राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

प्राकृतिक खेती का सूरत मॉडल पूरे देश के लिए रोल मॉडल बनेगा; प्रधानमंत्री

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14 जुलाई 2022, नई दिल्ली: प्राकृतिक खेती का सूरत मॉडल पूरे देश के लिए रोल मॉडल बनेगा; प्रधानमंत्री – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने गत दिनों वीडियो कॉन्‍फ्रेंस के माध्‍यम से प्राकृतिक कृषि सम्‍‍मेलन को संबोधित किया। गुजरात के सूरत में आयोजित इस कॉन्क्लेव में हजारों किसानों और अन्य सभी हितधारकों ने भागीदारी की जिन्होंने सूरत में प्राकृतिक खेती को एक सफलता की कहानी के रूप में अपनाया है। सम्मेलन में गुजरात के राज्यपाल और मुख्यमंत्री भी शामिल हुए।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि कार्यक्रम इस बात का संकेत है कि कैसे गुजरात अमृत काल के लक्ष्यों को प्राप्त करने के देश के संकल्प का नेतृत्व कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा,हर पंचायत के 75 किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने में सूरत की सफलता पूरे देश के लिए एक मिसाल बनने जा रही है।” उन्होंने सरपंचों की भूमिका पर प्रकाश डाला और किसानों को खेती के प्राकृतिक तरीके की दिशा में आगे बढ़ने के लिए बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने कहा,कि स्थानीय निकायों ने प्रत्येक पंचायत से 75 किसानों को चुनने में ठोस भूमिका निभाई और प्रशिक्षण के साथ-साथ अन्य संसाधनों की उपलब्धता में उनकी मदद की।इससे 550 पंचायतों के 40 हजार से अधिक किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ गए हैं। यह एक अच्छी शुरुआत है और बहुत उत्साहजनक है। प्राकृतिक खेती का सूरत मॉडल पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल बन सकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरी दुनिया एक स्थायी जीवन-शैली के बारे में बात कर रही है।उन्होंने कहा,”यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां भारत ने सदियों से दुनिया का नेतृत्व किया है, इसलिए अब समय आ गया है कि हम प्राकृतिक खेती के रास्ते पर आगे बढ़ें और उभर रहे वैश्विक अवसरों का पूरा फायदा उठाएं।” श्री मोदी ने पारंपरिक खेती के लिए संसाधन और प्रशिक्षण प्रदान करने वाली ‘परंपरागत कृषि विकास योजना’ जैसी योजनाओं के रूप में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए गए उपायों के बारे में भी बताया।लाखों किसानों के लाभ के लिए योजना के तहत पूरे देश में 30 हजार क्लस्टर बनाए गए हैं। 10 लाख हेक्टेयर को ‘परंपरागत कृषि विकास योजना’ के तहत कवर किया जाएगा।प्रधानमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती को नमामि गंगे परियोजना से जोड़ा गया है क्योंकि गंगा नदी के किनारे प्राकृतिक कृषि गलियारा बनाने के लिए एक अलग अभियान चलाया गया है।

सूरत जिले ने प्राकृतिक खेती को अपनाने में किसानों की मदद करने के उद्देश्य से जिले में किसान समूहों, निर्वाचित प्रतिनिधियों, पंचायत सचिवों, कृषि उत्पाद विपणन समितियों (एपीएमसी), सहकारी समितियों, बैंकों आदि जैसे विभिन्न हितधारकों और संस्थानों को संवेदनशील तथा प्रेरित करने के लिए एक ठोस और समन्वित प्रयास किया। नतीजतन, प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम 75 किसानों की पहचान की गई और उन्हें प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रेरित तथा प्रशिक्षित किया गया।किसानों को 90 विभिन्न समूहों में प्रशिक्षित किया गया जिसके परिणामस्वरूप जिले भर के 41,000 से अधिक किसानों को प्रशिक्षण दिया गया।

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