स्वर्णिम दो साल, किसान मालामाल

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मुख्यमंत्री के 2 वर्ष के कार्यकाल पर विशेष

  • कमल पटेल

30 मार्च 2022, स्वर्णिम दो साल, किसान मालामाल – सुशासन की आठ प्रमुख विशेषताएँ हैं। यह आम सहमति, जवाबदेही, भागीदारी, पारदर्शी, उत्तरदायी, प्रभावी एवं कुशल, न्यायसंगत और समावेशी होने के साथ-साथ कानून के शासन का अनुसरण करता है। हमारा मध्यप्रदेश प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की सुशासित लोक-कल्याणकारी प्रबंधकीय अवधारणा को न केवल साकार करने के लिए कृत-संकल्पित है बल्कि विगत 2 वर्ष में फसल उपार्जन, फसल बीमा, फसल हानि राहत, बिजली सब्सिडी आदि किसानों के कल्याण की विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों के खातों में 1 लाख 72 हजार करोड़ रूपए से अधिक की राशि अंतरित की गई। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश खुशहाल अन्नदाता के सपनों को भी बखूबी साकार कर रहा है।

लाभकारी योजनाएं

ग्रामीण और कृषि अर्थव्यवस्था की मजबूत पहचान के साथ आगे बढ़ते मध्यप्रदेश में अन्नदाताओं की आय दोगुनी करने का प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का संकल्प पूरा कर स्वर्णिम इतिहास रच दिया गया है। कृषक समाज की खुशहाली के लिए बीते दो सालों में अभूतपूर्व कार्य और इंतजाम किए गए हैं। मध्यप्रदेश किसान-कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के अंतर्गत किसानों से संबंधित केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के साथ राज्य की योजनाएँ जमीनी स्तर पर सफलतापूर्वक लागू होने से अन्नदाताओं में हर्ष है। केन्द्र प्रवर्तित योजनाएँ जैसे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन तिलहन, नेशनल मिशन फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर, सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, परम्परागत कृषि विकास योजना, स्वाईल हेल्थ कार्ड योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, सबमिशन ऑन एग्रोफोरेस्ट्री, समर्थन मूल्य में फसल का उपार्जन का लाभ हमारे किसानों को भरपूर मिल रहा है। यही कारण है तिलहन, दलहन और धान की उपज और बिक्री में मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय सफलताएँ हासिल की हैं।

मध्यप्रदेश के अन्नदाताओं के सर्वांगीण विकास और खुशहाली के लिए राज्य की योजनाएँ भी भली-भांति फलीभूत हो रही है। नलकूप खनन योजना, राष्ट्रीय बायोगैस योजना, कृषि शक्ति योजना, कृषि यंत्रीकरण को प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना, मुख्यमंत्री कृषक फसल उपार्जन योजना, अन्नपूर्णा योजना, मुख्यमंत्री खेत तीर्थ योजना बहुत ही प्रभावकारी साबित हुई है।

फसल बीमा का लाभ मिला

विगत दो साल में किसानों के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाओं से किसानों के खातों में एक लाख बहत्तर हजार करोड़ रूपये से अधिक की राशि अंतरित की जा चुकी है। फसल बीमा योजना में शामिल किसानों की संख्या साल 2002 की स्थिति में 15.23 लाख थी जो आज बढक़र 65 लाख से अधिक हो गई है। इस साल 12 फरवरी को बैतूल के किसान महासम्मेलन में 49 लाख 85 किसानों के खातों में 7 हजार 618 करोड़ रूपये की फसल बीमा राशि सिंगल क्लिक से भेजी गई थी, आज तक पूरे देश में इतनी बड़ी राशि फसल बीमा के रूप में किसानों को एक साथ कभी नहीं दी गई। यह एक रिकॉर्ड है। इसके साथ सरकार संकट के समय किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रही है। हमने गाँव-गाँव में सर्वे कराया, छुट्टी के दिन भी ऑफिस खुलवाया, किसानों की फसलों का बीमा कराया और पूरी ताकत लगाकर किसान भाई-बहनों को राहत राशि दिलवाई।

किसानों को 24 घंटे बिजली मिले, यह सुनिश्चित किया गया है, जिससे उन्हें पैदावार बढ़ाने में बड़ी मदद मिली है। हमारी सरकार ने कृषि उपभोक्ताओं के लिए 15 हजार 7 सौ करोड़ रूपये से अधिक की बिजली सब्सिडी प्रतिवर्ष दी है। पिछले दो सालों में शून्य ब्याज दर पर किसानों को 29 हजार करोड़ रूपये से अधिक का ऋण दिया गया है।

सम्मान निधि से सहायता

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि एवं किसान-कल्याण योजना के माध्यम से किसानों को प्रतिवर्ष 10 हजार रूपये की निश्चित सहायता प्राप्त है। इन योजनाओं के अंतर्गत पिछले दो सालों में 76 लाख 53 हजार से अधिक किसानों के खातों में 15 हजार करोड़ रूपये की राशि अंतरित की गई है।

उद्यानिकी से आत्मनिर्भरता

किसान आत्मनिर्भर बने इसके लिए उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन एवं डेयरी विकास, मछुआ कल्याण और सहकारिता आदि क्षेत्रों को खूब बढ़ावा दिया जा रहा है और इसके परिणाम बेहद उत्साहवद्र्धक रहे हैं। उद्यानिकी और खाद्य प्र-संस्करण के लिए प्रदेश की 137 उद्यानिकी नर्सरियों को पीपीपी मॉडल पर विकसित किया गया। इसी तरह प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत इस साल 75 करोड़ रूपये का व्यय कर उद्यानिकी फसलों की उत्पादकता को बढ़ाने का काम किया गया है।

पशुपालन एवं डेयरी विकास में अग्रणी

पशुपालन और डेयरी विकास की कल्याणकारी योजनाओं से अन्नदाता बड़ी संख्या में लाभान्वित हो रहे हैं। गौ-शालाओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि की गई है। गौ-शालाओं में रोजगारपरक कार्यक्रम बड़ी संख्या में संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें गौ-काष्ठ निर्माण, गौ- फिनाइल, जैविक खाद निर्माण, गौ-मूत्र औषधियाँ एवं गौ-शिल्प को बढ़ावा देने का काम किया जा रहा है। इसी प्रकार मछुआ कल्याण के लिए संचालित की गई योजनाओं के बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं और इससे अन्नदाताओं की आत्म-निर्भरता में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है। बहरहाल आत्मनिर्भर भारत, मजबूत भारत और विश्वगुरु भारत का सपना साकार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी संकल्पित है और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मध्यप्रदेश नित नये आयाम स्थापित रहा है।

(लेखक मप्र के कृषि मंत्री हैं)

 

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