हरियाणा में गन्ने के भाव पर किसान संगठन नाराज, 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग
भाकियू (चढ़ूनी) ने 15 रुपये की बढ़ोतरी को बताया नाकाफी, खेती की बढ़ती लागत और महंगाई का दिया हवाला
02 नवंबर 2026, चंडीगढ़: हरियाणा में गन्ने के भाव पर किसान संगठन नाराज, 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग – हरियाणा सरकार की ओर से गन्ने के समर्थन मूल्य में की गई बढ़ोतरी से किसान संगठन संतुष्ट नहीं हैं। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने सरकार के फैसले पर नाराजगी जताते हुए गन्ने का भाव कम से कम 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि मौजूदा महंगाई और खेती की लगातार बढ़ती लागत को देखते हुए केवल 15 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी किसानों की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है।
दो वर्षों के लिए घोषित किए गन्ने के भाव
हरियाणा सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए गन्ने का भाव 430 रुपये प्रति क्विंटल और वर्ष 2027-28 के लिए 450 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। सरकार के इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए भाकियू (चढ़ूनी) ने कहा कि गन्ने की खेती में किसानों का खर्च लगातार बढ़ रहा है, लेकिन फसल का मूल्य उस अनुपात में नहीं बढ़ाया जा रहा है। संगठन ने सरकार से गन्ने का भाव बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की है।
खेती की लागत बढ़ी, किसानों पर आर्थिक दबाव
किसान संगठन के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में डीजल, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी और कृषि मशीनों की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है। खेत की तैयारी से लेकर फसल की कटाई और ढुलाई तक किसानों को पहले की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ रहा है। इसके बावजूद गन्ने के मूल्य में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने से किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
भाकियू (चढ़ूनी) का कहना है कि गन्ना एक ऐसी फसल है, जिसमें किसानों को लंबे समय तक खेत में मेहनत और पूंजी लगानी पड़ती है। ऐसे में उत्पादन लागत और किसानों की मेहनत को ध्यान में रखकर ही गन्ने का उचित मूल्य निर्धारित किया जाना चाहिए।
संगठन ने सरकार से मांग की है कि किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए गन्ने के भाव पर पुनर्विचार किया जाए और इसे कम से कम 600 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए, ताकि बढ़ती महंगाई के बीच गन्ना उत्पादकों को उचित आर्थिक लाभ मिल सके।
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