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बचने के संभावित उपाय

  • धर्मेंद्र सिंह, डांगी पूजा अरुण एवं कृतिका 
    विस्तार शिक्षा विभाग
    चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय , हिसार

03 मई 2021, हिसार, हरियाणा देश में बढ़ता जल संकट – भारत में कृषि को जीवन का आधार माना जाता है| परन्तु भारत की सबसे बड़ी समस्या भी कृषि से ही जुडी हुई है| चाहे वो स्वच्छ जल का अभाव हो, भूमि अपरदन, फसल अवशेषों से होता प्रदूषण, किसानों की बढती आत्महत्या की घटना हो| अगर हम सिर्फ कृषि क्षेत्र में पानी की समस्या पर फोकस करे तो बहुत ही भयावह तस्वीर सामने उभर के आती है| पानी, फसल की प्रत्येक स्टेज पर अति महत्वपूर्ण रोल निभाता है| यहाँ हम कृषि शब्द में खेतीबाड़ी के साथ साथ पशुपालन, मत्स्यपालन, व अन्य खाद्य पदार्थो के प्रसंस्करण इत्यादि को भी शामिल कर रहे है| वन, झीलों, और सब प्रकार के प्राणियों के लिए जल प्राथमिक आवश्यकता है| इस समय कृषि विश्व स्तर पर सबसे बड़ा जल उपयोगकर्ता है और यह जल प्रदूषण, का प्रमुख स्त्रोत भी है| भारत के पास विश्व के केवल 4% जल स्त्रोत है जिस पर विश्व की 16% जनसंख्या का जीवन निर्भर |
पानी की कमी का प्रभाव न केवल कृषि अपितु अन्य क्षेत्रो जैसे पशुपालन, मत्स्यपालन, व अन्य खाद्य पदार्थो के प्रसंस्करण आदि व्यवसाय पर भी मुख्य रूप से पड़ेगा| पानी की कमी उपभोकताओ और खाद्य मूल्य श्रंखलायओ के लिए भी अत्यधिक चिंता का विषय है| अगर अब भी हम पानी की समस्या को गंभीरता से न लेने की भूल कर बैठे तो सारी मानव जाति को इसके दुष्परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए|

जल संकट

हमे आगे बढने से पहले ये जान लेना चाहिए की असल में जल संकट है क्या? जल संकट किसी भी क्षेत्र में पानी के उपयोग की मांग के हिसाब से ताजा जल संसाधनों की कमी ही जल संकट है| भारत में प्रति व्यक्ति ताजा पानी की उपलब्धता निरंतर कम होती जा रहीं है| अगर हम पिछले कुछ दशक का अध्ययन करे तो ये बात और साफ़ हो जाती है कि

भारत में प्रति व्यक्ति

ताजा जल की उपलब्धता में कैसे कमी होती आई है|

क्र. सं.    समय             पानी की उपलब्धता

1           1951             5177  घन मीटर
2           2001            1816  घन मीटर
3           2011             1545 घन मीटर
4          2030              1300 घन मीटर

भारत में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता

नीति आयोग रिपोर्ट

नीति आयोग ने पहली बार देश के विभिन्न राज्यों में वर्तमान जल उपलब्धता पर एक रिपोर्ट जारी की जिसका शीर्षक था “जल प्रबंधन सूचकांक”.

  •  इस रिपोर्ट में इस तथ्य पर प्रकाश डाला गया है कि 60 करोड़ लोग या वर्तमान जनसंख्या का लगभग 50% हिस्सा अधिक से अत्यधिक जल संकट का सामना कर रहा है|
  • हमारा 70% पानी दूषित है और 75% घरों में पीने का पानी नहीं है| वर्तमान में जल गुणवत्ता सूचकांक में भारत 122 देशों में से 120 वे स्थान पर है|
  • घरेलू उपयोग के लिए 100-200 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन की सिफारिश की जाती है| परन्तु यहाँ पानी की उपलब्धता केवल 50 लीटर तक ही हो पाती है|
  • कृषि, उपयोग और उर्जा क्षेत्रोँ की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, अनुशंसित न्यूनतम वार्षिक प्रति व्यक्ति आवश्यकता लगभग 1700 क्यूबिक मीटर है
  • जल संकट भारत की विकास दर को काफी गंभीर रूप से प्रभावित करेगा और आने वालें सालों में इस संकट को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है|
जल संकट और कृषि
  • 1960 में हरित क्रांति को अपनाने के बाद से लगभग 50% खाद्य उत्पादन सिंचित भूमि से ही होता है| जबकि प्रमुख कृषि राज्यों का भूजल भंडारण खतरनाक दर से गिरता जा रहा है|
  • ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के कारण देश भर में वार्षिक वर्षा कम होती जा रहीं है और इसका असर आप नीति आयोग की रिपोर्ट से समझ सकते है| 2018 की रिपोर्ट में, 11 राज्यों के 266 जिलों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया था|
  • एक रिपोर्ट के अनुसार 2020 के अंत तक भारत के 21 बड़े शहर गंभीर जल संकट के जूझ रहे होंगे| ये स्थति जल संकट की हमारी समस्या और चिंता को और बढ़ा देती है|
उपाय
  • कृषि क्षेत्रोँ के लिए पानी के मूल्य निर्धारण की समीक्षा की जरूरत है और इसमें उचित संशोधन किया जाना चाहिए|
  • भूजल पुनर्भरण तंत्र ग्रामीण स्तर पर विकसित किया जाना चाहियें|
  • सतह को उपजाऊ बनाये रखने के लिए पानी की निकासी की कारगार योजना बनाई जानी चाहियें|
  • जल उपयोग दक्षता बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए| लोगों को सूक्षम सिचाई के लिए प्रेरित करने की जरूरत है|
  • सिचाई की आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए उचित बुनियादी ढांचा विकसित जाये और सूक्ष्म सिचाई तकनीक पर उचित सब्सिडी दी जानी चाहिए|
  • जल संरक्षण नीति में उचित सुधार किये जाने की आवश्यकता है|
  • जल संघन फसलों में कमी करने की आवश्यकता है|
  • जल संचयन में वृद्धि|
  • जल प्रदुषण को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाये जाये|
  • फसलों की ऐसी किस्मे विकसित की जाये जिन्हें कम सिचाई की आवश्यकता हो|

पानी से जुड़े कुछ तथ्य (नीति आयोग)

भारत एक विशाल देश है जहां अलग अलग राज्यों की पानी की जरूरते अलग अलग है| इस चित्र में इन राज्यों की पानी की उपयोगिता के पैटर्न को दर्शाया गया है| उत्तर प्रदेश सबसे अधिक जल का उपयोग करता हैं| अगर हम हरियाणा की बात करे तो नौवे नंबर हैं| नीति आयोग ने पानी से जुड़े कुछ पेश किये थे अपनी वार्षिक रिपोर्ट में:-

1) भारत के 21 बड़े शहर इस साल के अंत तकभीषणजल संकट का सामना कर रहे होंगे|
2) 2030 तक देश की 40% आबादी के पास स्वच्छ पानी का कोई साधन नहीं होगा|
3) जल संकट के कारण 2050 तक भारत की जी.डी.पी. 6% तक कम हो जाएगीं|
4) पानी की कमी से हर साल 2 लाख लोगों की मौत हो जाती है|
5) पिछले 10 सालों में भूमिगत

 

 

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