राजस्थान में कृषि क्षेत्र की बड़ी पहल, 32 संगठनों के साथ हुए MoU; प्राकृतिक खेती और AI को मिलेगा बढ़ावा
11 जुलाई 2026, जयपुर: राजस्थान में कृषि क्षेत्र की बड़ी पहल, 32 संगठनों के साथ हुए MoU; प्राकृतिक खेती और AI को मिलेगा बढ़ावा – राजस्थान में कृषि क्षेत्र को आधुनिक, टिकाऊ और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। कृषि विभाग ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल मार्केटिंग (NIAM), 10 अग्रणी एग्रीटेक स्टार्टअप्स और 20 प्रतिष्ठित सिविल सोसाइटी संगठनों (CSOs) सहित कुल 32 संगठनों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, कृषि नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीकों के उपयोग और किसानों की आय में सतत वृद्धि को बढ़ावा देना है। राज्य सरकार का लक्ष्य राजस्थान को प्राकृतिक और ऑर्गेनिक खेती का प्रमुख केंद्र बनाना है।
सरकार, स्टार्टअप्स और संस्थानों की साझा पहल
पंत कृषि भवन, जयपुर में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रमुख शासन सचिव (कृषि एवं उद्यानिकी) मंजू राजपाल ने की। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियों का समाधान केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए सरकार, अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप्स, सिविल सोसाइटी संगठनों और किसानों के बीच मजबूत साझेदारी जरूरी है। यही सोच इस ऐतिहासिक पहल का आधार बनी है।
AI और स्टार्टअप्स से किसानों को मिलेगा लाभ
कार्यक्रम में बताया गया कि NIAM प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के तहत हर वर्ष 25 स्टार्टअप्स को 25 लाख रुपये तक, 25 अन्य स्टार्टअप्स को 5 लाख रुपये तक और चार विद्यार्थियों को 4 लाख रुपये प्रति विद्यार्थी स्टार्टअप शुरू करने के लिए अनुदान देता है।
वहीं, मणिपाल यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित AI आधारित तकनीकों का उपयोग कृषि कार्यों में किया जाएगा। इससे खेती में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ेगा, कृषि उत्पादकता में सुधार होगा और किसानों को स्मार्ट कृषि समाधान उपलब्ध होंगे।
प्राकृतिक और जैविक खेती पर विशेष जोर
कृषि विभाग ने प्रदेशभर के 100 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कोटा स्थित प्रशिक्षण केंद्र में गो-आधारित प्राकृतिक और ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए मंथन किया। सरकार का उद्देश्य किसानों को टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल खेती के लिए प्रेरित करना है।
87 लाख से अधिक किसानों की बनी फार्मर आईडी
आयुक्त कृषि नरेश कुमार गोयल ने बताया कि प्रदेश में 87 लाख से अधिक किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है। राजसमंद और सिरोही जिलों में फर्टिलाइजर सेल्स एप्लीकेशन सिस्टम का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से किसानों को फार्मर आईडी के आधार पर अनुदानित उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि किसानों को एक ही मंच पर विभागीय योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के लिए राज किसान साथी ऐप पर 150 से अधिक मॉड्यूल विकसित किए गए हैं।
प्राकृतिक खेती से लेकर कार्बन क्रेडिट तक मिलेगा सहयोग
इन साझेदारियों के तहत प्राकृतिक एवं जैविक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, जल संरक्षण, सामुदायिक संसाधन प्रबंधन, कृषि प्रशिक्षण, कृषि नीति निर्माण, कृषि-2047 रोडमैप, कार्बन क्रेडिट, मूल्य संवर्धन, प्रमाणन, विपणन, महिला किसान सशक्तिकरण और जनजातीय क्षेत्रों में कृषि विकास जैसे विषयों पर संयुक्त रूप से काम किया जाएगा।
एग्रीटेक स्टार्टअप्स किसानों तक डिजिटल तकनीक और आधुनिक कृषि समाधान पहुंचाएंगे, जबकि सिविल सोसाइटी संगठन गांव-गांव में प्रशिक्षण, जागरूकता और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएंगे।
लाखों किसानों को होगा सीधा फायदा
राज्य सरकार के अनुसार, इस पहल से किसानों को प्राकृतिक और जलवायु अनुकूल खेती की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण मिलेगा। खेती की लागत कम होगी, उत्पादन बढ़ेगा और मिट्टी तथा जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही जैविक खेती अपनाने वाले किसानों को तकनीकी सहायता, प्रमाणन, मूल्य संवर्धन और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
इस पहल का सबसे अधिक लाभ छोटे और सीमांत किसानों, महिला किसानों, युवा किसानों तथा जनजातीय क्षेत्रों के किसानों को मिलने की उम्मीद है।
विजन-2047 को मिलेगा बल
कृषि विभाग का कहना है कि यह पहल विकसित राजस्थान-2047 के कृषि विजन को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके तहत कृषि नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एग्री इनोवेशन एंड स्टार्टअप सेल की स्थापना की जाएगी। इस सेल के अंतर्गत एग्रीटेक स्टार्टअप्स के लिए समर्पित कॉल सेंटर भी बनाया जाएगा, जो तकनीकी मार्गदर्शन, समस्या समाधान और विभिन्न संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित करने का कार्य करेगा।
राजस्थान में कृषि क्षेत्र को आधुनिक, टिकाऊ और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। कृषि विभाग ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल मार्केटिंग (NIAM), 10 अग्रणी एग्रीटेक स्टार्टअप्स और 20 प्रतिष्ठित सिविल सोसाइटी संगठनों (CSOs) सहित कुल 32 संगठनों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, कृषि नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीकों के उपयोग और किसानों की आय में सतत वृद्धि को बढ़ावा देना है। राज्य सरकार का लक्ष्य राजस्थान को प्राकृतिक और ऑर्गेनिक खेती का प्रमुख केंद्र बनाना है।
सरकार, स्टार्टअप्स और संस्थानों की साझा पहल
पंत कृषि भवन, जयपुर में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रमुख शासन सचिव (कृषि एवं उद्यानिकी) मंजू राजपाल ने की। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियों का समाधान केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए सरकार, अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप्स, सिविल सोसाइटी संगठनों और किसानों के बीच मजबूत साझेदारी जरूरी है। यही सोच इस ऐतिहासिक पहल का आधार बनी है।
AI और स्टार्टअप्स से किसानों को मिलेगा लाभ
कार्यक्रम में बताया गया कि NIAM प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के तहत हर वर्ष 25 स्टार्टअप्स को 25 लाख रुपये तक, 25 अन्य स्टार्टअप्स को 5 लाख रुपये तक और चार विद्यार्थियों को 4 लाख रुपये प्रति विद्यार्थी स्टार्टअप शुरू करने के लिए अनुदान देता है।
वहीं, मणिपाल यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित AI आधारित तकनीकों का उपयोग कृषि कार्यों में किया जाएगा। इससे खेती में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ेगा, कृषि उत्पादकता में सुधार होगा और किसानों को स्मार्ट कृषि समाधान उपलब्ध होंगे।
प्राकृतिक और जैविक खेती पर विशेष जोर
कृषि विभाग ने प्रदेशभर के 100 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कोटा स्थित प्रशिक्षण केंद्र में गो-आधारित प्राकृतिक और ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए मंथन किया। सरकार का उद्देश्य किसानों को टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल खेती के लिए प्रेरित करना है।
87 लाख से अधिक किसानों की बनी फार्मर आईडी
आयुक्त कृषि नरेश कुमार गोयल ने बताया कि प्रदेश में 87 लाख से अधिक किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है। राजसमंद और सिरोही जिलों में फर्टिलाइजर सेल्स एप्लीकेशन सिस्टम का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से किसानों को फार्मर आईडी के आधार पर अनुदानित उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि किसानों को एक ही मंच पर विभागीय योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के लिए राज किसान साथी ऐप पर 150 से अधिक मॉड्यूल विकसित किए गए हैं।
प्राकृतिक खेती से लेकर कार्बन क्रेडिट तक मिलेगा सहयोग
इन साझेदारियों के तहत प्राकृतिक एवं जैविक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, जल संरक्षण, सामुदायिक संसाधन प्रबंधन, कृषि प्रशिक्षण, कृषि नीति निर्माण, कृषि-2047 रोडमैप, कार्बन क्रेडिट, मूल्य संवर्धन, प्रमाणन, विपणन, महिला किसान सशक्तिकरण और जनजातीय क्षेत्रों में कृषि विकास जैसे विषयों पर संयुक्त रूप से काम किया जाएगा।
एग्रीटेक स्टार्टअप्स किसानों तक डिजिटल तकनीक और आधुनिक कृषि समाधान पहुंचाएंगे, जबकि सिविल सोसाइटी संगठन गांव-गांव में प्रशिक्षण, जागरूकता और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएंगे।
लाखों किसानों को होगा सीधा फायदा
राज्य सरकार के अनुसार, इस पहल से किसानों को प्राकृतिक और जलवायु अनुकूल खेती की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण मिलेगा। खेती की लागत कम होगी, उत्पादन बढ़ेगा और मिट्टी तथा जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही जैविक खेती अपनाने वाले किसानों को तकनीकी सहायता, प्रमाणन, मूल्य संवर्धन और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
इस पहल का सबसे अधिक लाभ छोटे और सीमांत किसानों, महिला किसानों, युवा किसानों तथा जनजातीय क्षेत्रों के किसानों को मिलने की उम्मीद है।
विजन-2047 को मिलेगा बल
कृषि विभाग का कहना है कि यह पहल विकसित राजस्थान-2047 के कृषि विजन को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके तहत कृषि नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एग्री इनोवेशन एंड स्टार्टअप सेल की स्थापना की जाएगी। इस सेल के अंतर्गत एग्रीटेक स्टार्टअप्स के लिए समर्पित कॉल सेंटर भी बनाया जाएगा, जो तकनीकी मार्गदर्शन, समस्या समाधान और विभिन्न संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित करने का कार्य करेगा।
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