राज्य कृषि समाचार (State News)

भोपाल में बनेगी प्रदेश की पहली अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला, आम उपभोक्ता भी करा सकेंगे दूध की जांच  

29 जनवरी 2026, भोपाल: भोपाल में बनेगी प्रदेश की पहली अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला, आम उपभोक्ता भी करा सकेंगे दूध की जांच – मध्यप्रदेश में दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। प्रदेश में पहली सहकारी क्षेत्र की अत्याधुनिक केन्द्रीय राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला भोपाल में स्थापित की जा रही है, जिसका अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। यह प्रयोगशाला केंद्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग की नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट (NPDD) परियोजना के अंतर्गत स्वीकृत की गई है।

यह प्रयोगशाला मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन, भोपाल परिसर में स्थापित की जा रही है और सहकारिता क्षेत्र की यह प्रदेश की पहली राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण लैब होगी।

आम उपभोक्ता भी करा सकेंगे दूध और दुग्ध उत्पादों की जांच

इस अत्याधुनिक प्रयोगशाला की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यहां आम उपभोक्ता भी अपने घर में उपयोग होने वाले दूध और दुग्ध उत्पादों की जांच करा सकेंगे। यदि दूध, दही, पनीर, घी या अन्य दुग्ध उत्पादों में मिलावट की आशंका होगी, तो अब उपभोक्ताओं को इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा।

इसके साथ ही देश और प्रदेश की खाद्य उत्पादक संस्थाएं, डेयरी यूनिट्स और सहकारी संस्थाएं भी यहां अपने उत्पादों का परीक्षण करा सकेंगी।

उपभोक्ताओं को मिलेगा शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण दूध
परियोजना का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाला, सुरक्षित और शुद्ध दूध एवं दुग्ध उत्पाद उचित मूल्य पर उपलब्ध कराना है। साथ ही खाद्य सुरक्षा मानकों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना भी इसका अहम लक्ष्य है। प्रदेश में अब तक दूध और दुग्ध उत्पादों की वैज्ञानिक जांच एक बड़ी चुनौती रही है, जिसे देखते हुए इस आधुनिक प्रयोगशाला की स्थापना की जा रही है।

NABL और FSSAI से मान्यता प्राप्त होगी प्रयोगशाला

यह राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला केंद्र सरकार के मार्गदर्शन और वित्तीय सहयोग से स्थापित की जा रही है। इसे NABL (नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज), FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) से मान्यता प्राप्त होगी, जिससे यहां की गई जांच रिपोर्ट कानूनी और वैज्ञानिक रूप से मान्य होंगी।

12.40 करोड़ रुपये की लागत, अत्याधुनिक मशीनें होंगी स्थापित

प्रयोगशाला के निर्माण और उपकरणों की व्यवस्था के लिए भारत सरकार द्वारा 12 करोड़ 40 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है। परियोजना के अंतर्गत अत्याधुनिक सात मशीनों की खरीदी पूरी हो चुकी है, जबकि शेष मशीनों, केमिकल्स और ग्लासवेयर की खरीदी प्रक्रिया जारी है। सभी व्यवस्थाएं पूर्ण होते ही जल्द ही दूध एवं दुग्ध उत्पादों के परीक्षण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

100 से अधिक मानकों पर होगी दूध की जांच

इस राज्य स्तरीय केन्द्रीय प्रयोगशाला में दूध और दुग्ध पदार्थों की 100 से अधिक मानकों पर जांच की जाएगी। इनमें प्रमुख रूप से पेस्टिसाइड्स, एंटीबायोटिक्स, हेवी मेटल्स, अफ्लाटॉक्सिन, वसा की शुद्धता, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा, यूरिया, आयोडीन, माल्टोज, शुगर, नमक और अन्य सभी प्रकार की मिलावट की वैज्ञानिक जांच शामिल होगी।

उपभोक्ता स्वास्थ्य और डेयरी सेक्टर को मिलेगा सीधा लाभ
इस प्रयोगशाला के शुरू होने से प्रदेश में दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता में बड़ा सुधार आएगा। मिलावट पर प्रभावी नियंत्रण होगा, उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ेगी और इसका सीधा सकारात्मक असर आम जनता के स्वास्थ्य पर पड़ेगा। साथ ही प्रदेश का डेयरी सेक्टर और सहकारी संस्थाएं भी गुणवत्ता के नए मानक स्थापित कर सकेंगी।

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