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राज्य कृषि समाचार (State News)

प्राकृतिक खेती से लागत कम और बाहरी निर्भरता कम होती है: उप मुख्यमंत्री शुक्ल  

12 जनवरी 2026, भोपाल: प्राकृतिक खेती से लागत कम और बाहरी निर्भरता कम होती है: उप मुख्यमंत्री शुक्ल – मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल एक कृषि तकनीक नहीं, बल्कि जीवन जीने का भारतीय पद्धति है। इससे किसानों की लागत घटाने, आय बढ़ाने और उन्हें बाहरी निर्भरता से मुक्ति मिलती है। इसके उत्पादन से हमारे धरती का तथा परिवार का स्वास्थ्य भी ठीक रहता है। 

उन्होंने किसानों से आह्मवान किया कि अपने खेती योग्य भूमि में से 10 प्रतिशत भूमि में प्राकृतिक खेती करें तथा स्वस्थ्य रहें। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती को आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा गया है। जिले में बसामन मामा गौवन्य विहार में प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण केन्द्र का शुभारंभ हो चुका है। हरिहरपुर फार्म हाउस में इस क्षेत्र के किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जायेगा तथा उन्हें यहां का भ्रमण कराकर प्राकृतिक खेती करने के लिये प्रेरित किया जायेगा।

इसी क्रम में हिनौती गौधाम में भी प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण केन्द्र बनाया जायेगा। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि रीवा जिले को प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में अग्रणी जिला बनाना है। उन्होंने कहा कि गौशालाएं गौसंरक्षण केन्द्र नहीं बल्कि कृषि आदानों के उत्पादन के आर्थिक केन्द्र के रूप में विकसित की जा रही है। गोबर व मूत्र से तैयार जीवामृत, बीजामृत और पंचगव्य जैसे प्राकृतिक इनपुट मिट्टी के सूक्ष्म जीवों में सक्रिय रहते हैं और भूमि की उर्वरता को दीर्घकाल तक बढ़ाते है।

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उप मुख्यमंत्री शुक्ल रीवा के हरिहरपुर स्थित खेत में प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उन्होंने अपने खेत पहुंचकर प्राकृतिक खेती का निरीक्षण किया तथा जैविक इनपुट, मिट्टी की उर्वरता, जल संरक्षण एवं रासायनिक मुक्त खेती की प्रक्रियाओं की जानकारी ली। खेत में प्राकृतिक रूप से पालक, मैथी, धनिया, बथुआ, चौराई, शलजम, गाजर आदि सब्जियों के साथ प्राकृतिक बीजामृत से गेंहू की फसल बोई गयी है जिसमें गोबर की खाद का उपयोग किया गया है। इस दौरान गौसंवर्धन बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष राजेश पाण्डेय, पूर्व संयुक्त संचालक डॉ. राजेश मिश्रा उपस्थित रहे।

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