प्रदेश के कई किसानों को नहीं मिली फसल बीमा दावा राशि

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कृषि अधिकारी और बैंकों के पास नहीं है, बीमा क्लेम पाने वाले किसानों की सूची, विपक्ष ने की विधानसभा में मुद्दा उठाने की तैयारी

  • (विशेष प्रतिनिधि)

28 फरवरी 2022, भोपाल ।  प्रदेश के कई किसानों को नहीं मिली फसल बीमा दावा राशि किसानों को प्राकृतिक आपदा या अन्य कारणों से हुए फसल नुकसान की भरपाई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से खरीफ एवं रबी दोनों सीजन में सरकार करती है। इसके लिए स्वैच्छिक तौर पर किसान बीमा करवाते हैं। वर्ष 2016 से यह योजना लागू की गई थी, तब से लेकर अब तक लगभग 16750 करोड़ रुपये का बीमा दावा लगभग 73 लाख 69 हजार 614 किसानों को मिला है। परन्तु यह सरकारी एवं कागजी आंकड़े हैं। वास्तव में कई किसानों के खातों में समय पर बीमा दावा पहुंचता ही नहीं। कभी बीमा कंपनियों की गलती तथा कभी बैंकों की गलती का खामियाजा किसान को प्रीमियम भरने के बाद भी भुगतना पड़ता है।

खाते में नहीं आया बीमा दावा

अभी हाल ही में प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बैतूल से प्रदेश के 49 लाख 85 हजार 24 किसानों को खरीफ 2020 और रबी 2020-21 का फसल बीमा 7 हजार 618 करोड़ रुपये सिंगल क्लिक से किसानों के खातों में डाले। लेकिन कई जगह राशि खातों में नहीं पहुंची है और कई जगह बहुत कम राशि मिली है। इसको लेकर राजगढ़, विदिशा, शाजापुर, खंडवा, देवास, रायसेन सहित अन्य जिलों से शिकायतें भी आई हैं। सहकारिता विभाग भी यह पता लगाने में जुटा है कि किस वजह से खातों में फसल बीमा की राशि नहीं पहुंची है। इसके लिए अपेक्स बैंक ने बीमा कंपनियों से किसानों की सूची मांगी है ताकि जो समस्या आ रही है, उसे दूर कराया जा सके। उधर, कांग्रेस ने विधानसभा के बजट सत्र में इस मुद्दे को उठाने की तैयारी कर ली है। खरीफ 2020 और रबी 2020-21 के फसल बीमा की राशि नहीं मिलने को लेकर किसानों में नाराजगी है। दरअसल, बैंक फसल बीमा को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं कर रहे है। बकाया ऋण की वसूली भी फसल बीमा से की जा रही है। जबकि, डिफाल्टर किसान के अलावा किसी किसान से बिना उसकी सहमति के बीमा राशि से ऋण का समायोजन नहीं किया जा सकता है। किसानों के खातों में बीमा राशि नहीं पहुंचने की शिकायत को लेकर सहकारिता विभाग ने बैंक और बीमा कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें पता चला कि कुछ बैंक शाखाओं द्वारा आईएफएससी कोड गलत डाल दिए गए तो कुछ बैंक खातों के नंबर में त्रुटि है।

जिलों का हाल

जानकारी के मुताबिक राजगढ़ जिला सहकारी बैंक की दो शाखओं की 22 साख सहकारी समितियों के 10 हजार 800 किसानों को लंबे समय बाद भी बीमा राशि नहीं मिल सकी है। जिसके कारण किसान हर दिन समितियों के चक्कर लगा रहे हैं।

देवास जिले के किसानों के खातों में 200 से 800 रुपये का मैसेज आया है किसानों का कहना है कि मैसेज क्लीयर नहीं है। अधिकारी कहते हैं कि लिस्ट नहीं आयी। रायसेन जिले के किसानों रामकृष्ण और प्रमोद का कहना है कि 15 दिन बीतने के बावजूद फसल बीमा नहीं मिला है। आश्चर्यजनक बात यह है कि इतने दिनों बाद भी कृषि अधिकारी और बैंकों के पास उन किसानों की सूची नहीं है जिन्हें बीमा क्लेम दिया गया है यही हाल कई जिलों का है वहां बीमित किसानों की सूची नदारत है।

इधर कांग्रेस विधायक श्री जीतू पटवारी ने बताया कि शाजापुर में किसानों को जितना नुकसान अतिवृष्टि से हुआ था, उसके अनुपात में फसल बीमा नहीं मिला है। सरकार का नियम है कि पचास प्रतिशत से अधिक नुकसान होने पर उसे शत्-प्रतिशत माना जाता है। इसके बाद भी बीमा कम मिल रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों को यह तक नहीं बताया जा रहा है कि उन्हें फसल बीमा की कितनी राशि मिली है। कई किसानों को एक हजार रुपये से कम बीमा मिलने की सूचना मिल रही है। उन्होंने संसद में प्रस्तुत की गई कृषि मंत्रालय की स्थायी समिति की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि किसानों ने जितना प्रीमियत जमा किया, उससे कम बीमा मिला है।

1000 से कम नहीं मिलेगी दावा राशि

इधर कम बीमा दावे को लेकर किसानों की नाराजगी एवं हंगामा होने के बाद मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने फैसला किया है कि एक हजार रुपये से कम बीमा दावा किसी भी किसान को नहीं मिलेगा। यदि बीमा दावा कम बना है तो अंतर की राशि सरकार भरकर किसानों को एक हजार देगी। इस नई पहल की जानकारी किसानों को एसएमएस भेजकर दी जाएगी। कृषि विभाग के उच्च अधिकारी का कहना है कि बीमा कंपनियों से उन किसानों की सूची मांगी गई है जिनका बीमा दावा एक हजार रुपये से कम बना है। एक आकलन के मुताबिक सरकार को लगभग 28 करोड़ रुपये की अंतर राशि देनी होगी

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