हरियाणा में धान खरीद साढ़े 15 लाख टन पार, किसानों को 1,221 करोड़ रुपये का भुगतान
22 अक्टूबर 2026, चंडीगढ़: हरियाणा में धान खरीद साढ़े 15 लाख टन पार, किसानों को 1,221 करोड़ रुपये का भुगतान – हरियाणा की मंडियों में चालू खरीफ विपणन सीजन में धान की सरकारी खरीद साढ़े 15 लाख मीट्रिक टन के पार पहुंच गई है। राज्य के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में बताया कि अब तक किसानों के बैंक खातों में न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत 1,221 करोड़ रुपये जमा किए जा चुके हैं।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की प्रधान सचिव अमनीत पी. कुमार के मुताबिक राज्य की मंडियों में अब तक कुल 21.27 लाख मीट्रिक टन धान पहुंच चुका है, जिसमें से 15.52 लाख मीट्रिक टन की सरकारी खरीद हो चुकी है। उन्होंने बताया, “प्रदेश में अब तक 15.52 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया है और 7.69 लाख मीट्रिक टन का उठान हो चुका है।”
58 लाख टन के लक्ष्य का अभी 27 प्रतिशत ही पूरा
केंद्र सरकार ने हरियाणा के लिए इस सीजन 58 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य तय किया है, जिसका अभी तक करीब 27 प्रतिशत हिस्सा ही पूरा हो सका है। राज्य में खरीद 29 सितंबर को 249 मंडियों में शुरू हुई थी और यह 15 नवंबर तक जारी रहेगी।
सामान्य धान के लिए 2,441 रुपये और ग्रेड-ए धान के लिए 2,461 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया गया है। अब तक 1 लाख 52 हजार 136 किसानों का बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा हो चुका है, जो भुगतान पाने के लिए ज़रूरी शर्त रखी गई है ताकि राशि सीधे वास्तविक किसानों तक ही पहुंचे।
कुरुक्षेत्र-पंचकूला में खरीद सबसे तेज़
जिलेवार आंकड़ों के मुताबिक कुरुक्षेत्र में मंडियों में पहुंचे धान का 92.4 प्रतिशत खरीदा जा चुका है, जबकि पंचकूला में यह आंकड़ा 93.7 प्रतिशत है। अंबाला में 89.3 प्रतिशत और कैथल में 90.9 प्रतिशत धान की खरीद हो चुकी है, वहीं करनाल में यह आंकड़ा अपेक्षाकृत कम 78.5 प्रतिशत है।
उठान के मामले में पंचकूला सबसे आगे है, जहां खरीदे गए धान का 57.1 प्रतिशत उठाया जा चुका है। राज्य स्तर पर औसत उठान दर 48.2 प्रतिशत है, जिसे लेकर अधिकारियों ने चावल मिलों को रफ्तार बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। राज्य में 1,433 चावल मिलें पंजीकृत हैं, जिनमें से 1,215 का भौतिक सत्यापन हो चुका है।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि बारिश और नमी से धान के स्टॉक को बचाने के लिए मंडियों में पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि किसानों को उपज बेचने में किसी तरह की परेशानी न हो। समीक्षा बैठक में अफसरों को यह निर्देश भी दिया गया कि खरीद और उठान के बीच के अंतर को जल्द से जल्द कम किया जाए।
राज्य में खरीद अभी अपने शुरुआती दौर में है और नवंबर के मध्य तक चलेगी, ऐसे में आने वाले हफ्तों में रोजाना की खरीद रफ्तार और तेज़ होने की उम्मीद जताई जा रही है। कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल, फतेहाबाद, अंबाला और यमुनानगर जैसे प्रमुख धान उत्पादक जिलों में सबसे ज्यादा आवक दर्ज हो रही है, जबकि सिरसा, जींद और पंचकूला में आवक अपेक्षाकृत कम है।
बायोमेट्रिक सत्यापन को अनिवार्य बनाए जाने से भुगतान में कुछ समय ज़रूर लगता है, लेकिन इससे फर्जी पंजीयन और बिचौलियों के जरिए होने वाली गड़बड़ियों पर रोक लगाने में मदद मिलती है। अधिकारियों का कहना है कि इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य की राशि सीधे असली किसान के खाते में ही पहुंचती है।
विभाग ने चावल मिलों से भी कहा है कि वे अपनी भौतिक सत्यापन प्रक्रिया जल्द पूरी करें, ताकि उठान का काम बिना रुकावट चल सके। मिलों की संख्या ज्यादा होने के बावजूद उठान की रफ्तार खरीद से पीछे चल रही है, जिसे लेकर प्रशासन ने अगले कुछ हफ्तों में सुधार का लक्ष्य रखा है।
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