राज्य कृषि समाचार (State News)

देश में पहली बार दक्षिण अफ्रीका के सहयोग से शाजापुर जिले में कृष्ण मृगों को पकड़ने का अभियान शुरू

25 अक्टूबर 2025, इंदौर: देश में पहली बार दक्षिण अफ्रीका के सहयोग से शाजापुर जिले में कृष्ण मृगों को पकड़ने का अभियान शुरू – मालवांचल में खास तौर से इंदौर , उज्जैन , देवास और शाजापुर जिलों के किसान कृष्ण मृग और रोजड़ों द्वारा  खेतों में उगी फसल को नुकसान पहुंचाने की समस्या से वर्षों से परेशान थे , लेकिन अब इस समस्या के समाधान के लिए देश में पहली बार  दक्षिण अफ्रीका की कंजर्वेशन सोल्यूशंस की टीम एवं वन विभाग की टीम के संयुक्त प्रयास से हेलीकॉप्टर और बोमा पद्धति से कृष्ण मृगों को पकड़ने के अभियान शाजापुर जिले में शुरू किया गया है।  इस अभियान के तहत अब तक 148  कृष्ण मृगों को पकड़कर मंदसौर जिले के गांधीसागर वन्य जीव अभ्यारण्य में छोड़ा गया है। इस अभियान से किसानों की फसल नुकसानी में कमी आएगी। यह अभियान शाजापुर जिले में 5 नवंबर तक  चलाया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि दक्षिण अफ्रीका की कंजर्वेशन सॉल्यूशंस की टीम एवं वन विभाग की टीम द्वारा हेलीकॉप्टर और बोमा से कृष्ण मृगों को पकड़ने का अभियान शुरू किया गया है । मुख्य वन संरक्षक उज्जैन श्री एमआर बघेल के द्वारा बोमा क्षेत्र में  कृष्ण मृगों को पकड़ने की कार्यवाही की निगरानी की जा रही है। जिसमें  शाजापुर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने पूर्ण सहयोग दिया है ।  श्री बघेल ने आसपास के ग्राम वासियों से अपील की है कि आने वाले दिनों की कार्यवाही के दौरान खेतों में जब हेलीकॉप्टर द्वारा हांका लगाया जा रहा है तो कृष्ण मृगों के पीछे ना भागें । साथ ही आसपास के रास्तों में गाड़ियों में ना घूमें । आगामी  दिनों में यह अभियान शाजापुर जिले के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में चलाया जाएगा। साथ ही साथ नीलगायों  को भी पकड़कर अन्य वन क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा। इस अभियान के प्रभारी  वनमंडलाधिकारी देवास  श्री वीरेन्द्र सिंह पटेल  के अनुसार शाजापुर जिले  के इमलीखेड़ा के बाद कालापीपल तहसील के लसूड़िया घाघ एवं निपनिया खुर्द में  बोमा लगाया गया,फिर लसूड़िया कला, निपनिया खुर्द, बदरपुर, पोचनेर गाँव से 69 कृष्णमृगों को किसानो के खेतों से पकड़कर  गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य के जंगल में छोड़ा गया। इस अभियान के तहत अब तक 148 कृष्णमृगों को पकड़कर अन्यत्र वन क्षेत्र में छोड़ा गया है ।

क्या है बोमा पद्धति ? – बोमा पद्धति दरअसल दक्षिण अफ्रीका की तकनीक है , जिसके ज़रिए  हिरणों  को सुरक्षित तरीके से पकड़ा जाता है। बोमा यानी अस्थायी घेरा होता है , जिसे जंगल में भारी कपड़े की मदद से बनाया जाता है। सबसे पहले हिरणों के झुण्ड की लोकेशन पता की जाती है।  फिर हेलीकॉप्टर से हांका लगाया जाता है और हिरणों को हेलीकॉप्टर की आवाज़ और हवा के दबाव से बोमा की तरफ ले जाया जाता है। जैसे ही हिरण बोमा में पहुँचते हैं , वैसे ही छिपे वनकर्मी बोमा के गेट बंद कर देते हैं और हिरणों  को कैद करने के बाद बेहोश  करके  सुरक्षित वाहन में शिफ्ट कर देते हैं , जहां हिरणों के लिए हवा और खाने -पीने का पूरा इंतज़ाम होता है और फिर इन्हें अभ्यारण्य में छोड़ दिया जाता है। वन्य जीवों को पकड़ने का दक्षिण अफ्रीका का यह अहिंसक तरीका यहां खूब पसंद किया जा रहा है। 15 नवंबर तक चलने वाले इस अभियान में  संयुक्त टीम द्वारा 400  हिरण और 100 नीलगाय ( रोजड़े ) पकड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इस अभियान की सफलता से अन्य प्रभावित जिलों  के किसानों को भी आस बंधी है कि उन्हें भी जल्द ही कृष्ण मृग और रोजड़ों की समस्या से मुक्ति मिल जाएगी।

श्री आर एल जामरे , उप संचालक कृषि , शाजापुर ने कृषक जगत को बताया कि वन्य जीवों को पकड़ने के इस अभियान से किसानों को बहुत लाभ होगा। किसानों को फसल नुकसानी की चिंता नहीं रहेगी। जो किसान अभी तक चयनित फसलें उगाते  थे , वे अब अन्य फसलें भी उगाने लगेंगे।

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