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राज्य कृषि समाचार (State News)

खेती होगी आसान, लागत घटेगी: छोटे किसानों तक पहुंच रही आधुनिक कृषि मशीनरी

14 अगस्त 2026, भोपाल: खेती होगी आसान, लागत घटेगी: छोटे किसानों तक पहुंच रही आधुनिक कृषि मशीनरी – भारतीय कृषि को आधुनिक, कम लागत वाली और अधिक कुशल बनाने की दिशा में केंद्र सरकार कृषि मशीनीकरण को लगातार बढ़ावा दे रही है। खेती में तकनीक और मशीनों का इस्तेमाल बढ़ने से न केवल किसानों का शारीरिक श्रम कम होता है, बल्कि समय की बचत के साथ उत्पादन क्षमता बढ़ाने में भी मदद मिलती है। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत कृषि मशीनीकरण उप-मिशन (SMAM) संचालित किया जा रहा है।

लोकसभा में सांसद परषोत्तमभाई रुपाला द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने योजना के प्रावधानों और किसानों को मिलने वाली सहायता की जानकारी दी। योजना का विशेष जोर छोटे और सीमांत किसानों तक आधुनिक कृषि उपकरणों की पहुंच बढ़ाने पर है, क्योंकि सीमित कृषि भूमि और आर्थिक संसाधनों के कारण इन किसानों के लिए महंगे कृषि यंत्र खरीदना आसान नहीं होता।

मशीन खरीदने पर 40 से 50 प्रतिशत तक सहायता

SMAM के तहत किसानों को विभिन्न प्रकार की कृषि मशीनरी और उपकरण खरीदने के लिए मशीन की लागत का 40 से 50 प्रतिशत तक वित्तीय सहयोग दिया जाता है। इससे किसान ट्रैक्टर, कृषि यंत्र और खेती से जुड़े अन्य आधुनिक उपकरण अपेक्षाकृत कम लागत में प्राप्त कर सकते हैं।

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सरकार का जोर उन क्षेत्रों में भी मशीनीकरण बढ़ाने पर है, जहां कृषि कार्यों के लिए पर्याप्त फार्म पावर उपलब्ध नहीं है। मशीनों के इस्तेमाल से जुताई, बुआई, रोपाई, कटाई और फसल प्रबंधन जैसे कार्य कम समय में पूरे किए जा सकते हैं।

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कस्टम हायरिंग सेंटर से किराये पर मिलेंगे यंत्र

हर किसान के लिए अलग-अलग महंगी मशीन खरीदना जरूरी नहीं है। इसी समस्या के समाधान के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) को बढ़ावा दिया जा रहा है। किसान इन केंद्रों से अपनी आवश्यकता के अनुसार ट्रैक्टर और अन्य कृषि यंत्र किराये पर लेकर उपयोग कर सकते हैं।

SMAM के तहत 250 लाख रुपये तक की परियोजना लागत वाले कस्टम हायरिंग सेंटर को परियोजना लागत का 40 प्रतिशत तक वित्तीय सहयोग दिया जाता है। इससे गांवों में कृषि मशीनरी की उपलब्धता बढ़ेगी और छोटे किसानों को भी आधुनिक तकनीक का लाभ मिल सकेगा।
फार्म मशीनरी बैंक के लिए 80 प्रतिशत तक सहायता

योजना में फार्म मशीनरी बैंक (FMB) स्थापित करने का भी प्रावधान है। इसके लिए 30 लाख रुपये तक की परियोजना लागत पर 80 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता उपलब्ध हो सकती है। पूर्वोत्तर राज्यों में यह सहायता परियोजना लागत की 95 प्रतिशत तक हो सकती है।

फार्म मशीनरी बैंक और कस्टम हायरिंग सेंटर जैसी व्यवस्थाएं ग्रामीण क्षेत्रों में मशीनों की सामूहिक उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे छोटे और सीमांत किसान बिना भारी निवेश किए आधुनिक कृषि उपकरणों का इस्तेमाल कर सकेंगे।

दरअसल, खेती को लाभकारी बनाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। लागत घटाना, समय बचाना और श्रम की उपलब्धता की समस्या का समाधान भी उतना ही जरूरी है। ऐसे में कृषि मशीनीकरण उप-मिशन किसानों को आधुनिक खेती की ओर ले जाने के साथ कम लागत और अधिक दक्षता वाली कृषि व्यवस्था तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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