झाबुआ: ‘खुशी मिल्क उद्योग’ बना आत्मनिर्भरता की मिसाल
10 मई 2026, झाबुआ: झाबुआ: ‘खुशी मिल्क उद्योग’ बना आत्मनिर्भरता की मिसाल – प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन रही है। जिले के विकासखंड पेटलावद के ग्राम माँडन निवासी अनीता चारेल ने इस योजना का लाभ लेकर “खुशी मिल्क उद्योग” की स्थापना की और आज वे न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि गांव के अनेक परिवारों के लिए आय का स्थायी स्रोत भी तैयार कर रही हैं।
अनुसूचित जनजाति वर्ग से संबंधित अनिता चारेल पूर्व में खेती एवं मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करती थीं। उनकी वार्षिक आय लगभग 60 हजार रुपए थी, जिसमें खर्चों के बाद बहुत कम राशि बच पाती थी। इसी दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) अंतर्गत स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़कर उन्होंने समूह गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी शुरू की।
उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों द्वारा उन्हें प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) की जानकारी दी गई, जिससे उन्हें स्वरोजगार स्थापित करने की प्रेरणा मिली। वर्ष 2025-26 में उन्होंने लगभग 2 लाख रुपए लागत से मिल्क बेस प्रोडक्ट यूनिट स्थापित की, जिसमें उन्हें 70 हजार रुपए का अनुदान प्राप्त हुआ। योजना से जुड़ने के बाद अनिता चारेल ने दुग्ध संग्रहण एवं विक्रय कार्य की शुरुआत की। प्रारंभ में वे 6 लोगों से प्रतिदिन लगभग 15 लीटर दूध एकत्रित करती थीं। धीरे-धीरे उनके कार्य का विस्तार हुआ और आज उनकी संस्था से 35 लोग जुड़े हुए हैं।
वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 180 लीटर दूध का संग्रहण किया जा रहा है। दूध का विक्रय लगभग 40 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से किया जाता है, जिससे प्रतिदिन लगभग 7200 रुपए तथा प्रतिमाह लगभग 2 लाख 16 हजार रुपए का कारोबार हो रहा है। इसके साथ ही अनिता चारेल द्वारा दूध प्रसंस्करण के माध्यम से दही, छाछ, पनीर एवं पशु आहार का उत्पादन एवं विक्रय भी किया जा रहा है। प्रोसेस्ड उत्पाद लगभग 47 रुपए प्रति लीटर की दर से बिक रहे हैं, जिससे उनकी कुल मासिक आय लगभग 2 लाख 53 हजार 800 रुपए तक पहुँच गई है। सभी खर्चों के बाद उन्हें प्रतिमाह लगभग 37 हजार 800 रुपए की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है।
आज अनिता चारेल अपने परिवार का बेहतर जीवन-यापन करने के साथ-साथ गांव के 35 परिवारों को रोजगार एवं आय का स्थायी माध्यम उपलब्ध करा रही हैं। उनकी सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है। अनिता चारेल की यह सफलता कहानी दर्शाती है कि शासन की योजनाओं, विभागीय मार्गदर्शन एवं स्वयं सहायता समूहों के सहयोग से ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना छोटे स्तर के व्यवसाय को बड़े अवसरों में बदलने का सशक्त माध्यम सिद्ध हो रही है।
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