राज्य कृषि समाचार (State News)फसल की खेती (Crop Cultivation)

दोहरा लाभ लेना है तो गन्ने के साथ उगाए पपीते भी

29 अक्टूबर 2024, भोपाल: दोहरा लाभ लेना है तो गन्ने के साथ उगाए पपीते भी – जी हां ! यदि किसान भाईयों को दोहरा लाभ लेना है तो कृषि विशेषज्ञों की यह सलाह है कि किसान गन्ने के साथ पपीते की भी खेती करें क्योंकि पपीते की खेती न केवल जल्दी तैयार हो सकती है वहीं पपीते की खेती ज्यादा जगह भी नहीं लेती है। इसलिए जो किसान गन्ने की खेती कर रहे है वे पपीते की खेती करने के लिए भी विचार कर सकते है।

कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि यदि गन्ना किसान गन्ने के साथ कुछ दूसरी फसलें लगाएँ तो उन्हें अच्छी कमाई हो जाती है। पपीते की फसल जल्दी तैयार हो सकती है और ये गन्ने के खेत में जगह भी ज़्यादा नहीं लेती। इसलिए गन्ने के साथ पपीता उगाने से दोहरा लाभ मिलता है। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में दोमट और बलुई मिट्टी की बहुतायत है। ऐसी मिट्टी न सिर्फ़ गन्ने के लिए बढ़िया है बल्कि पपीते के लिए भी बेहद मुफ़ीद होती है। गन्ने की फसल तैयार होने में 11 से लेकर 12 महीने लगते हैं। इस बीच यदि गन्ने के साथ किसान कुछ दूसरी फसलें लगाएँ तो उन्हें अच्छी कमाई हो जाती है। पपीते की फसल जल्दी तैयार हो सकती है और ये गन्ने के खेत में जगह भी ज़्यादा नहीं लेती। इसलिए गन्ने के साथ पपीता उगाने से दोहरा लाभ मिलता है।

वैसे तो देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य, उत्तर प्रदेश में गन्ने के साथ कई दूसरी फसलें भी लगायी जाती हैं। लेकिन तीन-चार साल पहले  -भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ के कृषि वैज्ञानिकों ने उत्तर-पूर्वी राज्य मिज़ोरम में जाकर देखा है कि वहाँ के किसान गन्ने के साथ पपीते की उत्तम खेती कर रहे हैं। इससे उनकी आमदनी में बम्पर इज़ाफ़ा हुआ। तब तक उत्तर प्रदेश के किसानों के बीच गन्ने के साथ पपीते की खेती कुछ ख़ास प्रचलित नहीं थी। हालांकि, प्रदेश में पपीते की पर्याप्त माँग थी और इसकी भरपाई के लिए बिहार, बंगाल, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के राज्यों से पपीता की सप्लाई होती थी। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, गन्ने और पपीते के पौधे एक-दूसरे लिए रोग-प्रतिरोधक की भूमिका निभाते हैं। इसीलिए यदि किसी एक फसल पर रोगों का प्रकोप होता है तो दूसरी पर भी इसका असर पड़ने की आशंका ज़्यादा होती है। लिहाज़ा, जैसे ही किसी रोग का संकेत नज़र आये वैसे ही उसका गम्भीरता से इलाज करना चाहिए। लेकिन दूसरी ओर, गन्ने की ही तरह पपीते की खेती को भी ज़्यादा पानी पसंद है। पूर्वांचल का मौसम भी पपीते की फसल के लिए बेहद माकूल है।

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