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राज्य कृषि समाचार (State News)

पांच रंगीन गाजरों की किस्में विकसित

भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान का बेहतर प्रयास

वाराणसी। अब आप जल्द ही गाजरों के विभिन्न रंगों के जूस, हलवा, सब्जी का स्वाद ले सकेंगे। यह गाजर आकर्षक तो होंगे ही साथ ही औषधीय गुणों से भरपूर भी होंगे। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर) ने 8 साल की मेहनत के बाद लाल, काले, पीले, नारंगी व बहुरंगी गाजर की प्रजाति विकसित की है। काला गाजर अप्रैल से ही बाजार में उपलब्ध हो जाएगा, वहीं पीला, नारंगी व बहुरंगी गाजर 2-3 साल में व्यवसायिक उपयोग में आ सकेंगे।

भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. जगदीश सिंह ने बताया कि वर्षों की मेहनत के बाद संस्थान ने गाजर की पांच रंगीन प्रजातियां विकसित की हैं यह सभी औषधीय गुणों से भरपूर हैं। इनका विभिन्न स्थानों पर ट्रायल भी हो चुका है तथा शीघ्र ही यह बाजार में उपलब्ध होंगी।

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सभी प्रजाति के गाजर में खनिज तत्व पोटेशियम, कैल्शियम, सल्फर, लौह, मैगनीज एवं खाद्य रेशा प्रचुर मात्रा में हैं। लाइकोपिन, बीटा-कैरोटीन, ल्यूटिन व एंथोसायनिनि जैसे जैव रसायन की मौजूदगी के कारण एंटी-ऑक्सीडेंट व प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक है। यह त्वचा को कोमल, आकर्षक बनाने में भी सहयोग करता है। आंखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक है। नियमित सेवन से रतौंधि, ह्रदय रोग, धूप से होने वाली त्वचा की समस्या से बचाव करेगा। इसमें मौजूद खाद्य-रेशे कब्ज से बचाने के साथ ही कोलेस्ट्राल, उच्च रक्तदाब को नियंत्रित करेंगे और हड्डियों, मांसपेशियोंं को मजबूत बनाने में सहायक होंगे।

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