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राज्य कृषि समाचार (State News)

आरटीआई के दायरे में आता है मार्कफेड : हाई कोर्ट ने बरकरार रखा राज्य सूचना आयोग का आदेश

14 मई 2026, इंदौर (कृषक जगत): आरटीआई के दायरे में आता है मार्कफेड : हाई कोर्ट ने बरकरार रखा राज्य सूचना आयोग का आदेश – मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित (मार्कफेड) सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) 2005 के दायरे में आने वाला “सार्वजनिक प्राधिकरण” है। कोर्ट ने राज्य सूचना आयोग के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें मार्कफेड को आरटीआई के तहत जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे।

मामले में मार्कफेड ने तर्क दिया था कि वह एक सहकारी संस्था है और उस पर शासन का प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं है, इसलिए वह आरटीआई अधिनियम की धारा 2(एच) के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण की श्रेणी में नहीं आता। हालांकि हाई कोर्ट के जस्टिस विवेक रूसिया की एकलपीठ ने यह दलील अस्वीकार कर दी।

कोर्ट ने कहा कि मार्कफेड के प्रबंधन और संचालन में राज्य शासन की महत्वपूर्ण भूमिका है। संस्था को पर्याप्त सरकारी वित्तीय सहायता प्राप्त होती है तथा इसके प्रबंध निदेशक और वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियां भी सामान्यतः राज्य सरकार द्वारा की जाती हैं। ऐसे में यह संस्था शासन के नियंत्रण और वित्तीय सहयोग के अंतर्गत आती है।

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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि कोई भी संस्था यदि शासन के नियंत्रण में संचालित हो अथवा उसे पर्याप्त सरकारी वित्त पोषण मिलता हो, तो वह आरटीआई कानून के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण मानी जाएगी। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि मार्कफेड सार्वजनिक धन का उपयोग करते हुए सरकारी नीतियों को लागू करता है, इसलिए जनता को इसके कार्यों की जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है।

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उल्लेखनीय है कि प्रदेश में सहकारिता के माध्यम से खाद वितरण के लिए लागू 70:30 अनुपात व्यवस्था के कारण मार्कफेड एक अत्यंत महत्वपूर्ण संस्था है। इसके अलावा समर्थन मूल्य पर विभिन्न कृषि जिंसों के उपार्जन में भी मार्कफेड नोडल एजेंसी की भूमिका निभाता है। ऐसे में इस निर्णय से संस्था के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को जानकारी प्राप्त करने में बड़ी सुविधा मिलेगी।

इस निर्णय के बाद अब नागरिक मार्कफेड से खाद वितरण, खरीद प्रक्रिया, नियुक्तियों और अन्य प्रशासनिक कार्यों से संबंधित जानकारी मांग सकेंगे। जानकारी देने से इनकार करने की स्थिति में सूचना आयोग कार्रवाई भी कर सकेगा।

फैसला प्रदेश की अन्य सहकारी संस्थाओं के लिए भी मिसाल बनेगा, जो अब तक स्वयं को आरटीआई के दायरे से बाहर बताती रही हैं।

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