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राज्य कृषि समाचार (State News)

मध्यप्रदेश: शीतलहर और पाले से बचाव के लिए किसानों को कृषि विभाग की सलाह

07 जनवरी 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश: शीतलहर और पाले से बचाव के लिए किसानों को कृषि विभाग की सलाह – शीत लहर व अत्यधिक ठंड के दौरान रबी फसलों को पाले से बचाने के लिये कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा किसान भाईयों को सामयिक सलाह दी गई है। थोड़े से प्रयास से कृषकगण पाले से फसलों की सुरक्षा कर सकते हैं। उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास श्री रणवीर सिंह जाटव ने बताया कि पाले से बचाव के लिए रात्रि में खेत की मेड़ों पर लगभग 6 से 8 स्थानो पर कचरा तथा खरपतवार आदि जलाकर धुंआ करना चाहिए।

यह प्रयोग इस प्रकार किया जाना चाहिए कि धुआं सारे खेत में छा जाए तथा खेत के आसपास का तापमान 5 डिग्री सेल्सियस तक आ जाए। इस प्रकार धुआं करने से फसल का पाले से बचाव किया जा सकता है। पाले की संभावना होने पर खेत की हल्की सिंचाई कर देना चाहिए। इससे मिट्टी का तापमान बढ़ जाता है तथा नुकसान की मात्रा कम हो जाती है। सिंचाई बहुत ज्यादा न कर उतनी ही करनी चाहिए, जिससे खेत गीला हो जाए। रस्सी का उपयोग भी पाले से काफी सुरक्षा प्रदान करता है। इसके लिए दो व्यक्ति सुबह-सुबह (जितनी जल्दी हो सके) एक लंबी रस्सी को उसके दोनों सिरों से पकड़ कर खेत के एक कोने से लेकर दूसरे कोने तक फसल को हिलाते चलना है।

इससे फसल पर रात का जमा पानी गिर जाता है तथा फसल की पाले से सुरक्षा हो जाती है। इन दवाओं के छिड़काव से भी होती है पाले से सुरक्षा रबी फसल पर 8 से 10 कि.ग्रा. सल्फर डस्ट प्रति एकड का भुरकाव पाले से बचाव में लाभप्रद रहता है। इसके अलावा वेटेबल या घुलनशील सल्फर 200 ग्राम या ग्लूकोस पाउडर 500 ग्राम बनाकर अथवा प्रति थायो यूरिया 500 ग्राम या पोटेशियम सल्फेट (0:0:50) 200 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी में घोल छिड़काव किया जा सकता है। 

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साइकोसिल 400 ग्राम प्रति एकड़ 200 लीटर पानी -में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव भी कारगर रहता है। मावठ बारिश होने पर यह सावधानियां बरतें जिले में कभी कभी कही कही पर मावठा अर्थात वर्षा होने की भी सम्भावना भी इस मौसम में रहती है। बारिश से चना फसल में फूल गिरने की समस्या हो सकती है। इससे बचाव के लिये नेफथाइल एसीटिक एसिड (एनएए) की 4.5 मिली लीटर प्रति पंप छिंडकाव करने से इस समस्या से बचा जा सकता है। किसान भाइयों को इस मौसम में फसलों में कीट व्याधि नियंत्रण का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। पाले की संभावना रात 12 बजे से 4 बजे के बीच अधिक रहती है उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास श्री रणवीर सिंह जाटव ने बताया कि शीतलहर का अत्यधिक असर दलहनी-तिलहनी, मटर व आलू की फसलों पर पड़ता है। शीतलहर के कारण पौधे की पत्तियां व फूल झुलसते, बाद में झड़ जाते हैं।

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रात के समय तापमान 4-5 डिग्री या इससे कम होता है तब धरातल के आसपास व फसलों-पौधों की पत्तियों पर बर्फ की पतली परत जम जाती है। इसी परत को पाला कहते हैं। पौधों की पत्तियों पर पाले का प्रकोप रात 12 से सुबह 4 बजे के बीच अधिकांश होता है। पाले से प्रभावित फसल व पौधों की पत्तियों पर पानी की बूंद जमा हो जाती है, पत्तियों की कोशिका भित्ती फट जाती है, जिससे पत्तियां सूखकर झड़ने लगती है। अधिक जानकारी के लिये यहां करें संपर्क अधिक जानकारी के लिए किसान भाई अपने क्षेत्र के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी व ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। साथ ही ग्वालियर में मेला रोड पर स्थित उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के कार्यालय एवं मेला रोड पर ही स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र में संपर्क किया जा सकता है। 

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