ड्रोन से बदली गांव की खेती: महिला बनी आधुनिक कृषि की नई पहचान, किसानों को भी मिल रहा लाभ
22 अप्रैल 2026, भोपाल: ड्रोन से बदली गांव की खेती: महिला बनी आधुनिक कृषि की नई पहचान, किसानों को भी मिल रहा लाभ – मध्यप्रदेश के कटनी जिले के छोटे से गांव खिरहनी की रहने वाली हेमलता विश्वकर्मा आज ग्रामीण क्षेत्र में आधुनिक खेती की नई पहचान बन चुकी हैं। सीमित संसाधनों के बीच शुरू हुआ उनका सफर अब तकनीक के सहारे सफलता की मिसाल बन गया है। कभी पारंपरिक खेती तक सीमित रहने वाली हेमलता ने अब ड्रोन तकनीक को अपनाकर न केवल अपनी आय बढ़ाई है, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी नई राह खोल दी है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से वर्ष 2019 में जुड़ने के बाद हेमलता ने “जय साईं बाबा स्व-सहायता समूह” के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों की शुरुआत की। उन्होंने सीसीएल और सीआईएफ से 2.40 लाख रुपये का ऋण लेकर समय पर चुकाया और आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया। लेकिन उनकी सोच यहीं नहीं रुकी—वर्ष 2024 में इंदौर और भोपाल में ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण लेकर उन्होंने खेती में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया, जो उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।
ड्रोन के जरिए खेतों में दवा और खाद के छिड़काव की तकनीक अपनाने के बाद हेमलता ने अब तक 52 एकड़ से अधिक भूमि पर काम किया है और लगभग 1.80 लाख रुपये की आय अर्जित की है। उनका यह प्रयास न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रहा है, बल्कि आसपास के किसानों को भी कम समय और लागत में बेहतर खेती के लिए प्रेरित कर रहा है।
ड्रोन तकनीक से खेती में बदलाव
ड्रोन के उपयोग से खेतों में दवा और उर्वरक का छिड़काव तेज, सटीक और कम लागत में संभव हो रहा है। इससे श्रम की बचत के साथ उत्पादन क्षमता भी बढ़ रही है। हेमलता के इस नवाचार ने ग्रामीण क्षेत्र में खेती के पारंपरिक तरीकों को बदलने की दिशा में अहम भूमिका निभाई है।
महिला सशक्तिकरण की मिसाल
हेमलता केवल खेती तक सीमित नहीं हैं, बल्कि “बैंक सखी” के रूप में भी सक्रिय हैं। वे अन्य महिलाओं को वित्तीय साक्षरता सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनके समूह को स्कूलों में मध्यान्ह भोजन तैयार करने का कार्य भी मिला है, जिससे आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित हुए हैं।
बढ़ी आय और रोजगार के अवसर
ड्रोन तकनीक अपनाने के बाद हेमलता की मासिक आय 12 से 15 हजार रुपये तक पहुंच गई है। इसके साथ ही उन्हें विभिन्न योजनाओं के तहत प्रोत्साहन राशि भी मिल रही है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि गांव में अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़े हैं।
प्रेरणा बनती ‘ड्रोन दीदी’
आज हेमलता “ड्रोन दीदी” के नाम से आसपास के गांवों में जानी जाती हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि अगर सही दिशा, प्रशिक्षण और संकल्प हो, तो ग्रामीण महिलाएं भी तकनीक के जरिए बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं। उनकी कहानी बदलते ग्रामीण भारत और महिला सशक्तिकरण की सशक्त मिसाल बन चुकी है।
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