नाबार्ड ने बिहार के सीवान में मछली पालन ढांचे के लिए 195 करोड़ रुपये का कर्ज मंजूर किया
01 अक्टूबर2026, सीवान: नाबार्ड ने बिहार के सीवान में मछली पालन ढांचे के लिए 195 करोड़ रुपये का कर्ज मंजूर किया – राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने बिहार के सीवान जिले में मछली पालन का बुनियादी ढांचा मजबूत करने के लिए 195 करोड़ रुपये का ऋण मंजूर किया है। यह मंजूरी केंद्र सरकार की मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (FIDF) योजना के तहत दी गई है।
इस राशि से जिले में मछली बीज उत्पादन केंद्र, हैचरी, कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण इकाइयां और आधुनिक मछली बाजार जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। योजना का मकसद मछली उत्पादन बढ़ाना और मछुआरों, सहकारी समितियों, स्वयं-सहायता समूहों व ग्रामीण युवाओं की आय में सुधार लाना है।
कैसे मिलेगा किसानों-मछुआरों को फायदा
नाबार्ड के बिहार मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह ने कहा कि यह परियोजना आधुनिक, सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाली और टिकाऊ मत्स्य पालन व्यवस्था विकसित करने में मदद करेगी। उनके मुताबिक सीवान में मछली पालन से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं की लंबे समय से कमी महसूस की जा रही थी।
FIDF योजना के तहत मिलने वाला यह कर्ज राज्य सरकार, सहकारी समितियों और निजी उद्यमियों को रियायती ब्याज दर पर दिया जाता है। सीवान जैसे जिलों में, जहां छोटी नदियां और तालाब बड़ी संख्या में मौजूद हैं, मछली पालन को व्यावसायिक रूप देने में यह ढांचा अहम भूमिका निभा सकता है।
बिहार में मत्स्य पालन विभाग पहले से ही तालाबों के जीर्णोद्धार, बीज उत्पादन और मछुआरों को प्रशिक्षण देने पर काम कर रहा है। सीवान को मिली यह निधि राज्य में मत्स्य क्षेत्र के बड़े निवेश का हिस्सा मानी जा रही है, हालांकि इस बारे में केंद्र या राज्य मत्स्य विभाग की औपचारिक प्रेस विज्ञप्ति सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं मिली।
सीवान जिले में सरयू और घाघरा नदी के मैदानी इलाके होने के कारण छोटी नदियां, चौर और तालाब बड़ी संख्या में मौजूद हैं, जो मछली पालन के लिए अनुकूल माने जाते हैं। इसके बावजूद अब तक जिले में मछली को बड़े पैमाने पर प्रसंस्करण और भंडारण करने की सुविधा सीमित रही है, जिससे किसानों को उपज का पूरा दाम नहीं मिल पाता था।
मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (FIDF) के तहत नाबार्ड और अन्य वित्तीय संस्थाएं राज्य सरकारों, सहकारी समितियों, स्वयं सहायता समूहों और निजी उद्यमियों को मत्स्य ढांचागत परियोजनाओं के लिए रियायती ब्याज दर पर कर्ज देती हैं। इसका मकसद तटीय और अंतर्देशीय, दोनों तरह के राज्यों में मछली पालन को आधुनिक और संगठित उद्योग का रूप देना है। सीवान की परियोजना में बनने वाली हैचरी और मछली बीज उत्पादन इकाई से जिले के साथ-साथ आसपास के जिलों के मछली पालकों को भी स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण बीज मिल सकेगा, जिससे बीज के परिवहन में लगने वाला समय और लागत दोनों घटेंगे।
प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंच आसान होगी
अभी तक बिहार के कई जिलों में मछली पालकों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर के बाजारों पर निर्भर रहना पड़ता है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण की सुविधा सीमित है। नई परियोजना से यह समस्या काफी हद तक दूर होने की उम्मीद जताई जा रही है।
मछली बीज उत्पादन केंद्र बनने से स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध होगा, जिससे किसानों को बीज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे उत्पादन लागत घटने और मछली की गुणवत्ता सुधरने की संभावना है।
बिहार जैसे राज्य में जहां लाखों परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मछली पालन से जुड़े हैं, वहां बुनियादी ढांचे में यह निवेश आय बढ़ाने का बड़ा जरिया बन सकता है। मछली चारा, दवा और उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए भी सीवान और आसपास के जिलों में नया बाजार खुल सकता है, जिससे कृषि-इनपुट कारोबार को भी फायदा मिलेगा।
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