झाबुआ में रबी फसल नियोजन पर जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित
13 अक्टूबर 2026, झाबुआ: झाबुआ में रबी फसल नियोजन पर जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित – मध्यप्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसी क्रम में जिला प्रशासन के निर्देशानुसार जिले में अल्प वर्षा की स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए रबी मौसम 2026-27 के लिए फसल नियोजन, किस्म चयन एवं संसाधन प्रबंधन संबंधी जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र, झाबुआ के सभागृह में किया गया। कार्यशाला में रबी फसलों के लिए आकस्मिक कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा कर कृषि विभाग के मैदानी अमले को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
कार्यशाला में जिले की वर्तमान वर्षा एवं उपलब्ध सिंचाई जल की स्थिति को देखते हुए कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों तथा मौसम अनुकूल किस्मों की बुआई को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही उपलब्ध जल संसाधनों के समुचित उपयोग, मृदा में नमी संरक्षण, संतुलित उर्वरक प्रबंधन एवं उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया।
12 से 16 अक्टूबर तक जल चौपाल के माध्यम से किसानों को किया जाएगा जागरूक – अल्प वर्षा की स्थिति से निपटने एवं रबी मौसम में किसानों को समसामयिक तकनीकी सलाह उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 12 से 16 अक्टूबर 2026 तक जिले में जल चौपाल का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान कृषि विभाग का मैदानी अमला ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण कर किसानों को फसल नियोजन, जल संरक्षण एवं उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी देगा।
जल चौपाल के माध्यम से किसानों को खेत में उपलब्ध नमी के संरक्षण हेतु उचित जुताई एवं समतलीकरण, फसल अवशेष प्रबंधन, बीज उपचार एवं अनुशंसित मात्रा में बीज उपयोग करने की सलाह दी जाएगी। साथ ही जीरो टिलेज पद्धति से बुआई, उर्वरकों के सीमित एवं संतुलित उपयोग, फसल अवशेष नहीं जलाने तथा उपलब्ध सिंचाई जल का युक्तियुक्त उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
किसानों को कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों जैसे चना, मसूर एवं सरसों की बुआई को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाए गी। इसके अतिरिक्त चने की कम पानी की आवश्यकता वाली एवं सूखा सहनशील किस्मों पुसा मानव, आरवीजी-202, आरवीजी-204 एवं पुसा जेजी-16 तथा गेहूं की कम अवधि एवं कम पानी की आवश्यकता वाली किस्मों एचआई-1605 (पुसा उजाला), एचआई-1665 (पुसा शरबती), एचआई-1544 एवं एचआई-1650 (पुसा ओजस्वी) के उपयोग के संबंध में जानकारी दी जाएगी।
कृषि वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों ने दिया तकनीकी मार्गदर्शन – कार्यशाला में उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास श्री एस.एस. चौहान ने जिले की वर्षा एवं सिंचाई की स्थिति को देखते हुए किसानों को कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों एवं मौसम अनुकूल किस्मों की बुआई के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया। उन्होंने कार्बनिक खाद के उपयोग को बढ़ावा देने तथा उपलब्ध संसाधनों का समुचित प्रबंधन सुनिश्चित करने की सलाह दी।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. जगदीश मौर्य ने कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों एवं उन्नत किस्मों के चयन के साथ उर्वरकों के संतुलित उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। मौसम वैज्ञानिक डॉ. आर.के. त्रिपाठी ने मौसम की परिस्थितियों के अनुरूप समय पर बुआई करने की सलाह दी।
सहायक संचालक कृषि श्री बी.एस. बघेल ने बिना पलेवा बुआई एवं नरवाई प्रबंधन, परियोजना संचालक आत्मा श्री जी.एस. त्रिवेदी ने ग्राम स्तरीय जल चौपाल के आयोजन एवं किसानों को दी जाने वाली समसामयिक तकनीकी सलाह के संबंध में मार्गदर्शन दिया। सहायक संचालक कृषि श्री एस.एस. रावत ने फसल बीमा एवं भावांतर भुगतान योजना की जानकारी दी। उप परियोजना संचालक आत्मा श्री एम.एस. धार्वे ने प्राकृतिक खेती के अंतर्गत बीजामृत एवं जीवामृत के उपयोग तथा सहायक संचालक उद्यानिकी ने सूक्ष्म सिंचाई यंत्रों के माध्यम से जल के प्रभावी उपयोग पर जानकारी दी। इस दौरान श्री विजय मोरे, श्री मोहन डामोर एवं श्री ज्वाला सिंगार ने भी अपने अनुभव साझा किए।
कार्यशाला में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. वी.के. सिंह, उप संचालक कृषि श्री एस.एस. चौहान, परियोजना संचालक आत्मा श्री जी.एस. त्रिवेदी, पदोन्नत उप संचालक कृषि श्री एच.एस. चौहान, सहायक संचालक उद्यानिकी श्री एम.एस. मुझाल्दा, सहकारिता विभाग के श्री भट्ट, अनुविभागीय कृषि अधिकारी थांदला एवं झाबुआ श्री एन.एस. मंडलोई, सहायक संचालक कृषि श्री बी.एस. बघेल एवं श्री एस.एस. रावत, उप परियोजना संचालक आत्मा श्री एम.एस. धार्वे सहित जिले के समस्त वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एवं विभागीय मैदानी अमला उपस्थित रहा।
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