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राज्य कृषि समाचार (State News)

मुरैना : फसल अवशेषों का वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाएं

22 अक्टूबर 2026, मुरैना: मुरैना : फसल अवशेषों का वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाएं – फसल कटाई के बाद खेतों में बनने वाले फसल अवशेषों (नरवाई) को जलाने के बजाय उनका वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर भूमि की उर्वरता बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। नरवाई जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है तथा मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों को नुकसान पहुंचता है। इसे ध्यान में रखते हुए किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, जिला मुरैना ने किसानों से नरवाई नहीं जलाने और आधुनिक कृषि यंत्रों एवं उन्नत तकनीकों के माध्यम से फसल अवशेषों का समुचित प्रबंधन करने की अपील की है।

कृषि विभाग ने बताया है कि नरवाई प्रबंधन के लिए सुपर सीडर, स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस), स्ट्रॉ रीपर, बेलर, जैविक अपघटक, मल्चर, श्रेडर, रोटावेटर तथा मल्चिंग जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है। सुपर सीडर की सहायता से फसल अवशेषों को खेत में मिलाते हुए सीधे गेहूं की बुवाई की जा सकती है। वहीं, स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई के दौरान फसल अवशेषों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में समान रूप से फैलाया जा सकता है। स्ट्रॉ रीपर से भूसा तैयार किया जा सकता है, जबकि बेलर की मदद से फसल अवशेषों की गठानें बनाकर उनका संग्रहण एवं उपयोग किया जा सकता है।

इसी प्रकार मल्चर, श्रेडर और रोटावेटर की सहायता से नरवाई को खेत में मिलाकर भूमि की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है। फसल अवशेषों के प्रभावी प्रबंधन के लिए जैविक अपघटक का उपयोग भी एक उपयोगी विकल्प है। इसके माध्यम से अवशेषों को विघटित कर जैविक पदार्थों में परिवर्तित करने में सहायता मिलती है। इसके अतिरिक्त, मल्चिंग तकनीक के तहत खेत की सतह पर फसल अवशेषों का उपयोग करने से मिट्टी की नमी बनाए रखने और खरपतवारों की वृद्धि नियंत्रित करने में मदद मिलती है। नरवाई का वैज्ञानिक प्रबंधन करने से मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है तथा भूमि की उर्वरता और मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है। इससे मिट्टी की नमी संरक्षित करने, वायु प्रदूषण कम करने और कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने में भी मदद मिलती है।

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फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन न केवल कृषि उत्पादन की निरंतरता बनाए रखने में सहायक है, बल्कि टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल खेती को भी प्रोत्साहित करता है। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उपयोग जैविक खाद बनाने तथा खेत की उर्वरता बढ़ाने में करें। नरवाई का वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर मिट्टी की सेहत सुरक्षित रखें, वायु प्रदूषण को कम करने में सहयोग दें और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

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