राज्य कृषि समाचार (State News)सरकारी योजनाएं (Government Schemes)

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में डिंडौरी देश में अव्वल

जुलाई में 100 चयनित जिलों में पहला स्थान, 36 योजनाओं के बेहतर समन्वय और निगरानी से मिली उपलब्धि

20 अगस्त 2026, भोपालप्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में डिंडौरी देश में अव्वल – मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के क्रियान्वयन में देश के 100 चयनित जिलों में जुलाई माह में प्रथम स्थान हासिल किया है। जिले को यह उपलब्धि कृषि से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों और 36 योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, विभागीय समन्वय तथा प्रभावी निगरानी के परिणामस्वरूप मिली है।

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि करने, सिंचाई संसाधनों एवं कृषि अधोसंरचना को मजबूत करने और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देना है। डिंडौरी ने इन क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम करते हुए देश के चयनित जिलों में अपनी अलग पहचान बनाई है।

कोदो-कुटकी की खेती को बढ़ावा

डिंडौरी में 34,700 हेक्टेयर क्षेत्र में कोदो-कुटकी की खेती की जा रही है। इससे 52,282 कृषक परिवार और 14 एफपीओ जुड़े हैं। जिले के पारंपरिक श्रीअन्न कोदो-कुटकी को जीआई टैग मिलने से इसकी पहचान देश-विदेश में और मजबूत हुई है।

रानी दुर्गावती श्रीअन्न योजना के तहत अब तक 5,036 किसानों से 3,000 क्विंटल कोदो-कुटकी की खरीदी की जा चुकी है। इस वर्ष 10,000 क्विंटल खरीदी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

प्राकृतिक खेती में भी उल्लेखनीय प्रगति

जिले में 33 जैव संसाधन केंद्र स्थापित किए गए हैं। इनके माध्यम से 67,155 लीटर वर्मी वॉश एवं जीवामृत का उत्पादन कर 390 हेक्टेयर क्षेत्र में उपयोग किया गया है। वहीं 15,928 किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े हैं। जिले में 8,400 हेक्टेयर क्षेत्र का जैविक प्रमाणीकरण भी पूरा किया जा चुका है।

कृषि मशीनीकरण को मिली गति

आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के तहत सुपर सीडर और हैप्पी सीडर जैसी मशीनों के माध्यम से 38,518 हेक्टेयर क्षेत्र में कृषि मशीनीकरण किया गया है। किसानों को 305 उन्नत कृषि यंत्र भी उपलब्ध कराए गए हैं। इससे खेती में श्रम और समय की बचत के साथ आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने में मदद मिल रही है।

जल संरक्षण और सूक्ष्म सिंचाई पर जोर

कृषि को सिंचाई सुविधा से जोड़ने के लिए जिले में 5,100 हेक्टेयर क्षेत्र में वर्षा जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इसके अलावा 678 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियां लागू की गई हैं। इससे जल के बेहतर उपयोग और कृषि उत्पादन को स्थायित्व देने की दिशा में मदद मिल रही है।

डिंडौरी की यह उपलब्धि बताती है कि कृषि, प्राकृतिक खेती, श्रीअन्न, मशीनीकरण, सिंचाई, पशुपालन और किसान प्रशिक्षण जैसी योजनाओं को एकीकृत तरीके से लागू करने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय से कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

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