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राज्य कृषि समाचार (State News)

मध्यप्रदेश: चिया की खेती ने बदली जगपति सिंह की किस्मत, मात्र 2 हजार रुपये की लागत में कमाए 40 हजार

08 मई 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश: चिया की खेती ने बदली जगपति सिंह की किस्मत, मात्र 2 हजार रुपये की लागत में कमाए 40 हजार – परंपरागत खेती में बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के बीच कटनी जिले के ढीमरखेड़ा विकासखंड के एक छोटे से गांव दियागढ़ के किसान जगपति सिंह ने मानव जीवन विकास समिति के मार्गदर्शन में ‘चिया सीड्स’ की खेती कर कम लागत में बंपर मुनाफा अर्जित किया है। पिछले माह कलेक्‍टर श्री आशीष तिवारी ने खुद कृषक जगपति सिंह के खेत में पहुंचकर चिया की खेती के लिए किसान का उत्‍साहवर्धन किया था।

मुलाकात से हुई शुरुआत

दियागढ़ गांव में एक बैठक के दौरान जगपति सिंह की पत्‍नी दुर्गा बाई की मुलाकात मानव जीवन विकास समिति की कार्यकर्ता अदिति वैष्णव से हुई। अदिति ने उन्हें चिया की खेती के फायदों और इसमें होने वाली कम लागत के बारे में बताया। दुर्गा बाई ने यह जानकारी अपने पति जगपति सिंह को दी, जिसके बाद उन्होंने प्रयोग के तौर पर अपने 25 डेसिमल खेत में चिया बोने का निर्णय लिया।

लागत सिर्फ 5 से 10 प्रतिशत

जगपति ने मात्र 200 से 250 ग्राम बीज में 25 डेसिमल की बुवाई की। पूरी फसल के दौरान उन्‍होंने न तो रासायनिक खाद और न ही महंगे पेस्टिसाइड का इस्‍तेमाल किया। केवल दो बार जुताई और 3 से 4 बार सिंचाई में फसल तैयार हो गई। इस प्रकार खेती की कुल लागत मात्र 1500 से 2000 रुपये के बीच आई।

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 कम लागत में हुआ बंपर मुनाफा

जगपति सिंह कहते हैं कि परंपरागत फसलों में जहाँ लागत का मात्र 25-30 प्रतिशत ही मुनाफा मिल पाता है, वहीं चिया की खेती ने बंपर मुनाफा दिया। चिया की खेती में कुल 2 क्विंटल 9 किलो फसल की पैदावार हुई। चिया का बाजार मूल्य लगभग 19 हजार से 20 हजार रुपये प्रति क्विंटल है। इस प्रकार जगपति को 38 से 40 हजार रूपये की कुल आय हुई और लागत घटाकर लगभग 36 हजार रुपये से ज्यादा का शुद्ध मुनाफा मिला।

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बनी रहती है मिट्टी की सेहत

मानव जीवन विकास समिति के सचिव एवं पर्यावरणविद निर्भय सिंह ने बताया कि जिले में जैविक खेती और स्थाई आजीविका को बढ़ावा दिया जा रहा है। चिया जैसी फसलें न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बनाती हैं, बल्कि रासायनिक खादों से दूर रहने के कारण जमीन की उर्वरक क्षमता (फर्टिलिटी) भी बनी रहती है। जगपति सिंह की इस सफलता को देखते हुए अब कटनी जिले के अन्य किसान भी चिया की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। फसल चक्र परिवर्तन का यह मॉडल किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रहा है।

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