भारत की अर्थ-व्यवस्था बनाने में म.प्र. देगा 550 बिलियन डॉलर का योगदान

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मुख्यमंत्री श्री चौहान नीति आयोग की बैठक में शामिल हुए

8 अगस्त 2022, भोपाल: भारत की अर्थ-व्यवस्था बनाने में म.प्र. देगा 550 बिलियन डॉलर का योगदान – मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थ-व्यवस्था बनाने के लिए मध्यप्रदेश द्वारा 550 बिलियन डॉलर का योगदान दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश 21वीं सदी के आत्म-निर्भर भारत के प्रधानमंत्री श्री मोदी के व्यापक विजन को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक भारत-श्रेष्ठ भारत के निर्माण में नीति आयोग की बड़ी भूमिका है। नीति आयोग किस तरह राज्यों की ताकत बनता है, मध्यप्रदेश उसका ज्वलंत उदाहरण है। मुख्यमंत्री श्री चौहान  राष्ट्रपति भवन में नीति आयोग की शासी परिषद की 7वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने की।

तेजी से आगे बढ़ता मध्यप्रदेश

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि प्रदेश में वर्ष 2020 में ही आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश का रोडमेप विकसित कर लिया गया था। मध्यप्रदेश ने वर्ष 2021-22 में 19.74 प्रतिशत की विकास दर हासिल की है। प्रदेश सकल घरेलू उत्पाद का 4 प्रतिशत पूँजीगत व्यय कर रहा है और वित्त वर्ष 2022-23 के लिए पूँजीगत व्यय हेतु 48 हजार 800 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है, जो अब तक का सर्वाधिक है।

कृषि विविधीकरण और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के फसल विविधीकरण दृष्टिकोण से प्रेरणा लेते हुए प्रदेश में सरसों और ग्रीष्मकालीन मूंग के रकबे में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में गेहूँ और धान के स्थान पर कृषि विविधीकरण प्रोत्साहन योजना के माध्यम से दाल, रागी, जौ, मोटे अनाज, कोदो-कुटकी, रामतिल, तिल, मसाले, औषधीय फसलें, फलों और सब्जियों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना में आईटीसी, पतंजलि, देहात जैसी प्राइवेट कम्पनियों से एक लाख 86 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कृषि विविधीकरण में 13 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से दो प्रस्तावों को स्वीकृति दे दी गई है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा देवारण्य योजना प्रारंभ की गई है, जिसमें तीन वर्षों में 10 हजार हेक्टेयर भूमि में औषधीय पौधों का उत्पादन किया जायेगा। उन्होंने बताया कि पिछले 5 सालों में प्रदेश में 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में मिशन मोड में बाँस उत्पादन किया गया है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश में राज्य प्राकृतिक कृषि बोर्ड का गठन किया गया है।

डिजिटल एग्रीकल्चर के प्रयोग

खेती में आधुनिक तकनीक के उपयोग के बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि फसल बीमा पंजीयन को राज्य के लैण्ड रिकार्ड से जोड़ा गया है, जिससे ओवर और डुप्लीकेट इन्श्योरेंस को रोकने में सफलता मिली है। साथ ही बीमा भुगतान में उपज आकलन के लिए सेटलाइट आधारित रिमोट सेंसिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। प्रौद्योगिकी के इन प्रभावी उपयोग से कृषि सेक्टर में लगभग 2500 करोड़ रूपये की बचत संभावित है। किसानों और राजस्व अमले की सुविधा के लिए ई-गिरदावरी एप्लीकेशन लागू कर दिया गया है। किसानों को अपनी उपज का विक्रय अपने घर से उचित मूल्य पर करने के लिए “फार्म गेट एप” भी विकसित किया गया है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि प्रदेश में कृषि यंत्रों में सबसिडी का भुगतान ई-रूपी व्हाउचर से करने का निर्णय लिया गया है।

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