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राज्य कृषि समाचार (State News)

मक्का ने दिलाई मुस्कान

इंदौर। कहते हैं धारा के विपरीत बहने के लिए साहस की जरूरत होती है। ऐसा ही साहस ग्राम छोटा नागदा तहसील बदनावर जिला धार के 28 वर्षीय स्नातक कृषक  श्री कृष्णा सांखला ने दिखाया। उन्होंने इस साल खरीफ में परम्परागत सोयाबीन के बजाय बड़े रकबे में मक्का की फसल लगाई। उनके द्वारा उठाई गई इस जोखिम का नतीजा सकारात्मक रहा। इस साल अति वर्षा से जहां सोयाबीन की फसल बर्बाद हो गई, वहीं 350  बीघा में लगाई मक्का की फसल लहलहा रही है.जिसने उनके चेहरे पर मुस्कान ला दी है।

इस संबंध में श्री कृष्णा सांखला ने कृषक जगत को बताया कि उनकी खुद की 50 बीघा जमीन के अलावा 300  बीघा लीज पर भी ली है। 25 बीघे में सोयाबीन लगाई थी जो पूरी तरह खराब हो गई। लेकिन संकर किस्म वाली मक्का की फसल शानदार है। गत वर्ष 90 बीघा में लगाई मक्का का उत्पादन 17 क्विंटल प्रति बीघा मिलने से उत्साह बढ़ा और इस साल मक्का का रकबा बढ़ाया। उन्होंने गांव के अन्य किसानों के साथ खरीफ बोवनी के पूर्व बैठक कर सोयाबीन के बजाय मक्का बोने की सलाह दी थी। जिन परिचितों ने उनकी सलाह पर प्रयोग के तौर पर  5 -10 बीघा में मक्का लगाई थी, वह फायदे में रहे। उनकी मक्का की फसल बेहतर है। ऐसे किसानों का रकबा 200  बीघा तक पहुँच गया। हालांकि मक्का फसल पर फॉल आर्मी वर्म का खतरा मंडराया था, जिसे समय रहते नियंत्रित कर लिया था। श्री सांखला को उम्मीद है कि इस वर्ष 15 क्विंटल प्रति बीघा का उत्पादन मिल जाएगा।

श्री कृष्णा ने उद्यानिकी फसल के तहत 16 बीघा में ताइवान पिंक जाम भी लगाया है, जिसके एक फल का वजन करीब एक किलो रहता है। 15 माह में उत्पादन शुरू हो जाता है। 

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इनके खेत का तीन बार निरीक्षण तत्कालीन कलेक्टर कर चुके हैं। गत माह ही केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री सचिन सिन्हा ने भी इनकी मक्का फसल का अवलोकन कर प्रशंसा की थी। श्री सांखला को कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए जनवरी 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में जिले के  प्रथम किसान के रूप में सम्मानित कर  25  हजार रुपए का  नकद पुरस्कार दिया था। श्री कृष्णा ने उद्यानिकी फसल के तहत पीली और लाल शिमला मिर्च का बेहतर उत्पादन किया था। श्री सांखला का किसानों को यही संदेश है कि परम्परागत खेती के बजाय नए प्रयोगों के साथ खेती करें, ताकि लाभ का प्रतिशत बढ़ सके।

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