राज्य कृषि समाचार (State News)

बालाघाट में IRRI वैज्ञानिकों ने परखी धान की सीधी बुवाई तकनीक, उपयुक्त किस्मों पर चल रहा परीक्षण

14 अगस्त 2026, बालाघाट: बालाघाट में IRRI वैज्ञानिकों ने परखी धान की सीधी बुवाई तकनीक, उपयुक्त किस्मों पर चल रहा परीक्षण – धान की खेती में पानी, श्रम एवं लागत कम करने के उद्देश्य से अपनाई जा रही धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) तकनीक के अनुसंधान एवं प्रदर्शन का अवलोकन करने अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई), फिलीपींस के वैज्ञानिकों ने कृषि महाविद्यालय बालाघाट एवं नवेगांव कलां का भ्रमण किया। इस दौरान आईआरआरआई के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं पौध प्रजनक डॉ. शलभ दीक्षित तथा विज्ञान संचार विशेषज्ञ मर्टेल ऐनी वेलेंज़ुएला मौजूद रहीं।

वैज्ञानिकों ने कृषि महाविद्यालय फार्म एवं नवेगांव कलां के किसानों के खेतों में संचालित यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षण (आरसीटी) एवं अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन (एफएलडी) का निरीक्षण किया। इन परीक्षणों में डीएसआर के लिए उपयुक्त धान की विभिन्न किस्मों एवं कृषि प्रबंधन पद्धतियों का परीक्षण किया जा रहा है।

आईआरआरआई परियोजना के तहत अनुसंधान

कृषि महाविद्यालय में डॉ. उत्तम बिसेन के मार्गदर्शन में आईआरआरआई परियोजना के अंतर्गत डीएसआर तकनीक पर अनुसंधान किया जा रहा है। अधिष्ठाता डॉ. घनश्याम देशमुख ने महाविद्यालय की शैक्षणिक, अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों की जानकारी दी। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. शिव रामाकृष्णा ने परियोजना के उद्देश्यों तथा बालाघाट में संचालित परीक्षणों की जानकारी साझा की।

कृषि महाविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. रमेश अमूले ने वैज्ञानिकों को महाविद्यालय फार्म एवं किसानों के खेतों में संचालित परीक्षणों का अवलोकन कराया। डॉ. विक्रम सिंह गौर, डॉ. सोलंकी एवं डॉ. शिवानी जवाहरकर ने भी विभिन्न अनुसंधान प्रयोगों की जानकारी दी।

किसानों से लिया तकनीक का अनुभव

आईआरआरआई वैज्ञानिकों ने नवेगांव कलां के किसान रोहित कुमार ठाकरे, डोंगरू भाऊ बिसेन एवं चुम्बकलाल चौहान के खेतों का भ्रमण किया। किसानों ने बताया कि डीएसआर तकनीक से पारंपरिक रोपाई की तुलना में श्रम एवं समय की बचत होती है तथा पानी और खेती की लागत भी कम करने में मदद मिलती है।

परीक्षणों में धान की किस्मों की वृद्धि, फसल स्थिति एवं उत्पादन क्षमता का अवलोकन किया जा रहा है, ताकि बालाघाट की जलवायु एवं स्थानीय परिस्थितियों के लिए बेहतर किस्मों की पहचान की जा सके। कृषि विभाग की अधिकारी श्रीमती रंजना भालाधारे भी भ्रमण के दौरान उपस्थित रहीं।

आईआरआरआई वैज्ञानिकों के भ्रमण से अनुसंधान संस्थानों, कृषि विभाग एवं किसानों के बीच समन्वय को बढ़ावा मिला। स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप डीएसआर तकनीक एवं उपयुक्त धान किस्मों को विकसित करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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