मिजोरम की स्ट्रॉबेरी किसान लालरिथांगी को रोम में मिलेगा संयुक्त राष्ट्र का सम्मान
06 अक्टूबर 2026, आइजोल: मिजोरम की स्ट्रॉबेरी किसान लालरिथांगी को रोम में मिलेगा संयुक्त राष्ट्र का सम्मान – मिजोरम के लॉंगतलाई जिले के सांगाउ गांव की किसान जेड.टी. लालरिथांगी को स्ट्रॉबेरी की खेती में सफलता के लिए संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) का सम्मान मिलने जा रहा है। उन्हें यह सम्मान 12 से 16 अक्टूबर के बीच रोम में FAO के मुख्यालय में विश्व खाद्य फोरम के दौरान दिया जाएगा।
35 वर्षीय लालरिथांगी को “100 वीमेन हीरोज इन एग्रीफूड सिस्टम्स एंड रूरल डेवलपमेंट” सूची में शामिल किया गया है। उनका चुनाव 131 देशों के 600 से ज्यादा नामांकित लोगों में से हुआ है, और यह चुनाव अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 के तहत हुआ है। उन्हें इस सूची में शामिल होने की सूचना 21 सितंबर को दी गई।
मिजोरम जैसे पहाड़ी और दूरदराज राज्य से किसी किसान का इस तरह अंतरराष्ट्रीय सूची में चुना जाना दुर्लभ माना जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर इस क्षेत्र के छोटे किसानों की उपज स्थानीय बाजार तक ही सीमित रहती है।
एक हजार पौधों से शुरुआत
लालरिथांगी ने 2024 में महज एक हजार स्ट्रॉबेरी के पौधों के साथ खेती शुरू की थी, और पहले ही साल में उन्हें करीब 1.5 लाख रुपये की कमाई हुई। उनका खेत सांगाउ गांव से लगभग 5 किलोमीटर दूर है।
आज उनके पास लगभग दो हेक्टेयर जमीन पर 10 हजार से ज्यादा स्ट्रॉबेरी के पौधे हैं। साल 2025 में उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती से 10 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई की, यानी दो साल के भीतर ही उनकी आमदनी कई गुना बढ़ गई।
इतनी तेज वृद्धि की एक बड़ी वजह यह भी रही कि उन्होंने अपने खेत का आकार बढ़ाने के साथ-साथ पौधों की संख्या को भी दस गुना से ज्यादा कर दिया। पहाड़ी इलाके का ठंडा मौसम स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए अनुकूल माना जाता है, जिसका फायदा उन्हें मिला।
स्ट्रॉबेरी से वाइन भी बना रहीं
लालरिथांगी अपनी उपज का एक हिस्सा प्रोसेस करके वाइन भी तैयार करती हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी मिलती है। इसके अलावा वे अपने खेत में एवोकाडो, केला और कई तरह के फल-सब्जियां भी उगाती हैं।
इस तरह सिर्फ एक फसल पर निर्भर न रहकर उन्होंने अपनी आमदनी के कई स्रोत बना लिए हैं, जिससे किसी एक फसल में नुकसान होने पर भी उनकी पूरी आजीविका पर असर नहीं पड़ता।
मिजोरम में ज्यादातर खेती पहाड़ी ढलानों और छोटे-छोटे टुकड़ों में होती है, जहां बड़े स्तर पर मशीनीकरण आसान नहीं है। ऐसे में लालरिथांगी जैसे किसानों का मॉडल दिखाता है कि सीमित जमीन में भी सही फसल चुनकर अच्छी कमाई की जा सकती है।
स्ट्रॉबेरी जैसी फसल को बाजार तक पहुंचाने में पहाड़ी इलाकों से परिवहन एक बड़ी चुनौती होती है, इसलिए लालरिथांगी ने उपज के एक हिस्से को वाइन जैसे प्रसंस्कृत उत्पाद में बदलने का रास्ता चुना। इससे फल जल्दी खराब होने का डर कम हुआ और उन्हें बेहतर दाम भी मिला।
उनकी कहानी मिजोरम ही नहीं, पूरे पूर्वोत्तर भारत के लिए एक उदाहरण बन रही है, जहां जमीन कम होने के बावजूद किसान बागवानी और फल प्रसंस्करण के जरिए अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। एक साधारण किसान परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने की उनकी यात्रा आने वाले समय में क्षेत्र की और महिलाओं को भी खेती में नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित कर सकती है।
भारत से इस सम्मान के लिए दो महिलाओं को चुना गया है, जिनमें लालरिथांगी भी शामिल हैं। पूर्वोत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में छोटे किसानों के लिए स्ट्रॉबेरी जैसी नकदी फसलें आमदनी बढ़ाने का एक नया जरिया बन रही हैं, और इस तरह की अंतरराष्ट्रीय पहचान से इस मॉडल को और बढ़ावा मिल सकता है। रोम में होने वाले विश्व खाद्य फोरम में दुनिया भर के नीति-निर्माता और किसान संगठन भी शामिल होंगे, जहां खेती से जुड़ी महिलाओं के योगदान पर खास चर्चा होगी।
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