मॉडल मंडी एक्ट के विरोध में मंडी कर्मचारी

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04 सितंबर 2020, भोपाल। मॉडल मंडी एक्ट के विरोध में मंडी कर्मचारी मध्य प्रदेश की 550 से अधिक मंडियों व उपमंडियों, मंडी बोर्ड मुख्यालय, आंचलिक कार्यालयों तथा तकनीकी कार्यालयों के अधिकारी- कर्मचारियों ने भोपाल में मॉडल मंडी एक्ट के विरोध में धरना एवं प्रदर्शन किया। यह आंदोलन संयुक्त संघर्ष मोर्चा म.प्र. मंडी बोर्ड भोपाल के बैनर तले किया गया।

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मंडी कर्मचारियों की मांग

सरकार के मॉडल मंडी एक्ट या अध्यादेश का विरोध कर रहे हैं। उनकी मांग है कि शासन या मध्य प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड भोपाल हमारे वेतन, भत्ते, पेंशन तय करें। सरकार की नई व्यवस्था से मंडी कर्मचारियों और अधिकारियों को आर्थिक स्थिति से जूझना पड़ेगा। अभी उनका वेतन मंडियों की आय पर निर्भर करता है।
मंडी कानून में संशोधित 7 प्रावधान

  • निजी क्षेत्रों में मंडियों की स्थापना हेतु प्रावधान किया गया है।
  • गोदामों साइलो कोल्ड स्टोरेज आदि को भी प्राइवेट मंडी घोषित किया जा सकेगा।
  • किसानों से मंडी के बाहर ग्राम स्तर से फूड प्रोसेसर, निर्यातकों, होलसेल विक्रेता व अंतिम उपयोगकर्ताओं को सीधे खरीदने का प्रावधान किया गया है।
  • मंडी समितियों का निजी मंडियों के कार्य में कोई हस्तक्षेप नहीं रहेगा।
  • प्रबंध संचालक मंडी बोर्ड से रेगुलेटरी शक्तियों को पृथक कर संचालक विपणन को दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
  • पूरे प्रदेश में एक ही लाइसेंस से व्यापारियों को व्यापार करने का प्रावधान किया गया है।
  • ट्रेनिंग के लिए प्रावधान किया गया है।
    उल्लेखनीय होगा कि भारत सरकार द्वारा एग्रीकल्चर प्रोड्यूस एंड लाइवस्टोक मैनेजमेंट एक्ट 2017 (आईपीएलएम) मॉडल मंडी अधिनियम राज्यों को भेजा गया। इसे अपनाने अथवा प्रचलित अधिनियम में संशोधन का विकल्प दिया गया था। अधिनियम को लागू करने के लिए रोडमैप तैयार करने के उद्देश्य से गठित मुख्यमंत्रियों की उच्च स्तरीय समिति ने अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट में कहा था कि यदि राज्य अपने मौजूदा मंडी अधिनियम में संशोधन करना चाहते हैं तो उन्हें उसमें आईपीएलएम के प्रावधानों में से कम से कम 7 प्रावधानों को शामिल कर संशोधन करना होगा। मध्यप्रदेश में आईपीएलएम के प्रावधानों में से दो प्रावधान पहले से ही लागू हैं।
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