राज्य कृषि समाचार (State News)

नरवाई प्रबंधन पर कृषक संगोष्ठी आयोजित

12 नवंबर 2025, दमोह: नरवाई प्रबंधन पर कृषक संगोष्ठी आयोजित – कृषि विज्ञान केन्द्र दमोह में आत्मा परियोजना के तहत फसल अवशेष/पराली/नरवाई प्रबंधन पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कृषक संगोष्ठी में कलेक्टर  श्री सुधीर कुमार कोचर द्वारा किसानों को अवगत कराया गया कि पराली/फसल अवशेष/ नरवाई में आग लगाने से पर्यावरण प्रदूषण, मृदा प्रदूषण होता है तथा  मनुष्य के स्वास्थ्य में भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। उन्होने कहा हमारे जिले में दिल्ली जैसी स्थिति उत्पन्न न हो इसलिए किसान बन्धुओं को अभी से सतर्क रहना चाहिए और फसल अवशेष/नरवाई/पराली में कभी भी आग नहीं लगाना चाहिए। इसके प्रबंधन को विभिन्न उपायों को अपनाया जा सकता है।

कलेक्टर श्री कोचर ने कहा, जिले में नरवाई प्रबंधन के लिए कई कंपनियों के साथ काम शुरू किया जा रहा है। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रतिनिधि श्री गौरव पटेल द्वारा  किसान बंधुओं से अपील की कि, नरवाई में आग लगाने से हमारी जमीन खराब हो जाती है तथा हमारा पर्यावरण भी प्रदूषित हो रहा है इसलिए किसान बंधुओं को नरवाई में आग बिल्कुल नहीं लगाना चाहिए तथा नरवाई प्रबंधन के विभिन्न उपाय अपनाकर नरवाई को प्रबंधित करना चाहिए। संगोष्ठी को श्री हरिश्चन्द्र पटेल, श्री सुंदर विश्वकर्म।  श्री हेमन्त पटेल ने भी सम्बोधित किया। उपस्थित जन-प्रतिनिधियों ने बोताराई, लुहर्रा तथा सदगुवां ग्रामों को पूर्णतः नरवाई मुक्त ग्राम घोषित करने का निर्णय लिया ।  इसके  लिए युद्ध स्तर पर कार्य किया जाएगा। संगोष्ठी में कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रभारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज अहिरवार द्वारा संक्षिप्त में नरवाई प्रबंधन के बारे में किसान बंधुओं को जानकारी दी गई ।

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परियोजना संचालक आत्मा  श्री जे.एल प्रजापति द्वारा फसल अवशेष/पराली/नरवाई में आग लगने से होने वाले नुकसान जैसे-मृदा में पोषक तत्वों की हानि, लाभदायक सूक्ष्म जीवों की मृत्यु मिट्टी की संरचना खराब होना, हानिकारक गैसों का उत्सर्जन, धुन्ध, स्वास्थ्य जोखिम , आग लगने का जोखिम, जैविक विविधता को नुकसान, ग्लोबल वार्मिंग जैसी तमाम समस्याओं के बारे में पी.पी.टी. के माध्यम से प्रस्तुतीकरण किया गया । श्री प्रजापति के द्वारा किसानों को फसल अवशेष, पराली, नरवाई प्रबंधन की विभिन्न विधियों, विभिन्न यंत्र का उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। श्री प्रजापति ने यह भी बताया यदि किसान बन्धु फसल अवशेष/पराली/नरवाई में आग लगाते है तो उन पर अर्थ-दण्ड भी अधिरोपित किया जा सकता है। कृषक जिनके पास दो एकड़ से कम जमीन है उन्हें 2500/- रूपये प्रतिघटना पर्यावरण क्षतिपूर्ति, कृषक जिनके पास दो एकड़ से अधिक एवं पांच एकड़ से कम जमीन है उन्हें 5000/- प्रतिघटना अर्थदण्ड तथा वे कृषक जिनके पास 5 एकड़ से अधिक जमीन है उन्हें 15000/- रूपये प्रति घटना अर्थदण्ड पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में अधिरोपित किया जा सकता है। श्री प्रजापति ने  बताया कि जो ग्राम नरवाई प्रबंधन पर अच्छा कार्य करेंगे, उन्हें आत्मा योजना के अन्तर्गत जिला स्तर पर 25000/- रूपये नगद राशि एवं प्रशस्ति पत्र के साथ सम्मानित किया जाएगा।  कार्यक्रम में सहायक संचालक कृषि श्री एस.एल.कुर्मी , प्रभारी उप-परियोजना संचालक आत्मा श्री  शैलेन्द्र पौराणिक सहित कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक एवं कृषि विभाग के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, वी.टी.एम., ए.टी.एम तथा कृषि विस्तार अधिकारी एवं लगभग 150 किसान बन्धु एवं महिला किसान उपस्थित  थे।  आभार प्रदर्शन उपसंचालक कृषि श्री  जी.एल.अहिरवार द्वारा किया गया।

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