राज्य कृषि समाचार (State News)

चना एवं मसूर उपार्जन के लिए जिला स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित

बायोमैट्रिक सत्यापन के बाद ही होगी चना एवं मसूर की खरीदी

01 अप्रैल 2026, छिंदवाड़ाचना एवं मसूर उपार्जन के लिए जिला स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित – शासन के निर्देशानुसार रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर पंजीकृत कृषकों से चना एवं मसूर का उपार्जन 30 मार्च से 28 मई 2026 तक किया जाएगा। जिला छिंदवाड़ा के लिए 11 तथा जिला पांढुर्णा के लिए 02 उपार्जन केन्द्रों का निर्धारण जिला स्तरीय उपार्जन समिति द्वारा किया गया है।

कलेक्टर श्री हरेंद्र नारायन के निर्देशानुसार 31 मार्च 2026 को जिला पंचायत सभाकक्ष में जिला उपार्जन समिति के सदस्यों, उपार्जन संस्थाओं के समिति प्रबंधकों, ऑपरेटरों, नाफेड के जिला प्रतिनिधियों एवं सर्वेयरों, नोडल एवं सहायक नोडल अधिकारियों, वेयर हाउस प्रबंधकों तथा गोदाम प्रभारियों का जिला स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में शासन द्वारा निर्धारित उपार्जन नीति की विस्तृत जानकारी दी गई।

नाफेड के जिला प्रभारी श्री मोटेकर ने एफएक्यू गुणवत्ता मानकों के अनुरूप खरीदी का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। उपायुक्त सहकारिता द्वारा समिति प्रबंधकों एवं ऑपरेटरों को खरीदी केन्द्रों पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जिला विपणन अधिकारी ने जानकारी दी कि केंद्र पर बारदाना एवं सर्वेयर की व्यवस्था पूर्ण कर ली गई है। वेयरहाउस के जिला प्रबंधक श्री डेहरिया ने बताया कि सभी खरीदी केंद्रों (वेयरहाउस/गोदाम) में छन्ना, पंखा, ग्रेडर, बिजली, छाया एवं पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

  उप संचालक कृषि श्री जितेन्द्र कुमार सिंह ने निर्देशित किया कि खरीदी संस्थाएं केवल निर्धारित एफ ए क्यू मानकों के अनुसार ही उपार्जन करें। यदि कहीं भी इन मापदंडों का पालन नहीं पाया जाता है, तो संबंधित के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

चना उपार्जन हेतु एफएक्यू मापदंड:-   विजातीय तत्व – 1 प्रतिशत , अन्य खाद्यान्न – 3 प्रतिशत,क्षतिग्रस्त दाने – 3 प्रतिशत,  आंशिक क्षतिग्रस्त/बदरंग दाने – 4 प्रतिशत,  सूखे, कुम्हलाए एवं टूटे दाने – 6 प्रतिशत, मिश्रित दाने – 2 प्रतिशत, कीटग्रस्त दाने – 4 प्रतिशत,  अधिकतम नमी – 14 प्रतिशत

· मसूर उपार्जन हेतु एफएक्यू मापदंड:  विजातीय तत्व – 2 प्रतिशत, मिश्रित दाने – 3 प्रतिशत, क्षतिग्रस्त दाने – 3 प्रतिशत,आंशिक क्षतिग्रस्त/बदरंग दाने – 4 प्रतिशत, सूखे, कुम्हलाए एवं टूटे दाने – 3 प्रतिशत, कीटग्रस्त दाने – 4 प्रतिशत,अधिकतम नमी – 12 प्रतिशत।

  प्रशिक्षण के माध्यम से सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उपार्जन प्रक्रिया को सुचारू एवं पारदर्शी रूप से संचालित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।

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