इंदौर में अंतरराष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव संपन्न

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बायो एनर्जी के निर्माण के लिए सोया तेल के उपयोग करें – श्री गड़करी

11 अक्टूबर 2021, इंदौर । इंदौर में अंतरराष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव संपन्न गत दिनों इंदौर में अंतरराष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव का  कार्यक्रम आयोजित किया गया , जिसे केंद्रीय सड़क और भूतल परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने आभासी  रूप से सम्बोधित किया। उन्होंने नई बीज प्रौद्योगिकी विकसित करने और सोयाबीन का उत्पादन बढ़ाने के लिए नई किस्मों का अनुसन्धान करने की बात कही। इसके अलावा बायो एनर्जी के लिए सोया तेल का उपयोग करने का भी सुझाव दिया। सोपा सर्वेक्षण के अनुसार सोयाबीन उत्पादन में 118.889 लाख मीट्रिक टन की 13.71% की वृद्धि हुई है।

अपने उद्बोधन में मंत्री श्री गड़करी ने कहा कि अभी देश में एडिबल आयल 65 % आयात होता है, जिसे शून्य पर लाने की ज़रूरत है। देश में सोयाबीन का औसत उत्पादन 6 क्विंटल /एकड़ है। फसल चक्र बदलकर उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। सरसों की तरह सोयाबीन की उत्पादकता बढ़ाने के लिए नई बीज तकनीकी विकसित करने के लिए अनुसन्धान करें, जिससे सोयाबीन का उत्पादन  20 -25  क्विंटल /एकड़ हो , ताकि किसानों का मुनाफा बढ़ सके। अमेरिका में 30 , ब्राजील में 26 और अर्जेंटीना में 28  क्विंटल /एकड़ सोयाबीन उत्पादित होता है। उन्होंने बीज विकास के लिए अमेरिका, ब्राजील और अर्जेंटीना के साथ संयुक्त प्रयास करने की भी बात कही। श्री गड़करी ने बायो एनर्जी के लिए सोया तेल का उपयोग करने का भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा, जो कंपनियां मिलावट करती हैं, उन्हें अपने उत्पाद पर मोटे शब्दों में बताना चाहिए कि खाद्य तेलों के निर्माण में कितने प्रतिशत तेल मिलाए गए हैं। देश की बेकार पड़ी भूमि पर पाम के वृक्ष लगाने का जिक्र  भी किया।  साल भर संयंत्र चलता रहे, इसके लिए सालवेन्ट प्लांट वालों को बायो से एलएनजी गैस बनाने का सुझाव दिया।बताया कि  चार टन परली से एक टन सीएनजी बनती है।

सोया कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र को अतिरिक्त मुख्य सचिव, कृषि और किसान कल्याण, मध्य प्रदेश सरकार, श्री अजीत बी केसरी, सोपा अध्यक्ष, डॉ डेविश जैन, आईसीएआर-आईआईएसआर निदेशक, डॉ नीता खांडेकर एवं कार्यकारी निदेशक सोपा श्री डीएन पाठक ने भी संबोधित किया। कॉन्क्लेव में पहले दिन श्री डेविश जैन ने सोयाबीन का उत्पादन बीते वर्ष से बेहतर होने की उम्मीद जताते हुए कहा कि सरकार अभी सॉफ्ट तेलों के आयात पर 35 प्रतिशत आयात शुल्क के साथ अतिरिक्त प्रभार लगा रही है। यदि कर की यही दर जारी रही तो आगामी वर्षों में तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ेगा। हालाँकि एसोसिएशन ने सोया उत्पाद निर्यात पर दिया जाने वाला इंसेंटिव समाप्त करने की सरकारी नीति पर असंतोष ज़ाहिर किया। भारतीय कृषक समाज के अध्यक्ष श्री कृष्णबीर चौधरी ने ऐसे आयात का विरोध किया, जो ऐन फसल आने के पहले होता है।  इससे उद्योग और किसान दोनों को नुकसान होता है। आयात के दबाव से सोयाबीन के दाम आधे रह गए।उन्होंने  पाम मिशन को किसान के बजाय कारपोरेट सेक्टर के लिए लाभकारी बताया।  तकनीकी सत्र में डॉ पीजी पेडगांवकर, श्री सुरेश चित्तूरी, प्रेरणा देसाई और वंदना भारती सहित विशेषज्ञों ने पोल्ट्री उद्योग, सोयाबीन, सोया तेल और सोयामील की मांग और आपूर्ति के पूर्वानुमान पर अपने विचार रखे, जबकि दूसरे तकनीकी सत्र में एक पैनल चर्चा में मूल्य दृष्टिकोण आयोजित किया गया था। पैनल डिस्कशन में श्री अतुल चतुर्वेदी, श्री सुधाकर देसाई, श्री विवेक पाठक, श्री संदीप बजरिया, श्री मनीष गुप्ता, श्री अजय परमार, श्री ए जानकीरमन, श्री हेमंत बंसल और श्री खालिद खान ने भाग लिया।एनसीईडीएक्स के एमडी श्री अरुण रस्ते ने प्राइस डिस्कवरी और रिस्क मैनेजमेंट पर बात की। सत्र को पाशा पटेल, पूर्व अध्यक्ष, सीएसीपी, महाराष्ट्र और श्री मेहुल अग्रवाल ने भी संबोधित किया।

बता दें कि खराब मौसम और विस्तारित मानसूनी बारिश के कारण कुछ राज्यों में सोयाबीन की फसलों को नुकसान की रिपोर्ट के बावजूद, इस साल देश में सोयाबीन का उत्पादन  बढ़ने की संभावना व्यक्त की गई है, जबकि मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में बुवाई क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई है। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा इंदौर में अंतरराष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव के दौरान जारी नए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 में देश में सोयाबीन का उत्पादन 118.889 लाख टन होने का अनुमान किया गया है, जो गत वर्ष की तुलना में 13.71% अधिक है।  सोयाबीन का उत्पादन 123.677 लाख हेक्टेयर होने का अनुमान था ,लेकिन 119.984 लाख हेक्टेयर भूमि पर ही सोयाबीन की बुवाई की गई । सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष 2021 के लिए प्रति एकड़ सोयाबीन की औसत उपज 2020 के दौरान 883 किलोग्राम/हेक्टेयर के मुकाबले 991 किलोग्राम/हेक्टेयर अधिक आंकी गई है।

मध्य प्रदेश में इस साल बारिश देरी से होने और रकबा कम होने से उत्पादन कम होने की आशंका के विपरीत, सोयाबीन का उत्पादन 41.772 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले 52.293 लाख टन होने का अनुमान है। महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और गुजरात में सोयाबीन का उत्पादन अधिक होने का अनुमान है। महाराष्ट्र में सोयाबीन का उत्पादन गत वर्ष  के 45.444 लाख टन के मुकाबले 48.324 लाख टन,तेलंगाना में 1.644 लाख टन के मुकाबले 3.540 लाख टन ,कर्नाटक में 3.732 लाख टन के मुकाबले 3.846 लाख टन और  गुजरात में सोयाबीन का उत्पादन पिछले साल के 1.450 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले 2.271 लाख टन होने का अनुमान है। इस साल मध्य प्रदेश और राजस्थान में सोयाबीन के रकबे में गिरावट देखी गई है। सोपा के अनुसार मध्य प्रदेश में गत वर्ष सोयाबीन का रकबा  58.540 लाख हेक्टेयर था, जो इस साल घटकर  55.688 लाख हेक्टेयर रह गया। इसी तरह राजस्थान में इस साल सोयाबीन की बुवाई का रकबा घटकर 9.254 लाख हेक्टेयर रह गया , जो गत वर्ष 11.002 लाख हेक्टेयर था । जबकि  देश के दूसरे सबसे बड़े  सोयाबीन उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में इस वर्ष सोयाबीन का रकबा 40.797 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 43.849 लाख हेक्टेयर हो गया।

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