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राज्य कृषि समाचार (State News)

रांची के ICAR-IIAB में नई इमारतों का उद्घाटन, रबी से पहले 1500 किसानों को मिली नैनो खाद और बीज किट

13 अक्टूबर 2026, रांची: रांची के ICAR-IIAB में नई इमारतों का उद्घाटन, रबी से पहले 1500 किसानों को मिली नैनो खाद और बीज किट -केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 8 अक्टूबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रांची स्थित भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (ICAR-IIAB) में कई नई इमारतों का उद्घाटन किया। इसी मौके पर संस्थान परिसर में रबी सीजन से पहले किसान गोष्ठी और इनपुट वितरण कार्यक्रम भी हुआ, जिसमें रांची, खूंटी, गुमला और रामगढ़ जिलों के करीब 1,500 किसान पहुंचे।

उद्घाटन की गई इमारतों में एक एडमिन-कम-स्कूल भवन, बिरसा मुंडा बहुउद्देशीय सभागार, जयपाल सिंह मुंडा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और एक नई नेक्स्टजेन ब्रीडिंग फैसिलिटी शामिल है। संस्थान परिसर में एक नए गेस्ट हाउस की आधारशिला भी रखी गई, जिसकी लागत करीब 119 करोड़ रुपये आंकी गई है।

लैब से खेत तक पहुंचाने की कोशिश

मंत्री चौहान ने अपने संबोधन में वैज्ञानिकों के शोध को खेत तक पहुंचाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में देशभर में खेत बचाओ अभियान शुरू किया जाएगा, जिसमें मिट्टी की सेहत सुधारने और संतुलित खाद के इस्तेमाल पर जोर रहेगा।

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उद्घाटन से पहले दिल्ली में डेयर सचिव और आईसीएआर महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने भी संस्थान के वैज्ञानिकों से संवाद किया था। उन्होंने कृषि अनुसंधान में नई सोच और तरीकों पर काम करने की जरूरत बताई।

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भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान पिछले कई वर्षों से झारखंड और आसपास के आदिवासी बहुल इलाकों में किसानों के लिए बेहतर बीज और तकनीक पर काम कर रहा है। संस्थान परिसर में अब स्कूल, सभागार और खेल सुविधाओं के साथ प्रशिक्षण का दायरा भी बढ़ेगा, जिससे आसपास के गांवों के बच्चों और किसानों दोनों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

किसानों को मिले नैनो खाद और बीज किट

गोष्ठी में शामिल किसानों को अनुसूचित जाति उपयोजना और जनजातीय उपयोजना के तहत कई तरह की सामग्री बांटी गई। इसमें नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और मिनरल मिक्सचर शामिल रहे।

इसके साथ ही किसानों को गेहूं, मटर, सरसों और सब्जियों के उन्नत बीज किट भी दिए गए। कुछ किसानों को दुधारू पशुओं के दूध को ठंडा रखने के लिए मिल्क कैन कूलर भी मिले।

टमाटर और बैंगन की उच्च उत्पादकता वाली किस्मों के बीज भी इस मौके पर बांटे गए, ताकि किसान आने वाले रबी सीजन में बेहतर उत्पादन ले सकें। कार्यक्रम में मौजूद वैज्ञानिकों ने किसानों को मिट्टी जांच और संतुलित खाद प्रबंधन की भी सलाह दी, ताकि यूरिया के ज्यादा इस्तेमाल से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

झारखंड के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग से जुड़े अधिकारी भी इस आयोजन में मौजूद रहे। कार्यक्रम का मकसद रबी बुवाई से पहले किसानों तक जरूरी इनपुट और जानकारी दोनों पहुंचाना था, खास तौर पर उन इलाकों में जहां छोटे और आदिवासी किसानों की तादाद ज्यादा है।

संस्थान के वैज्ञानिकों के मुताबिक आने वाले महीनों में इन्हीं चार जिलों में फिर से ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें मिट्टी की सेहत, जल प्रबंधन और फसल विविधीकरण पर जोर रहेगा। डिजिटल कृषि मिशन के तहत किसानों का पंजीयन भी इन्हीं कार्यक्रमों से जोड़ा जा रहा है, जिससे आगे चलकर योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाना आसान होगा।

नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की बोतलें सामान्य बोरी वाली खाद के मुकाबले हल्की और इस्तेमाल में आसान मानी जाती हैं, जिससे ढुलाई और भंडारण का खर्च भी कम होता है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह एक किफायती विकल्प बन सकता है, बशर्ते इसका छिड़काव सही समय और सही मात्रा में किया जाए।

झारखंड के ज्यादातर इलाकों में खेती अब भी मौसम पर निर्भर है, और कई किसान परिवार खेती के साथ-साथ पशुपालन पर भी निर्भर रहते हैं। यही वजह है कि इस कार्यक्रम में बीज किट के साथ मिल्क कैन कूलर जैसी चीजें भी शामिल की गईं, ताकि किसानों की अलग-अलग जरूरतों का ध्यान रखा जा सके।

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