रायसेन जिले में उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध
28 अक्टूबर 2025, रायसेन: रायसेन जिले में उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध – जिले में किसानों को व्यवस्थित और सुगमतापूर्वक खाद का वितरण हो, इसके लिए कलेक्टर श्री अरूण कुमार विश्वकर्मा द्वारा कृषि विभाग, सहकारिता विभाग तथा मार्कफेड सहित अन्य विभागों के अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कलेक्टर श्री विश्वकर्मा द्वारा जिले में खाद का आवंटन और वितरण की सतत् मॉनीटरिंग भी की जा रही है।
कृषि विभाग के उप संचालक श्री केपी भगत ने बताया कि रायसेन जिले में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। रबी वर्ष 2025-26 हेतु यूरिया 75000 मे.टन, डीएपी 49000 मे.टन, एनपीके 17000 मे.टन, सिंगल सुपर फास्फेट 6500 मे.टन, एमओपी 1373 मे.टन की मांग के विरुद्ध 01 अक्टूबर से आज दिनांक तक डबल लॉक केन्द्र, सहकारी समितियों एवं विभाग में पंजीकृत अनुज्ञप्ति धारी निजी विक्रेताओं को यूरिया 22849 मे.टन, डीएपी 9322 मे.टन, एनपीके 8371 मे.टन, एसएसपी 13331 मे.टन, एमओपी 245 मे. टन कुल 54119 मे.टन की उपलब्धता हो गई है। रविवार तक वितरण उपरांत यूरिया 9030 मे.टन, डीएपी 4383 मे.टन, एनपीके 6100 मे.टन, एसएसपी 12476 एवं एमओपी 231 मे.टन कुल 32229 मे.टन उर्वरक शेष है।
जिले के किसानों से अपील करते हुए उप संचालक कृषि ने कहा कि जिले में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है, किसान भाई अपनी रबी फसलों की बोनी हेतु आवश्यकतानुसार डीएपी, सुपर फास्फेट अथवा एनपीके अपनी सहकारी समिति, निकटतम डबल लाक केन्द्र अथवा निजी पंजीकृत विक्रेता से क्रय कर सकते हैं। किसानों से अनुरोध है खेतों की तैयारी करते समय खरीफ फसल अवशेष (नरवाई ) में आग ना लगाएं, इससे मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों का हास होता है। रबी फसलों की बोनी में आधार खाद के रूप में एनपीके का अधिक से अधिक उपयोग करें क्योंकि डीएपी से दो पोषक तत्व (नाइट्रोजन एवं फास्फोरस) प्राप्त होते हैं जबकि एनपीके के उपयोग से एक अतिरिक्त तत्व पोटाश प्राप्त होता है जो फसल के लिये आवश्यक भी है और पौधों को रोग, बीमारी तथा कीटों से भी सुरक्षा प्रदान करता है। दानों में चमक बढाता है तथा वजन में वृद्धि करता है। जो किसान अपनी स्वयं के बीज का उपयोग कर रहे हैं उनको आवश्यक रूप से बीज उपचार किया जाना चाहिये, बीज उपचार करते समय सबसे पहले फफूंद नाशक जैसे कार्बेन्डाजिम उसके उपरांत कीटनाशक जैसे थायोमिथाक्साम एवं सबसे अंत मे कल्चर जैसे अनाज की फसलों में पीएसबी एवं एजेटोवेक्टर दलहनी फसलों में पीएसबी एवं राइजोबियम कल्चर से बीज उपचारित करना चाहिये।
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