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राज्य कृषि समाचार (State News)

राजस्थान डेयरी सेक्टर में ऐतिहासिक विस्तार, 45 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंचा दूध संकलन  

30 अप्रैल 2026, जयपुर: राजस्थान डेयरी सेक्टर में ऐतिहासिक विस्तार, 45 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंचा दूध संकलन –  ग्रामीण विकास के परिप्रेक्ष्य में पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभरकर सामने आया है। राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अग्रिम अनुमानों के अनुसार पशुधन क्षेत्र का वर्ष 2025-26 में सकल मूल्य वर्धन प्रचलित कीमतों पर 2.17 लाख करोड़ है, जो कि कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों के कुल योगदान का लगभग 49.35 प्रतिशत है तथा फसलों के हिस्से (42.61 प्रतिशत) से भी अधिक है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि बदलते कृषि परिदृश्य में डेयरी के माध्यम से यह क्षेत्र ‘किसान के एटीएम’ के रूप में किसानों के लिए स्थिर एवं नियमित आय का अहम साधन बनने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

राजस्थान में श्वेत क्रांति का नया दौर —

मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में पिछले दो वर्षों में डेयरी क्षेत्र को नई ऊर्जा मिली है। राज्य सरकार के प्रयासों से पिछले न केवल दुग्ध संकलन और प्रसंस्करण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, बल्कि विभिन्न योजनाओं से लाखों दुग्ध उत्पादकों की आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा भी सुदृढ़ हुई है। इसी का परिणाम है कि सहकार से समृद्धि के ध्येय को मजबूती मिलने के साथ ही राजस्थान श्वेत क्रांति के नए दौर से गुजर रहा है।

45 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंचा दुग्ध संकलन—

पिछले दो वर्षों में आरसीडीएफ के दुग्ध संकलन, प्रसंस्करण से लेकर विपणन तक सभी आयामों में निरंतर प्रगति दर्ज की जा रही है। राज्य में दुग्ध संकलन वर्ष 2025-26 में बढ़कर लगभग 45 लाख लीटर प्रतिदिन तक भी पहुंच रहा है। वहीं दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता दो वर्षाें में 51 लाख लीटर से बढ़कर 54 लाख लीटर प्रतिदिन हो गई है तथा इसे अगले दो वर्षों में बढ़ाकर 74 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

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विपणन में 15 प्रतिशत की वृद्धि—

डेयरी के मार्केटिंग नेटवर्क मे व्यापक विस्तार से दुग्ध उत्पादों के विपणन में 15 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में नए ‘सरस’ बूथ स्थापित किए जाने के साथ ही अन्य राज्यों में प्रतिदिन 1 लाख लीटर से अधिक दूध की आपूर्ति की जा रही है। वहीं सरस द्वारा भारतीय सेना को प्रतिवर्ष 250 करोड़ से अधिक के दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराया जा रहे हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान को मजबूत करता है। इसके अलावा आइसक्रीम, फ्लेवर्ड मिल्क और मिठाइयों के वैल्यू एडेड उत्पादों को भी जोड़ा जा रहा हैं।

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पशुपालकों को 700 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान—

पशुपालकों को दिए जाने वाले दूध के क्रय मूल्य में वृद्धि की गई है जिससे वर्ष 2025-26 में लगभग 700 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान हुआ है। इससे दुग्ध उत्पादकों की आय में बढ़ोतरी हुई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।

इसी तरह सरस स्वरोजगार योजना के तहत 2 हजार नए बूथ स्थापित किए गए हैं तथा इसका विस्तार धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर भी किया जा रहा है। राष्ट्रीय ब्रांड बनाने के लिए दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश तक भी इसका विस्तार किया जा रहा है। इसके साथ ही सरस बूथ कैफे और सरस प्लाजा भी स्थापित किए जा रहे हैं।

दो वर्षों में 3525 नई डेयरी सहकारी समितियां गठित—

आरसीडीएफ एवं संबद्ध दुग्ध संघों की वित्तीय स्थिति में व्यापक सुधार आया है। वर्ष 2025-26 में इनका कुल टर्नओवर 10 हजार करोड़ तक पहुंच गया। वहीं वर्ष 2024-25 में टर्नओवर में 13.81 प्रतिशत तथा वार्षिक लाभ में 41 प्रतिशत से अधिक की उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई । वहीं डेयरी क्षेत्र के विस्तार के लिए पिछले दो वर्षों में 3525 नई डेयरी सहकारी समितियों का गठन किया गया है।

मिलावट के विरूद्ध जीरो टाॅलरेंस की नीति को सरस अमृतम अभियान एवं दूध का दूध पानी का पानी जैसे अभियानों ने परिलक्षित किया। गुणवत्ता नियंत्रण के लिए राज्य में 10,000 से अधिक सैंपलों की जांच और 1200 से अधिक निरीक्षण किए गए हैं। साथ ही, आधुनिक परीक्षण मशीनों की स्थापना तथा डिजिटल मॉनिटरिंग व रियल-टाइम डेटा प्रबंधन प्रणाली का क्रियान्वयन भी किया जा रहा है।

दूध उत्पादकों को 1 हजार 386 करोड़ रुपये का मिला अनुदान —

राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाएं दुग्ध उत्पादकों के लिए सहारा एवं सुरक्षा का जरिया बन रही हैं। मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना के अंतर्गत दूध उत्पादकों को 5 प्रति लीटर की अतिरिक्त सब्सिडी दी जाती है। इस योजना के तहत पिछले दो वर्षों में 1 हजार 386 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किया गया है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हुई है।

इसके अलावा, सरस सामूहिक बीमा योजना दूध उत्पादकों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करती है। इस योजना के तहत सामान्य बीमारी के लिए 1 लाख प्रति वर्ष तथा गंभीर बीमारी के लिए 2 लाख प्रति वर्ष का बीमा कवर दिया जाता है। इसी प्रकार राज सरस सुरक्षा कवच योजना में मृत्यु या पूर्ण विकलांगता पर 5 लाख तथा आंशिक विकलांगता पर 2.5 लाख रुपये दिए जाते हैं।

नवाचार आधारित योजनाओं से महिला सशक्तीकरण को मिल रहा बढ़ावा
महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए भी नवाचार आधारित योजनाएं चलाई जा रही हैं। सरस लाडो योजना के अंतर्गत पंजीकृत दूध उत्पादकों की बेटियों की शादी के लिए 1 लाख का अनुदान दिया जाता है, जबकि सरस मायरा योजना के तहत दो बेटियों तक की शादी के लिए मायरा (मातृपक्ष से) के रूप में 21 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाती है। स्वास्थ्य और पोषण को ध्यान में रखते हुए जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसव के बाद महिला दूध उत्पादकों को 5 लीटर घी निशुल्क दिया जाता है। यें सभी योजनाएं दूध उत्पादकों को आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करती है।

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