उर्वरक संकट से निपटने कमर कसी सरकार ने

Share

अग्रिम भण्डारण की तैयारी शुरु

  • (राजेश दुबे)

8 मार्च 2022, भोपाल । उर्वरक संकट से निपटने कमर कसी सरकार ने – रबी सीजन 2021-22 समाप्त होने की ओर है। प्रदेश में रबी फसलों की कटाई शुरु हो चुकी है। शीघ्र ही रबी फसलें मंडी में आना शुरु हो जायेंगी। रबी फसलों की बिक्री के साथ ही किसान आगामी खरीफ सीजन की तैयारी प्रारंभ कर देगा। बीज खाद की खरीदी भी करने लगेगा। विगत वर्षों में रसायनिक खाद के समय पर न मिलने के अनुभव से किसान ने रसायनिक उर्वरक की व्यवस्था को तैयारी की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल कर लिया है। अब किसान भी अपने स्तर पर रसायनिक उर्वरक का अग्रिम उठाव करने लगा है। पहले सरकार उर्वरक व्यवस्था की रणनीति के अंतर्गत उर्वरकों का अग्रिम भण्डारण करती थी, लेकिन अब सरकार ने भी अपनी रणनीति में भण्डारण के साथ-साथ अग्रिम विक्रय को भी शामिल कर लिया है। हालांकि तमाम प्रयासों के बाद भी समय पर उर्वरक की उपलब्धता का संकट यथावत है।

आग्रामी खरीफ सीजन के लिये भी मध्य प्रदेश सरकार ने पिछले अनुभवों से सबक लेते हुए कमर कस ली है। संभवत: उर्वरक उद्योग के वैश्विक परिदृश्य के भांपते हुए और आगामी वर्ष को चुनावी वर्ष के रूप में देखते हुए प्रदेश सरकार ने उर्वरक व्यवस्था में किसी तरह की कमी नहीं आने देना चाहती है। यहां उल्लेखनीय होगा कि मध्यप्रदेश के लगभग 70 प्रतिशत उर्वरक वितरण सहकारिता पर निर्भर है।

खरीफ सीजन 2022 में रसायनिक उर्वरक वितरण व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिये सरकार ने 8 लाख टन खाद के अग्रिम भण्डारण का निर्णय लिया है। यहां उल्लेखनीय होगा कि खरीफ 2021 में 9 लाख टन खाद के अग्रिम भण्डारण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। खरीफ 2022 में डीएपी उर्वरक के अग्रिम भण्डारण का लक्ष्य 1 लाख टन कम रखा गया है। डीएपी के लक्ष्य में कमी से ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार को भी मांग अनुसार डीएपी की उपलबधता में कमी आने का अंदेशा है।

उर्वरक व्यवस्था में लगे अन्य पदस्थ सूत्र बताते है कि प्रदेश सरकार ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए खरीफ 2022 के लिये प्रस्तावित मांग अनुसार उर्वरक आपूर्ति पर केन्द्र से सहमति अभी से प्राप्त कर ली है। राज्य ने केन्द्र से 13 लाख टन यूरिया 10 लाख टन डीएपी तथा 2.5 लाख टन एनपीके की मांग रखी थी।
सूत्रों के अनुसार इस मात्रा में उर्वरक आपूर्ति पर सहमति प्रदेश के अपर मुख्य सचिव श्री अजीत केसरी और केन्द्र के वरिष्ठ अधिकारियों के मध्य विडियों कान्फ्रेंसिंग के मध्यम से आयोजित बैठक में हुई है।

अग्रिम उठाव पर ब्याज मुक्त ऋण योजना

मध्य प्रदेश सरकार वर्ष 2021-22 से उर्वरक के अग्रिम उठाव को बढ़ावा देने के लिये ब्याज मुक्त ऋण सुविधा दे रही है। यह सुविधा मार्कफेड से लेकर किसान तक को दी जाती है। इसके अंतर्गत खरीफ मौसम में 1 मार्च से 31 मई तथा रबी मौसम में 1 अगस्त से 15 सितम्बर के मध्य उर्वरक के उठाव के लिये ऋण पर ब्याज में छूट प्रदान की जाती है।

केन्द्र की उर्वरक नीति ‘हिडन मोड’ में

नये फसली वर्ष में जहां राज्यों में उर्वरक व्यवस्था को लेकर सुगबुगाहट शुरु हो गई है, वहीं केन्द्र सरकार की उर्वरक नीति और उर्वरक उपलब्धता में पारदर्शिता दोनों ‘हिडन मोड’ में चली गई हैं। एक ओर देश में सार्वजनिक रूप से उर्वरक उपलब्धता को दर्शाने वाले फर्टिलाइजर, मॉनिटरिंग सिस्टम (एफएमएस) में ‘लॉग इन’ व्यवस्था लागू कर दी गई है। जिससे देश की उर्वरक परिदृश्य की पारदर्शिता गायब हो गई है। दूसरी ओर केन्द्र की नई उर्वरक अनुदान नीति भी गायब है। जिसके आभाव में उर्वरक आयातक, निर्माता और प्रदायक अपनी आगामी नीति नहीं बना पा रहे हैं। 5 राज्यों का चुनावी ऊंट किस करवट बैठेगा केन्द्र सरकार इस इंतजार में है, उर्वरक उद्योग इंतिजार के इंतिहा के दौर से गुजर रहा है और देश का किसान इस बार कुछ अच्छी खबर आने के इंतजार में है।

खरीफ 2022 के लिए अग्रिम उठाव के लक्ष्य (लाख मे. टन में)
खाद  विपणन संघ के लिए   समितियों के लिए किसानों के लिए
डीएपी 3.00 2.00 1.00
काम्पलेक्स 1.00 0.85 0.65
यूरिया 4.00 3.00 2.00
पोटाश 0.40 0.30 0.25
योग  8.40 6.15 3.90

महत्वपूर्ण खबर: महिला दिवस पर अग्रणी महिलाओं का किया सम्मान

Share
Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published.