भाकृअप के उप महानिदेशक ने किया राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान का भ्रमण
तीन महत्वपूर्ण सुविधाओं का किया उद्घाटन
06 नवंबर 2026, इंदौर: भाकृअप के उप महानिदेशक ने किया राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान का भ्रमण – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), नई दिल्ली के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी.के. यादव ने आज ICAR–राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान में विकसित तीन महत्वपूर्ण सुविधाओं का उद्घाटन किया तथा संस्थान के वैज्ञानिकों के साथ परिचर्चा कर सोयाबीन अनुसंधान की भावी प्राथमिकताओं एवं संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
भ्रमण के दौरान डॉ. यादव ने संस्थान में नवनिर्मित फार्म रिसोर्स हब का उद्घाटन किया। इस केंद्र में संस्थान के अनुसंधान प्रक्षेत्र में उपयोग किए जाने वाले विभिन्न कृषि उपकरणों,मशीनरी एवं यंत्रों को व्यवस्थित रूप से रखा जाएगा। साथ ही, अनुसंधान प्रक्षेत्र में उत्पादित सोयाबीन एवं अन्य कृषि उत्पादों को भी यहां प्रदर्शित किया जाएगा। इससे संस्थान के कृषि संसाधनों के बेहतर प्रबंधन एवं प्रक्षेत्रीय अनुसंधान गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा।

डॉ. यादव ने संस्थान के नवनिर्मित मुख्य प्रवेश द्वार का भी उद्घाटन किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने संस्थान परिसर में स्थापित ‘सोया आद्या’ सोया उत्पाद बिक्री काउंटर का शुभारंभ किया। इस काउंटर की स्थापना सोयाबीन आधारित खाद्य पदार्थों के लोकप्रियकरण, उनके पोषण संबंधी महत्व के प्रचार-प्रसार तथा उपभोक्ताओं तक सोया उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। यहां टोफू (सोया पनीर), सोया आटा एवं उससे निर्मित विभिन्न खाद्य पदार्थों जैसे सोया मठरी, नमकीन, कुकीज एवं बिस्किट सहित सोयाबीन ओकारा से तैयार उत्पादों को उपलब्ध कराने की पहल की गई है।
सोयाबीन उत्पादन एवं खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता के लिए अनुसंधान को दें प्राथमिकता – वैज्ञानिकों के साथ आयोजित परिचर्चा के दौरान डॉ. डी.के. यादव ने कहा कि देश में तिलहन उत्पादन बढ़ाने तथा खाद्य तेलों की बढ़ती आवश्यकता की पूर्ति में सोयाबीन की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। देश को खाद्य तेलों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सोयाबीन की उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ इसके बीजों में खाद्य तेल की मात्रा बढ़ाने की दिशा में भी विशेष अनुसंधान प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने वैज्ञानिकों को आश्वस्त किया कि सोयाबीन अनुसंधान को प्राथमिकता देते हुए इस दिशा में आवश्यक वित्तीय संसाधनों एवं बजट की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास ऐसे अनुसंधान प्रयासों को प्रोत्साहित करने के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध है तथा परिषद द्वारा आवश्यकतानुसार वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के समुचित प्रयास किए जाएंगे।
डॉ. यादव ने वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि वे सोयाबीन उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि के लिए पारंपरिक अनुसंधान पद्धतियों के साथ-साथ नवीन वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आधुनिक तकनीकों एवं नवाचार आधारित अनुसंधान को अपनाएं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक नए विचारों एवं अनुसंधान प्रस्तावों के साथ आगे आएं। परिषद ऐसे सभी सार्थक अनुसंधान प्रयासों को प्रोत्साहित करने तथा उनके लिए आवश्यक वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. के.एच. सिंह सहित संस्थान के वैज्ञानिक, अधिकारी
एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
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