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राज्य कृषि समाचार (State News)

जबलपुर : किसानों की समस्याओं का मौके पर किया समाधान

06 सितंबर 2026, जबलपुर: जबलपुर : किसानों की समस्याओं का मौके पर किया समाधान – जिले के विकासखंड पाटन के ग्राम रोंझा में क्षेत्र भ्रमण के दौरान किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की टीम ने पीतशिरा रोग, फली छेदक कीट से मूंग और उड़द  की फसल को बचाने किसानों को उपयुक्त सलाह दी।

अनुविभागीय कृषि अधिकारी पाटन के नेतृत्व में क्षेत्र भ्रमण पर रोझा पहुँचे कृषि अधिकारियों के दल को किसानों ने चर्चा के दौरान मूंग और उडद की फसल में पीतशिरा और फली छेदक कीट के प्रकोप की जानकारी दी थी। किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए अनुविभागीय कृषि अधिकारी डॉ इंदिरा त्रिपाठी ने मौके से ही कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ ए के सिंह से संपर्क किया। डॉ सिंह ने किसानों को इन रोगों के प्रकोप से फसल को बचाने आवश्यक सलाह दी एवं समाधान बताया।

 किसानों को मूंग और उड़द की फसल में कीट के प्रकोप की स्थिति में क्विनालफॉस 25 प्रतिशत ईसी की 150 मिली प्रति एकड़ की दर से 150 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई। इसी प्रकार पीतशिरा रोग से प्रभावित पौधों को उखाड़कर मिट्टी में दबाने तथा रोग के प्रसार को रोकने के लिए बुप्रोफेजिन 32 प्रतिशत के साथ क्लोथियानिडिन 12 प्रतिशत डब्ल्यूजी की 100 ग्राम अथवा थायमेथोक्साम 50 प्रतिशत डब्ल्यूजी की 80 ग्राम प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करने कहा गया। फली छेदक कीटों के नियंत्रण के लिए पूर्व मिश्रित कीटनाशी क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 9.3 प्रतिशत + लैम्ब्डा-सायहेलोथ्रिन 4.6 प्रतिशत जेडसी की 80 मिली अथवा नोवाल्यूरॉन 5.25 प्रतिशत + इंडोक्साकार्ब 4.5 प्रतिशत एससी की 330 मिली प्रति एकड़ की दर से 150 से 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई।

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इसके अलावा धान एवं मक्का की फसलों में भी कीट प्रबंधन के लिए किसानों को आवश्यक सुझाव दिए गए। धान में भूरा, सफेद एवं हरा फुदका के नियंत्रण के लिए पायरीप्रॉक्सीफेन 11.3 प्रतिशत + इमिडाक्लोप्रिड 1.9 प्रतिशत कीटनाशी 400 मिली प्रति एकड़ की दर से छिड़काव की सलाह दी गई। धान में पत्ती मोड़क तथा तना छेदक कीट के नियंत्रण के लिए अनुशंसित कीटनाशियों का उपयोग करने तथा 150 से 200 लीटर पानी प्रति एकड़ के साथ छिड़काव करने का सुझाव दिया गया।

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 इसी प्रकार मक्का में फॉल आर्मीवर्म के नियंत्रण हेतु डेल्टामेथ्रिन 18.18 प्रतिशत एससी 100 मिली, अथवा पूर्व मिश्रित कीटनाशी क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 6.5 प्रतिशत + थायमेथोक्साम 5 प्रतिशत की 300 मिली प्रति एकड़ आदि अनुशंसित कीटनाशियों का उपयोग करते हुए 150 से 200 लीटर पानी प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई।

 अनुविभागीय कृषि अधिकारी पाटन डॉ इंदिरा त्रिपाठी ने किसानों से कहा कि फसल में किसी भी प्रकार के रोग अथवा कीट के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल कृषि वैज्ञानिकों अथवा कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें और अनुशंसित मात्रा में ही कीटनाशियों का प्रयोग करें। मौके पर किसानों की समस्याओं का समाधान मिलने से किसानों ने कृषि विभाग की टीम एवं कृषि वैज्ञानिकों के प्रति आभार व्यक्त किया। चर्चा के दौरान स्थानीय किसान अनिल पटेल, राजेश पचौरी, आदर्श पटेल, बब्बू पटेल, सुंदर पटेल आदि उपस्थित रहे।

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