राज्य कृषि समाचार (State News)

किसानों के लिए जरूरी सूचना: जायद में मूंगफली व उड़द की खेती से मिलेगा ज्यादा फायदा, मध्यप्रदेश कृषि विभाग ने जारी की सलाह   

06 फरवरी 2026, भोपाल: किसानों के लिए जरूरी सूचना: जायद में मूंगफली व उड़द की खेती से मिलेगा ज्यादा फायदा, मध्यप्रदेश कृषि विभाग ने जारी की सलाह – कृषि विभाग द्वारा ग्रीष्मकालीन (जायद) में फसल चयन को लेकर कृषकों को सलाह दी गई है। बताया गया है कि ग्रीष्मकालीन मूंग फसल के स्थान पर मूंगफली एवं उड़द फसल लेना अधिक लाभकारी सिद्ध हो सकता है। कृषक भाई मूंगफली एवं उड़द फसल की बुवाई 15 फरवरी से 15 मार्च के मध्य करना सुनिश्चित करें।

उड़द फसल

उड़द फसल के लिए उन्नतशील किस्में IPU-10-26, IPU-11-02, IPU-13-1, पंत उड़द-8 एवं कोटा उड़द-3 (KPU-524-65) अनुशंसित की गई हैं। ये किस्में मूंग येलो मोजेक वायरस (MYMV), उड़द लीफ क्रिंकल वायरस (ULCV) एवं पावडरी मिल्ड्यू रोग के प्रति रोगरोधक हैं। इनका औसत उत्पादन 10 से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।

बीज दर 15 से 18 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखी जाए। बीज उपचार फफूंदनाशी, कीटनाशी, राइजोबियम/जैविक कल्चर (FIR) एवं ट्राइकोडर्मा विरिडी से करें।

उड़द दलहनी फसल होने के कारण इसकी जड़ों में राइजोबियम जीवाणु पाए जाते हैं, जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर कर पौधों को उपलब्ध कराते हैं। संतुलित पोषण प्रबंधन के अंतर्गत प्राकृतिक खेती अपनाते हुए जीवामृत, बीजामृत एवं घन जीवामृत का उपयोग करते हुए एनपीके 20:40:20 के अनुपात में पोषक तत्वों की पूर्ति करें।

भूमि की दशा एवं फसल अवस्था के अनुसार 10 से 12 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें। समय पर निराई-गुड़ाई कर खरपतवार नियंत्रण करें। कीट नियंत्रण हेतु लाइट ट्रैप, फेरोमोन ट्रैप एवं मित्र कीटों का उपयोग करें तथा आवश्यकता अनुसार रासायनिक कीटनाशी का प्रयोग करें।

मूंगफली फसल

मूंगफली फसल के लिए गिरनार-4/5, GG-37/35, GJG-32, K-1812, TCGS-1157 (नित्य हरता) एवं TAG-73 किस्में अनुशंसित की गई हैं। ये किस्में लेट लीफ स्पॉट, रस्ट, स्टेम रॉट एवं पीनट बड नेक्रोसिस रोग के प्रति मध्यम सहनशील या प्रतिरोधक पाई जाती हैं। इनका औसत उत्पादन 22 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।

बीज दर 100 से 120 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखें। बीज उपचार फफूंदनाशी, कीटनाशी, राइजोबियम/जैविक कल्चर (FIR) एवं ट्राइकोडर्मा विरिडी से करें। मूंगफली फसल की जड़ों में उपस्थित राइजोबियम जीवाणु नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सहायक होते हैं। संतुलित पोषण प्रबंधन के तहत प्राकृतिक खेती अपनाते हुए जीवामृत, बीजामृत एवं घन जीवामृत का उपयोग करते हुए एनपीके 20:80:20 के अनुपात में पोषक तत्वों की पूर्ति करें।

भूमि एवं फसल की स्थिति के अनुसार 12 से 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें। समय पर निराई-गुड़ाई कर खरपतवार नियंत्रण करें। कीट नियंत्रण हेतु लाइट ट्रैप, फेरोमोन ट्रैप, मित्र कीटों का उपयोग करें तथा आवश्यकता अनुसार रासायनिक कीटनाशी का प्रयोग करें।

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