियंत्रण अंतर्गत चने के खेत में एक वर्गमीटर में पांच या अधिक इल्लियाँ दिखाई देने पर एक किलो प्रति हेक्टर के हिसाब से बैसिलस थूरिनजीयेनसिस (बी.टी.) का छिड़काव करें। वहीं रासायनिक नियंत्रण करने के लिए फल्ली छेदक (पॉड बोरर) अथवा तम्बाकू की इल्ली, केटरपिलर पौधे के विभिन्न भाग, जैसे पत्तियां,  शाखाएं , फलियों  एवं दानों को खाती है, इसकी रोकथाम हेतु 200-400 एम.एल. साइपर मैथरीन 25 ई.सी. या इण्डोसाकार्ब 14.5 एस.जी. 500-600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें अथवा प्रोफेनोफॉससायपरमेथ्रिन 400 से 750 एमएल प्रति हेक्टर या इमामेक्टिन बेंजोएट का 10 ग्राम प्रति पंप के हिसाब से छिड़काव करने की समझाईश दी गई।

महत्वपूर्ण खबर: कपास मंडी रेट (05 जनवरी 2023 के अनुसार)

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