राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर ने अपना 39वां स्थापना दिवस मनाया
13 दिसंबर 2025, इंदौर: राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर ने अपना 39वां स्थापना दिवस मनाया – भा.कृ.अनु.प.- राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर ने कार्यालय परिसर में अपना 39वां स्थापना दिवस (11 दिसंबर ) मनाया। कार्यक्रम में कृषि विश्वविद्यालय, कोटा (राजस्थान) के पूर्व कुलपति डॉ.ए.के.व्यास, संस्थान के भूतपूर्व निदेशक, डॉ.वी.एस.भाटिया तथा सोपा के कार्यकारी निदेशक श्री डी. एन. पाठक एवं ही रिच सोया सीड कंपनी के डॉ जगदीश कुमार उपस्थित रहे। विशेष अतिथि उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ डी. के. यादव एवं सहायक महानिदेशक (तिलहन एवं दलहन) डॉ. संजीव गुप्ता, भाकृअप , नई दिल्ली ने ऑनलाइन संबोधित किया।
डॉ यादव ने देश की कृषि उपलब्धियों के बारे में बताया कि वर्ष 2024-25 के दौरान खाद्यान्न उत्पादन के साथ-साथ तिलहनी फसलों का उत्पादन भी अच्छा रहा। उनके अनुसार सोयाबीन में विदेशी (एक्सोटिक) जनन्द्रव्य को स्थानीय जलवायु में परीक्षण पश्चात एक किस्म की तरह विमोचित कर सकते हैं। उन्होंने सोयाबीन में उत्पादकता वृद्धि हेतु बीजोपचार को बढ़ावा देने, जनरेशन एडवांसमेंट के लिए स्पीड ब्रीडिंग जैसे अत्याधुनिक तरीकों को अपनाने, नकली कृषि दवाइयों की पहचान के लिए रैपिड डिटेक्शन किट का विकास, सोयाबीन की खेती में बी बी एफ एवं ड्रोन का इस्तेमाल करने, बीज उपलब्धता के लिए उपलब्ध सारथी पोर्टल का इस्तेमाल करने पर जोर दिया।
डॉ. गुप्ता ने सोयाबीन में लगने वाली राइजोक्टोनिया एवं मेक्रोफोमिना की प्रमुख समस्या के प्रबंधन पर विशेष जोर दिया। डॉ.ए.के.व्यास, पूर्व कुलपति कृषि विश्वविद्यालय, कोटा (राजस्थान) ने सोयाबीन की स्मार्ट खेती एवं इसके प्रसंस्करण, टेक्नोलॉजी/डाटा ड्रिवेन खेती पर जोर दिया, क्योंकि इससे उत्पादकता बढ़ती है एवं लागत मूल्य घटता है. उन्होंने वन हेल्थ कांसेप्ट एवं जलवायु अनुकूल सोयाबीन की खेती करने की सलाह दी। इस कार्यक्रम के अध्यक्ष, उप कुलपति, एस.के.आर.ए.यू., बीकानेर, डॉ. एस.पी.तिवारी ने कहा कि किसानों के स्तर पर मूल्य संवर्धन करने की आवश्यकता है तथा कृषक उत्पादक कंपनी (FPC) बनाकर किसान सोयाबीन के बाजार भाव में स्थिरता ला सकते हैं.इसलिए इसमें सेवा क्षेत्र को जोड़ने से किसानों की आय में वृद्धि होगी।
स्वागत भाषण में संस्थान के निदेशक, डॉ. कुँवर हरेन्द्र सिंह ने बताया कि सोयाबीन के प्रजनक बीज के राष्ट्रीय मांगपत्र में संस्थान की किस्मों योगदान 2% से 12 % तक की वृद्धि हुई तथा गुजरात, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों में सोयाबीन के क्षेत्रफल में वृद्धि देखी गई। विगत 3 वर्षो से संस्थान द्वारा छोटी-छोटी थैलियों और सीमित मात्रा में सोयाबीन की नवीनतम किस्मों को दिसम्बर माह के दौरान प्रदान करने से किसान ग्रीष्मकालीन बीजोत्पादन कार्यक्रम अपनाकर लगभग 1 क्विंटल तक बीज बना रहे हैं और उसी को खरीफ के दौरान बोवनी हेतु उपयोग करने से नई एन.आर.सी. 150 जैसी किस्में धीरे-धीरे किसानों में लोकप्रिय हो रही हैं जिससे किसान 20-25 क्विंटल उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं।
इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मोबाइल एप “सोयाबीन ज्ञान” समेत कुल पांच प्रकाशन का विमोचन किया गया । साथ ही सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों का सम्मान एवं विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों को उत्कृष्ट कार्यों के लिए पुरस्कृत किया गया। मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों के 7 प्रगतिशील किसानों को “प्रगतिशील कृषक सम्मान” से सम्मानित किया गया।कार्यक्रम का संचालन सुश्री प्रियंका सावन तथा धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ.बी.यु.दुपारे द्वारा किया गया।
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