राज्य कृषि समाचार (State News)

यूपी के गन्ना किसानों के लिए बड़ी पहल: कम समय में अधिक उपज देने वाली नई किस्मों के विकास पर जोर

18 जुलाई 2026, लखनऊ: यूपी के गन्ना किसानों के लिए बड़ी पहल: कम समय में अधिक उपज देने वाली नई किस्मों के विकास पर जोर – उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले गन्ना किसानों के लिए राहत और उम्मीद की खबर है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के 98वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर उत्तर प्रदेश के गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी और राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय सिंह गंगवार ने गन्ना खेती को अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में नई रणनीति प्रस्तुत की।

कार्यक्रम में गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान को प्राथमिकता देने पर बल दिया गया। इसके तहत कृषि वैज्ञानिकों को ऐसी नई गन्ना किस्में विकसित करने का लक्ष्य दिया गया है, जो कम अवधि में अधिक उत्पादन, बेहतर चीनी रिकवरी तथा रोगों और जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक सहनशील हों।

मंत्रियों ने कहा कि बदलती कृषि परिस्थितियों को देखते हुए किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर आधुनिक तकनीकों, उन्नत बीज, जल संरक्षण और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों से जोड़ना आवश्यक है। नई गन्ना किस्मों के विकास से किसानों की उत्पादन लागत कम होगी, फसल जल्दी तैयार होगी और उनकी आय में वृद्धि होगी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गन्ना किसानों की आय बढ़ाने के लिए अनुसंधान संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और चीनी उद्योग के साथ मिलकर काम कर रही है। आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री और वैज्ञानिक सलाह के माध्यम से उत्तर प्रदेश को गन्ना उत्पादन के क्षेत्र में और अधिक मजबूत बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कम अवधि में तैयार होने वाली उच्च उत्पादक किस्में किसानों को समय पर अगली फसल लेने का अवसर देंगी, जिससे खेती की लाभप्रदता और संसाधनों के बेहतर उपयोग में भी मदद मिलेगी। यह पहल उत्तर प्रदेश के लाखों गन्ना किसानों के लिए दीर्घकालिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकती है।

6 महीने में तैयार होने वाली गन्ना किस्म विकसित करने की मांग

कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने गन्ना खेती की घटती लाभप्रदता पर चिंता व्यक्त करते हुए देश के कृषि वैज्ञानिकों से विशेष अनुसंधान करने का आग्रह किया। उन्होंने वैज्ञानिकों के सामने 4 प्रमुख चुनौतियां और लक्ष्य रखे:

6-महीने वाली किस्में: गन्ने की ऐसी उन्नत किस्में तैयार की जाएं जो पारंपरिक समय के बजाय मात्र 6 महीने में पककर तैयार हो सकें।
क्लाइमेट स्मार्ट (Climate-Smart) किस्में: ग्लोबल वार्मिंग और तेजी से बदलते मौसम को सहन करने वाली प्रजातियों का विकास हो।
कम पानी में बंपर पैदावार: गिरते भूजल स्तर को देखते हुए उच्च जल उपयोग दक्षता (High Water-Use Efficiency) वाली किस्में बनाई जाएं।
कीट और रोग प्रतिरोधी: रेड रॉट (लाल सड़न) जैसी गंभीर बीमारियों और कीटों के प्रति टिकाऊ प्रतिरोधी क्षमता वाली किस्में खोजी जाएं।
नैनो यूरिया और जैविक खाद पर जोर: कैबिनेट मंत्री ने रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से दूषित हो रहे भूजल और मानव स्वास्थ्य पर चिंता जताई। उन्होंने किसानों से कंपोस्ट और जैविक खादों के अधिक उपयोग की अपील करते हुए नैनो यूरिया जैसी आधुनिक तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर बल दिया।

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