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राज्य कृषि समाचार (State News)

प्रत्येक ग्राम पंचायत में बनेगी गौशाला : श्री श्रीवास्तव

manoj shrivastav
Manoj Shrivastav
(विशेष प्रतिनिधि)
भोपाल। म.प्र. की प्रत्येक ग्राम पंचायत में गौशाला बनाई जाएगी। दिसम्बर तक गौशालाओं का कार्य पूर्ण कर चारागाहों के लिए जमीन का अधिग्रहण करें। यह निर्देश अपर मुख्य सचिव पशुपालन श्री मनोज श्रीवास्तव ने संभागीय बैठकों में दिए। उन्होंने कहा कि कार्पोरेट गौशालाओं के लिए 50 एकड़ से अधिक जमीन और जल की व्यवस्था जरूरी है।

अपर मुख्य सचिव पशु पालन ने कहा कि फसलोत्पादन की तुलना में पशुपालन के तहत गाय, भैंस,बकरी और मुर्गीपालन में लाभ की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि गौ वंश में म.प्र. देश में पहले स्थान पर है, लेकिन भैंस वंश में पांचवे स्थान पर है। जबकि समग्र गौ भैंस वंशीय पशुओं में दूसरे स्थान पर हैं। 1962 संजीवनी वेटेनरी, आईवीएफ लैब की भी जानकारी दी और कहा कि अब द्वार पर मादा पशु की प्रसूति के लिए 100 रुपए शुल्क लगेगा। पशुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराएं। देश में दुग्ध उत्पादन में म.प्र. छठे स्थान पर है। राज्य में दूध उत्पादन में 8.12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मुख्य डेयरी संयंत्र की संसाधन क्षमता चार लाख लीटर प्रति दिन की है, जबकि दुग्ध शीत केंद्र की क्षमता 1 लाख 28 हजार लीटर की है। अंडे के उत्पादन में देश में 12वें क्रम पर हैं।

श्री श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश में विशेष मुहिम चलाकर किसानों को पशु पालन के महत्व को समझाया जाये। फसल उत्पादन की तुलना में पशु पालन से चार गुना अधिक लाभ मिलता है। प्रदेश में गाय, भैंस, बकरी और मुर्गी पालन व्यवसाय की विस्तार की व्यापक संभावनायें है। राज्य शासन इस दिशा में विशेष प्रयास कर रहा है। राज्य शासन द्वारा पशुओं के इलाज के लिये बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जायेंगी।

अपर मुख्य सचिव पशुपालन ने पशुपालन के कार्यक्रमों एवं योजनाओं के बारे में पॉवर पाइन्ट प्रजेंटेशन के माध्यम से जानकारी देते हुए सम्बन्धितों को निर्देश दिये कि ‘शुद्ध के लिये युद्ध’ अभियान निरन्तर चलाया जाये। पशु कल्याण समिति के कार्यों की ब्लॉक स्तर पर मॉनीटरिंग की जाये। 

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मुख्यमंत्री गौसेवा योजना एक महत्वाकांक्षी योजना है। गौशालाओं के लिये लक्ष्य निर्धारित किये गये हैं, उन्हें समय-सीमा में पूर्ण कर लिये जायें। बैठक में निर्देश दिये कि प्रदेश में गौपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड है। गौशालाओं के लिये दान देने के लिये प्रचार-प्रसार किया जाये और इस कार्य में अधिकारीगण भी दान करने में आगे आयें। गौशालाओं के पूर्ण होने की जानकारी अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाये और इनका राजस्व खसरे में परिसम्पत्तियों को दर्ज किया जाये। 

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