हाईटेक होती खेती ड्रोन करेगा फसलों पर छिड़काव

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17 जनवरी 2022, छिन्दवाड़ाहाईटेक होती खेती ड्रोन करेगा फसलों पर छिड़काव अब पीठ पर स्प्रेयर लादे, मुंह पर मास्क लगाए खेतों में कीटनाशक छिड़कने, उर्वरक डालने, मिट्टी जांचने का दौर जल्द खत्म होने वाला है। भारत सरकार का कृषि मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद देश भर में विभिन्न जिलों के कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से किसानों के बीच ड्रोन प्रदर्शन कर तकनीक का प्रसार कर रहा है। कृषि मंत्रालय द्वारा कृषि में ड्रोन उपयोग के मानक परिचालन प्रोसीजर भी जारी किए हैं। खेती में उपयोग होने वाले ड्रोन की कीमत 1 लाख से 6 लाख तक हो सकती है परन्तु छोटे किसानों के लिए इसे खरीदना संभव नहीं है। ड्रोन उड़ाने वाली अनेक कंपनियां इस क्षेत्र में है जो अपनी सेवाएं सशुल्क दे रही हैं। प्रायोगिक तौर पर यह अनुभव किया गया कि खेती में इसके उपयोग से श्रम कम लगेगा, समय की बचत होगी और उपज-उत्पादकता भी बढ़ेगी। भारतीय कृषि में कितना परिवर्तन होगा, यह भविष्य के गर्भ में है।

आलू, गेहूं के खेत पर ड्रोन से छिड़काव

जिले में ड्रोन तकनीक से पोषक तत्व/नैनो यूरिया के छिड़काव का प्रदर्शन जिले के मोहखेड़ विकासखंड के ग्राम लिंगा के कृषक श्री सीताराम राउत के आलू एवं गेहूं के खेत में किया गया। इस ड्रोन प्रदर्शन को कलेक्टर श्री सौरभ कुमार सुमन, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री हरेन्द्र नारायण, जिला आपदा प्रबंधन समिति के सदस्य श्री विवेक साहू, एसडीएम श्री अतुल सिंह, उप संचालक कृषि श्री जितेन्द्र कुमार सिंह, उद्यानिकी महाविद्यालय के डीन एवं सह संचालक आंचलिक कृषि अनुसंधान केन्द्र डॉ. विजय पराडकर, उप संचालक उद्यानिकी श्री आर.के. कोरी व सहायक कृषि यंत्री श्री समीर पटेल ने देखा । इस अवसर पर इफको प्रतिनिधि श्री अभिषेक त्रिपाठी, कृषि विभाग के मैदानी अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, जिले के प्रगतिशील कृषक सर्वश्री बुधमान मोहने, लखन डोंगरे, कमल पाठे व संतोष डोंगरे सहित बडी संख्या में अन्य कृषक उपस्थित थे। यह प्रदर्शन उड़ान स्टार्टअप के प्रबंधक डॉ. रोहित जुनेजा के सहयोग से कृषि विभाग एवं कृषि अभियांत्रिकी विभाग द्वारा जिले में संपन्न कराया गया।


उप संचालक कृषि श्री सिंह ने बताया कि ड्रोन तकनीक से रसायनिक कीटनाशक/ नींदानाशक दवाओं और नैनो यूरिया एवं पोषक तत्वों का छिड़काव कम समय व कम लागत में अधिक प्रभावी तरीके से किया जाकर अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। साथ ही ऐसी फसलें जैसे संतरा, अरहर, कपास, मक्का, गन्ना आदि अधिक ऊंची फसलों में इस तकनीक से रसायनिक दवाओं का छिड़काव अधिक प्रभावी तरीके से लगभग 30 प्रतिशत कम दवा में किया जा सकता है।


कार्यक्रम स्थल पर किसानों से चर्चा कर उन्हें ड्रोन संचालन के संबंध मे विस्तृत जानकारी दी गई और उसके लाभ से अवगत कराया गया।

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