राज्य कृषि समाचार (State News)

रासायनिक खाद से बढ़ रही बीमारियां, जैविक खेती ही समाधान: राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा

27 जून 2026, रायपुर: रासायनिक खाद से बढ़ रही बीमारियां, जैविक खेती ही समाधान: राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा – छत्तीसगढ़ के सारंगढ़ जिले में शनिवार को आयोजित ‘प्राकृतिक एवं जैविक खेती कार्यशाला’ और ‘खेती बचाओ अभियान’ के दौरान राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने किसानों से रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि बढ़ती बीमारियों और मिट्टी की घटती उर्वरता का प्रमुख कारण रासायनिक खेती है, जबकि प्राकृतिक और जैविक खेती ही इसका स्थायी समाधान है।

उत्पादन बढ़ा, लेकिन स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि लगभग 50 वर्ष पहले किसान खेतों में गोबर खाद, केंचुआ खाद और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते थे। उस समय रासायनिक खादों का इस्तेमाल बहुत कम होता था। उन्होंने कहा कि आधुनिक खेती के कारण उत्पादन तो बढ़ा है, लेकिन इसके साथ ही रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग भी तेजी से बढ़ा है।

मंत्री ने कहा कि पहले जहां प्रति एकड़ उत्पादन 8 से 9 क्विंटल होता था, वहीं अब यह बढ़कर 35 से 40 क्विंटल तक पहुंच गया है। हालांकि, उत्पादन बढ़ने के साथ भोजन में रासायनिक तत्वों की मात्रा भी बढ़ी है, जिसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि आज लोग मेहनत से कमाई गई राशि का बड़ा हिस्सा इलाज और अस्पतालों में खर्च करने को मजबूर हैं।

पंजाब की ‘कैंसर ट्रेन’ का किया जिक्र

टंकराम वर्मा ने रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों का उल्लेख करते हुए पंजाब का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब देश के सबसे अधिक कृषि उत्पादन वाले राज्यों में शामिल है, लेकिन वहां कैंसर के मरीजों की संख्या भी चिंताजनक स्तर तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि पंजाब से चलने वाली एक ट्रेन को लोग ‘कैंसर ट्रेन’ के नाम से जानते हैं, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में भी ऐसे लोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से प्रभावित हो रहे हैं, जो न तो तंबाकू का सेवन करते हैं और न ही किसी प्रकार का नशा करते हैं। इसका एक बड़ा कारण भोजन के माध्यम से शरीर में पहुंचने वाले रासायनिक तत्व हैं। इसलिए किसानों को जैविक खेती की ओर लौटने की आवश्यकता है।

किसानों की समृद्धि से होगा राज्य का विकास

राजस्व मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों की समृद्धि के बिना छत्तीसगढ़ का विकास संभव नहीं है।

उन्होंने बताया कि सरकार ‘मोदी की गारंटी’ के तहत किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान की खरीदी कर रही है। इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है और वे आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं।

भूमिहीन मजदूरों को भी मिल रहा लाभ

मंत्री वर्मा ने कहा कि जिन कृषि मजदूरों के पास खेती योग्य भूमि नहीं है, उनके लिए राज्य सरकार ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय कृषि मजदूर कल्याण योजना लागू की है। इस योजना के तहत प्रदेश के लगभग 5 लाख पंजीकृत भूमिहीन कृषि मजदूरों के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल किसानों ही नहीं, बल्कि कृषि क्षेत्र से जुड़े सभी वर्गों का जीवन स्तर बेहतर बनाना है।

किसानों को बांटी गई जैविक खाद किट

कार्यक्रम के दौरान मंत्री टंकराम वर्मा ने पात्र हितग्राहियों को राशन कार्ड वितरित किए और किसानों को जैविक खाद किट भी प्रदान की। साथ ही ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने ‘गौ ग्राम जनजागरण वाहन’ को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती और गौ-आधारित कृषि के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

वैज्ञानिकों ने बताए प्राकृतिक खेती के फायदे

कार्यशाला में कृषि वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों ने मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ाने, कार्बनिक पदार्थों (ह्यूमस) को समृद्ध करने और रासायनिक लागत कम करने के उपायों पर विस्तृत जानकारी दी। किसानों को वर्मीकंपोस्ट, वर्मीवॉश, नाडेप खाद तथा ढैंचा, सनई और मूंग जैसी हरी खादों के उपयोग के बारे में बताया गया।

महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार जैविक कीटनाशकों और खादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसका अतिथियों और किसानों ने अवलोकन किया।

प्राकृतिक खेती से सुरक्षित होगा भविष्य

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि प्राकृतिक और जैविक खेती केवल उत्पादन का तरीका नहीं, बल्कि मिट्टी, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने का माध्यम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान धीरे-धीरे रासायनिक खेती पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक खेती को अपनाएं, तो खेती की लागत घटेगी, मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी और उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध होंगे।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, कृषि विभाग के अधिकारियों तथा बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।

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